Connect with us

Hi, what are you looking for?

Rail Hunt

रेल न्यूज

TATANAGAR : 24 लाख की चावल चोरी में पानी पर लाठी पीट रहा आरपीएफ… आखिर कौन उड़ा ले गया 1259 बोरी चावल !

टाटानगर आरपीएफ पोस्ट और जेल भेजे गये आरोपी
  • टाटानगर में कॉमर्शियल के दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर बढ़ रहा आक्रोश, डीआरएम भी गंभीर 
  • आरपीएफ के ”क्रिमिनल मिसप्रोपेएिशन” पर उठाये गये सवाल, सवालों के घेरे में जांच व कारवाई 
  • गुड्स क्लर्क आरोपी तो सीजीएस-सीसीआई-टीएनसी-एफसीआई-आरपीएफ कैसे रह गये बेदाग !   

JAMSHEDPUR. एफसीआई का 24 लाख का चावल गायब होने के मामले में टाटानगर आरपीएफ द्वारा दो रेलकर्मियों की गिरफ्तारी ने कई सवालों को जन्म दे दिया है. दोनों रेलकर्मी कॉमर्शियल विभाग से जुड़े हैं और गुड्स शेड के कर्मचारी हैं. सूरज कुमार और मुकेश कुमार को आरपीएफ ने नोटिस देकर जांच के लिए बुलाया था जिन्हें पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया. दोनों पर रेलवे संपत्ति के साथ ”क्रिमिनल मिसप्रोपेएिशन” का आरोप लगाया गया है. हालांकि रेलवे कॉमर्शियल के लोगों का कहना है कि यह गिरफ्तारी संदिग्ध है और मामले को अलग रंग देने का प्रयास किया जा रहा. रेलकर्मियों की माने तो आरपीएफ ने इस मामले में गुड्स क्लकों को बली का बकरा बनाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया है.

क्या है मामला 

12 मार्च 2024 को ओडिशा के कांताबांजी से पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर के लिए मालगाड़ी वैगन से चावल का रैक रवाना किया गया था. इसमें एक वैगन सीक होने के कारण वहीं अलग कर दिया गया था जो बाद में टाटा एफसीआई आ रहे दूसरे रैक के साथ जोड़कर टाटा भेजा गया. सूत्रों के अनुसार यह रैक 30 जनू 2024 को टाटानगर पहुंचा. यहां कृष्णानगर जाने वाले वैगन को अलग नहीं किया गया बल्कि दो दिन बाद रैक 2 जुलाई को टाटा के बर्मामाइंस यार्ड में अनलोडिंग के लिए प्लेस किया गया जहां से एफसीआई ने चावल की अनलोडिंग की. उधर दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर एफसीआई ने एक वैगन में चावल नहीं पहुंचने की बात दर्ज कराते हुए रेलवे के सामने क्षतिपूर्ति क्लेम किया.

मामला 2025 में टाटानगर तक पहुंचा. इसके बाद मामले में जांच शुरू हुई. आरपीएफ आईजी से लेकर सीनियर डीएसई तक ने मामले की जांच की लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका कि आखिर वैगन से चावल कहां उतारा गया. टाटानगर एफसीआई ने साफ किया कि उसके रैक में जो अतिरिक्त  वैगन आया था वह पहले से खाली था. एफसीआई ने एक वैगन चावल अपने यहां अनलोड होने की बात से इंकार करते हुए उसे खाली बताया है. इसके बाद चावल गायब होने का यह मामला टाटानगर रेलवे यार्ड में दो दिनों तक मालगाड़ी खड़ी रहने के बीच आकर उलझ गया है. अब  तक इस मामले में आरपीएफ के हाथ कुछ नहीं लगा है. कहा जा रहा है कि जांच के नाम पर आरपीएफ के लोग ‘पानी पर लाठी पीटने’ वाली कवाहत को चरितार्थ कर अपनी गर्दन बचाने में जुटे हैं, और रेलकर्मियों को बली का बकरा बना दिया गया है?

एक वैगन का 1259 बोरी चावल कहां गया … 

एफसीआई के अनुसार वैगन से चावल उसके यहां नहीं उतरा गया और उसके रैक से आयी आपूर्ति में कोई कमी नहीं थी. तब पूरा एक वैगन में लोड 1259 बोरा चावल कहां गया ? अगर यार्ड में चोरी की गयी तो क्या चोरों के निशाने पर सिर्फ वहीं एक वैगन था? इसका जबाव भी रेलवे अधिकारी देते कि रेलवे यार्ड में इतनी बड़ी मात्रा में चावल की बोरियां उतारकर ट्रक पर लोड करना आरपीएफ अथवा दूसरे अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है. नये प्रावधान के तहत अब मालगाड़ियों में सील की जांच जोनल इंट्री वाले स्टेशनों पर ही होती है. ऐसे में झारसुगुड़ा में जांच में सील सही पाया गया था. टाटानगर यार्ड में मालगाड़ी वैगन के सील की जांच की गयी अथवा नहीं यह जांच का विषय है. अगर यह चावल साइडिंग में उतारा गया तो भी इसमें एफसीआई की भूमिका संदिग्ध है.

ड्यूटी की लापरवाही या सुनियोजित चोरी … 

रेलवे कॉमर्शियल विभाग के लोगों का कहना है कि पूरा मामला सिर्फ लापरवाही का हो सकता है लेकिन गुडस क्लर्को को चोरी का आरोपी बनकार जेल भेजना गलत है. उनका कहना है कि एनआर वैगन के लिए डिटैच मेमो नहीं देना और बैगन को डिस्पैच नहीं कर यार्ड में भेजे जाने के लिए सीधे तौर पर टीएनसी यानी ऑपरेटिंग की जिम्मेदारी होती है. जबकि आरपीएफ ने इस मामले में गुडस क्लकों को साफ्ट टार्गेट बनाते हुए ”क्रिमिनल मिसप्रोपेएिशन” का केस बना दिया है. कहां जा रहा है कि अगर इस मामले में दो गुड्स क्लर्क आरोपी है तो सीजीएस और सीसीआई को इससे अलग कैसे रखा जा सकता है? हालांकि मामले में एफसीआई के साथ सीजीएस और अन्य लोगों की भी भूमिका की जांच करने की बात आरपीएफ की ओर से कही जा रही है. आरपीएफ के सेवानिवृत्त एक अधिकारी ने बताया कि दबाव के बीच आरपीएफ की यह कारवाई आधी-अधूरी जांच पर आधारित है. यह NR वैगन था इसलिए इसकी कस्टोडियन ऑपरेटिंग और आरपीएफ ही होता है. हालांकि अभी यह जांच का विषय है.

आदित्य चौधरी के मौन के बीच आयी मनीष पाठक की याद 

रेलवे कॉमर्शियल विभाग के दो लोगों को जेल भेजने के मामले में सीनियर डीएसएम आदित्य चौधरी के मौन के बीच कर्मचारियों में नयी चर्चा शुरू हो गयी है. इस मामले में पूर्व सीनियर डीसीएम मनीष कुमार पाठक को याद किया जा रहा है जिनके कार्यकाल में वाटर वेंडिंग मशीन की चोरी का आरोप लगाकर रेल कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी थी.

इसमें सीसीआई, सीपीएस, समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था. टाटा रेल पुलिस ने जांच में कई बार इन लोगों को बुलाया गया. हालांकि पूरे जांच प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन सीनियर डीसीएम मनीष पाठक रेलकर्मियों की ढाल बनकर खड़े रहे. नतीजा रहा कि रेलकर्मियों को जांच में आखिरकार राहत मिली. इस घटना के बाद बतौर अधिकारी मनीष कुमार पाठक की चर्चा की जाने लगी है.

उभर रहे सवाल, जिसका खोजा जा रहा है जबाव

  • क्या चावल की चोरी टाटानगर रेलवे यार्ड में ही हुई है, जिसमें आरोपी सिर्फ दो क्लर्क है ?
  • क्या एक वैगन से 1259 बोरी चावल की चोरी बिना आरपीएफ के मिलीभगत के संभव है?
  • एनआर वैगन की कस्टडी, डिटैच व चोरी में सुरक्षा एजेंसी की भूमिका क्यों तक नहीं हुई ?
  • मामला चोरी का है तो सुरक्षा की जांच व कार्रवाई के दायरे से आरपीएफ अलग कैसे ?
  • दो क्लर्कों ने चोरी को अंजाम दिया तो सीसीआई और सीजीएस जांच के दायरे में क्यों नहीं ?
  • चावल अनलोडिंग करने से लेकर बाजार में खपाने तक सुरक्षा एजेंसियां कहां सो रही थी?
  • अगर चावल एफसीआई में उतारा गया तो उसके लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गयी?
Spread the love

अभी अभी

You May Also Like

न्यूज हंट

इमरजेंसी आरक्षण कोटा आवंटन में चल रहे गोलमाल की भी जांच कर रही है सीबीआई ठेकेदार से बकाया 8.50 लाख का लंबित बिल क्लीयर...

आरपीएफ-जीआरपी

Dhanbad : धनबाद के डीआरएम कार्यालय में शुक्रवार को CBI ने छापेमारी की है. छापेमारी में SR DEE (G)  संजीव कुमार को हिरासत में...

आरपीएफ-जीआरपी

दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस यूनियन के भोजूडीह ब्रांच का वर्किंग प्रेसिडेंट है रविंद्र कुमार  DHANBAD. सीबीआइ की टीम ने भोजूडीह रेलवे जंक्शन के बंगलोपाड़ा...

न्यूज हंट

डिवीजन के दो TTE मिहिर कुमार और शहजादा खान को मिलती है हावड़ा – बेंगलूरु दुरंतो में लगातार ड्यूटी प्रीमियम लिंक के नाम पर...