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चक्रधरपुर RPF कमांडेंट ने बनायी परंपरा को रखा जीवंत, सुर्खियां बटोर रहा अंतिम ‘Rourkela Inspection’!

PHOTO (FILE)
  • साहब के राउरकेला पहुंचने से लेकर निरीक्षण और वापसी तक बेखौफ जारी रही अवैध वेंडिंग
  • सीनियर कमांडेंट से मातहत इंस्पेक्टर भी रहे संतुष्ट, लिफाफे के वजन बढ़ाने की होती रही चर्चा
  • आसन्न पोस्टिंग में न सिर्फ कमांडेट बल्कि आईजी तक को प्रभावित करेगी CKP की कार्यप्रणाली       

KOLKATA. रेलवे सुरक्षा बल में किसी भी बड़े अधिकारी के निरीक्षण को काफी गंभीरता से लिया जाता है. कमांडेंट से लेकर डीआईजी-आईजी के निरीक्षण से पूर्व RPF POST को सजाने-संवारने से लेकर केस की फाइल को अपडेट करने और माल गोदाम को व्यवस्थित करने में पोस्ट कमांडरों के आम तौर पर पसीने छूट जाते थे. लेकिन चक्रधरपुर में पदस्थापना के बाद सीनियर कमांडेंट पी शंकर कुट्टी ने जिस तनावमुक्त नयी परंपरा का आगाज किया उसे उन्होंने अपनी विदाई की बेला में भी जीवंत बनाये रखा.

यहां बात हाे रही है CKP कमांडेंट के बीते दिनों राउरकेला RPF पोस्ट के सालाना निरीक्षण की जो इन दिनों RPF महकमे में सुर्खिया बटोर रहा है. कहा जा रहा है कि आम तौर पर ऐसे किसी विभागीय दौरे अथवा निरीक्षण में रेलवे के उपलब्ध रेस्ट हाउस में ही ठहरने का प्रावधान है, लेकिन साहब ने होटल को प्राथमिकता दी, संभव है इसका कारण परिवार का साथ रहना हो. महकमे में इस बात की चर्चा जरूर है कि साहब की इससे पहले भी प्राथमिकता यही होती रही है. कुछ दिन पहले ही साहब टाटा पोस्ट का भी निरीक्षण भी कर चुके हैं.

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अमूमन ऐसे निरीक्षण में विभागीय अधिकारी खासकर अनुशासित बल कहे जाने वाले RPF के लोग परिवार को साथ लाने पर बचते है ताकि निरीक्षण पर अधिक से अधिक फोकस किया जा सके और उनका दौरा विवाद अथवा किसी चर्चा का केंद्र बिंदू नहीं बन जाये. लेकिन राउरकेला में चक्रधरपुर कमांडेंट के दौरे में ऐसा कुछ नहीं दिखा. पोस्ट कमांडर अथवा दूसरे अधिकारियों में तनाव अथवा गंभीरता किसी ने नोटिस तक नहीं की. कहा जा रहा है कि 26 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित निरीक्षण था, लेकिन बड़े साहब 25 दिसंबर 2025 की शाम ही राउरकेला पहुंच गये थे. उनकी वापसी 27 दिसंबर 2025 दोपहर की बतायी जा रही है.

हालांकि इस दौरान साहब ने 26 दिसंबर 2025 को RPF पोस्ट समेत दूसरी इकाइयों का इंस्पेक्शन किया. परेड का निरीक्षण किया. कमियों पर जरूरी दिशा-निर्देश भी दिये. उनका यहां भव्य स्वागत किया गया. इसके बाद यहां बैडमिंटन कोट का उद्घाटन व पौधारोपण किया गया. इस अवसर पर परिवार के सदस्य भी साथ रहे. हालांकि इस बार के पोस्ट निरीक्षण में कुछ नयी चौंकाने वाली बातें  सामने आयी. हमेशा की तरह इस बार साहब के राउरकेला पहुंचने से लेकर वहां से रवानगी तक स्टेशन से लेकर ट्रेनों तक अवैध वेंडिंग बेखौफ जारी रही.

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महकमे में इस बात की चर्चा तेज है कि शायद चक्रधरपुर पोस्टिंग में यह साहब का अंतिम निरीक्षण हो. ऐसे में धार्मिक नगरी राउरकेला में रामचंद्र के परम शिष्य हनुमान का एक भव्य मंदिर भी है. यहां जाकर दर्शन न किया जाये तो जीवन की सार्थकता अधूरी रह जाये. हनुमान के आर्शीवाद से निरीक्षण के बाद RPF के इंस्पेक्टर से लेकर जवान तक राहत महसूस कर रहे हैं. निरीक्षण से मीडिया को पूरी तरह दूर रखा गया. मीडिया कर्मियों को यह उम्मीद थी कि कमांडेंट साहब पोस्ट निरीक्षण के बाद पुरानी परंपरा को तोड़कर दो शब्द कहेंगे लेकिन इस बार भी ऐसा कुछ नहीं हुआ. RPF कमांडेंट ने अपनी ही बनायी परंपरा को जीवंत रखा जो इस बार ‘Rourkela Inspection’ के बाद महकमे में सुर्खियां बटोर रहा है.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि बतौर कमांडेंट पी शंकर कुट्टी से मातहत इंस्पेक्टर भी संतुष्ट रहे और इस बात की सराहना करते है कि साहब के कार्यकाल में किसी को अतिरिक्त रूप से कभी परेशान नहीं किया गया अलबत्ता डिवीजनल मुख्यालय स्तर पर सहयोग ही मिला. हां, यह बात जरूर रही कि इशारों ही इशारों में इंस्पेक्टरों को लिफाफे का वजन बढ़ाने की सलाह जरूर मिलती रही!. बंडामुंडा सीबीआई छापेमारी कांड में प्रभारी टोकस को लेकर कमांडेंट की भूमिका जरूर सवालों में आयी. इसे लेकर सीकेपी में RPF के कार्यप्रणाली की चर्चा दिल्ली DG मुख्यालय तक पहुंची. चर्चा तो यहां तक है कि आसन्न पोस्टिंग में इसका असर न सिर्फ कमांडेंट बल्कि आईजी तक को प्रभावित कर सकता है.

RPF में नीचे से ऊपर तक रामचंद्र, वंदना कर धन्य होते रहे इंस्पेक्टर

चक्रधरपुर रेलमंडल में पी शंकर कुट्टी की पदस्थापना के बाद से ही RPF के इंस्पेक्टर से लेकर जवान तक प्रभु श्री राम के शरण में रहे. जो रामचंद्र की शरण में गया उसका असमय भी कल्याण हुआ लेकिन जिसने उनकी आराधना में असमय कमी की उनके ग्रह-गोचर पर शनि की छाया मंडराने लगी. महकमे के लोग इसे अपने तरह की नयी परंपरा मानकर स्वीकार कर चुके हैं. मासिक वंदना तो ड्यूटी का अनिवार्य हिस्सा है. ऐसा कर पोस्ट कमांडर धन्य होते रहे तो दैनिक वंदना करने वाले दूसरे अधिकारी व जवानों पर भी साहब की कृपा बरसती रही. हालांकि साहब की विदाई की बेला की चर्चा शुरू होते ही महकमे में यह चर्चा भी शुरू हो गयी है कि अब रामचंद्र का क्या होगा? क्या रामचंद्र पर भी शनि की छाया मंडराने लगी है? यह तो आने वाला समय ही बतायेगा …!!

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