- UMRKS ने मंडल रेल प्रबंधक को रेलवे बोर्ड ने नाम सौंपा स्मार पत्र
AGRA. उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (UMRKS) ने रेलवे बोर्ड के उस प्रस्ताव पर गहरी चिंता और विरोध जताया है जिसमें स्वीकृत क्षमता के 2% पदों को खत्म करने को कहा गया है. जोनल रेलवे/प्रोडक्शन यूनिट तथा अन्य इकाइयों को 01.04.2026 की स्थिति के अनुसार स्वीकृत क्षमता का 2% पद वर्ष 2026-27 के लिए लक्ष्य समर्पित करने का निर्देश बोर्ड ने दिया है.
इसके विराेध में UMRKS ने उत्तर मध्य रेलवे में 21 से 29 मई, 2026 तक विरोध पखवाड़े तक आंदोलन कार्यक्रम का ऐलान किया है. यूनियन नेताओं का कहना है कि पदों के समर्पण के ऐसे निर्देश अब वार्षिक नियमित अभ्यास बन गए हैं, जिससे रेलवे कर्मचारियों में व्यापक आक्रोश और आशंका पैदा हो रही है. पहले से ही रेलवे में बड़ी संख्या में रिक्तियां होने के बावजूद स्वीकृत जनशक्ति (manpower) को लगातार कम करना परिचालन क्षमता, कर्मचारियों के मनोबल और ट्रेन परिचालन की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है.
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यूनियन की ओर से रेलवे के कर्मचारियों की भावनाओं और चिंताओं को अवगत कराते हुए रेलवे बोर्ड के ध्यानार्थ मंडल रेल प्रबंधक गगन गोयल को स्मार पत्र दिया गया है. इसमें सुरक्षा, परिचालन दक्षता, कर्मचारी कल्याण और औद्योगिक सद्भाव के व्यापक हित में प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की अपील की गयी है. यही नहीं संघ ने चेतावनी दी है कि अगर अनुकूल समीक्षा नहीं हुई तो रेलवे कर्मचारियों में बढ़ते आक्रोश के कारण संगठन को कर्मचारियों के हितों और रेलवे परिचालन की सुरक्षा की रक्षा के लिए उचित संगठनात्मक कार्रवाई पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
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उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (UMRKS) की ओर से कहा गया है कि रेलवे बोर्ड के 30 हजार पद सरेंडर करने के निर्णय के विरोध में BRMS राष्ट्रव्यापी विरोध पखवाड़ा कार्यक्रम 15 मई से 29 मई तक चलायेगा. इसमें कई योजनाएं बनायी गयी है. ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश भगोर, जिला मंत्री मुकेश चाहर, मण्डल अध्यक्ष श्री हरि बल्लभ दीक्षित, मण्डल मंत्री बंशी बदन झा, राहुल कुमार, आर के गौतम, राजन सिंह, राजीव कुमार, राकेश मीणा जी, संतोष कुमार, आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे.
उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (UMRKS) ने रेलवे बोर्ड को भेजा पत्र
(i) सुरक्षा और परिचालन क्षमता
* सुरक्षा और परिचालन श्रेणियों के पदों के समर्पण से पहले से ही गंभीर जनशक्ति की कमी और बढ़ जाएगी, जिससे सुरक्षित ट्रेन परिचालन प्रभावित हो सकता है.
* भारतीय रेलवे का विद्युतीकरण, लाइन दोहरीकरण/त्रिहरीकरण, नई ट्रेनों का संचालन, स्टेशन पुनर्विकास, तकनीकी उन्नयन आदि के माध्यम से लगातार विस्तार और आधुनिकीकरण हो रहा है. ऐसे विस्तार के लिए जनशक्ति को कम करने के बजाय रिक्तियां को तत्काल भरने की आवश्यकता है.
(ii) अत्यधिक कार्यभार और मानसिक तनाव
* मौजूदा कर्मचारी पहले ही बड़ी रिक्तियों के कारण भारी दबाव में काम कर रहे हैं.
* स्वीकृत क्षमता में और कमी से कार्यभार अत्यधिक बढ़ जाएगा, थकान, तनाव बढ़ेगा और उत्पादकता तथा सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा.
(iii) पदोन्नति और करियर प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव
* प्रोत्रति वाले पदों के समर्पण से कर्मचारियों की पदोन्नति में लंबी स्थिरता हो जाएगी और उनके वैध करियर अवसरों से वंचित रहना पड़ेगा.
* कर्मचारी पहले ही cadre restructuring और vacancy management की कमी के कारण पदोन्नति में देरी का सामना कर रहे हैं.
(iv) आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी का बढ़ता चलन
* नियमित पदों को समाप्त करते हुए आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की संख्या बढ़ाना अप्रत्यक्ष निजीकरण की भावना पैदा करता है.
* इससे संस्थागत विशेषज्ञता, जवाबदेही और दीर्घकालिक कार्यबल स्थिरता कमजोर होती है.
(v) तत्काल भर्ती की आवश्यकता
* पदों को समाप्त करने के बजाय सभी श्रेणियों में मौजूद रिक्तियों को तुरंत भरने की जरूरत है.
* समय पर भर्ती परिचालन दक्षता, कर्मचारी मनोबल और यात्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए अत्यावश्यक है.
भारतीय रेलवे में ऐतिहासिक रूप से स्वस्थ और सामंजस्यपूर्ण औद्योगिक संबंध रहे हैं. किंतु कर्मचारियों की वास्तविक चिंताओं को दूर किए बिना बार-बार जनशक्ति घटाने के उपायों से असंतोष बढ़ेगा और औद्योगिक संबंधों का माहौल प्रभावित होगा.
उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (UMRKS) की मांग
* पद समर्पण की प्रक्रिया की तुरंत समीक्षा की जाए और इसे रोका जाए.
* किसी भी स्थिति में सुरक्षा श्रेणी के पदों को समर्पित न किया जाए.
* मौजूदा रिक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए.
* किसी भी जनशक्ति (manpower) संबंधी नीतिगत निर्णय से पहले मान्यता प्राप्त यूनियनों/महासंघों से उचित परामर्श किया जाए.
Press release


















































































