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ECR : दो दशक से जोन में जमे PFA की ‘सप्लाई चेन’ तोड़ने में नाकाम रहे GM/ECR!, रेलवे बोर्ड पर टिकी नजरें

PATNA. पूर्व मध्य रेल की स्थापना के 24-25 साल में कुछेक अधिकारी ऐसे रहे हैं जो अपनी पूरी नौकरी पटना-दानापुर और हाजीपुर में ही काट चुके हैं. इनमें एक अधिकारी है प्रमुख वित्त सलाहकार. जोनल महकमे से लेकर मीडिया के गलियारे तक इन दिनों पूर्व मध्य रेलवे के PFA लगातार चर्चा में है लेकिन यह चर्चा व्यवस्था से अधिक जातिवादी मानसिकता को लेकर है. यही इनकी पहचान बन चुका है. सेवाकाल का अधिकांश समय इन्होंने महेंद्रू के लेखा कार्यालय में बिताया है. वर्तमान में इन्होंने पूरे सिस्टम में ऐसी ”सप्लाई चेन” बना रखी है जिसे तोड़ पाने में ECR/GM भी लाचार नजर आते हैं.

महेंद्रू कार्यालय में पदस्थाना के दौरान सीनियर अधिकारियों की छत्रछाया ऐसी रही कि इन्होंने पूरे सिस्टम को ही हाईजैक कर रखा था. कहां जाता है कि ECR का निर्माण विभाग जो लगातार सीबीआई छापेमारी के बाद रेलवे बोर्ड तक चर्चा में आया, व्यवस्था के इस भ्रष्टाचार के लिए बहुत हद तक इनकी भी ज़िम्मेदार बनती थी लेकिन रेलवे बोर्ड की नजर इन पर कभी नहीं गयी. ईसीआर के गठन के 24-25 साल में यह अधिकारी लगभग 22-23 साल ईसीआर में ही पोस्टेड रहे. इनके वरदहस्त का ही असर रहा कि महेंद्रू कार्यालय की पहचान ‘भ्रष्टाचार के अड्डा’ के रूप में बन गयी.

कहां तो यहां तक जाता है कि अपनी जाति के कर्मचारियों और अधिकारियों को पटना और दानापुर में सेट करने में इन्होंने पूरा जोर लगाया. एक पुराने पीएफए ने इसको ईसीआर से रेल बदर किया था लेकिन स्वजातीय मेम्बर फाइनेंस के कृपा से इनकी ईसीआर में फिर से वापसी हो गयी. ईसीआर में एक सीएओ के साथ इनकी ऐसी जमी की सारे नियम-कानून को ताक पर रख बिना फंड के करोड़ों के बिल पास कर दिये गये. नियम कानून से बाहर जाकर निजी हित के लिए ठेकेदारों के गलत कार्यों को भी नजर अंदाज किया. अब इसका खुलासा कार्यकाल के आंतरिक जांच और ऑडिट रिर्पोट से ही हो सकती है.  इन दिनों जोन में यह चर्चा तेज है कि पीएफए का एक स्वजातीय इन दिनों महेंद्रू में बिल पासिंग का ट्रेनिंग दे रहा है.

ईसीआर में यह सवाल जरूर अधिकारियों के मन में कौंध रहा है कि आखिर रेलवे बोर्ड की रोटेशनल पॉलिसी के पेंच से यह अधिकारी बार-बार क्यों बाहर रह जाता है? इसकी योग्यता में ऐसा क्या है जो इस बार-बार ईसीआर में पदस्थापित किया जा रहा? इसके ट्रांसफर से संबंधित रेलवे बोर्ड की इंटरनल फाइल की भी जांच हो तो सिस्टम के दुरुपयोग के तार सीधे वहां तक उलझे नजर आयेंगे. विभागीय सिस्टम में इनके मकड़जाल को काफी मजबूत और अटूट माना जाता है क्योंकि ईसीआर आने की इच्छा रखने वाले कई लोगों ने अपने नाम तक वापस ले लिया.

अभी हाल में हुए सीबीआई रेड के बाद FIR में अकाउंट्स विभाग में पैसे लेने की बात सामने आने का मामला सामने आया. हालांकि इस बड़े खुलासे के   50-60 दिन बाद जीएम ने जब हस्तक्षेप किया तब कुछ लोगों को हटाया गया. इस कड़ी में एक महिला अधिकारी को भी बदनाम करने की कोशिश हुई. कहा जाता है कि एक सुनियोजित खेल में जीएम तक को झांसे में रख कर इन्होंने पहले अपनी बिरादरी के लोगों को पटना हाजीपुर और दानापुर में सेटल किया. इसके बाद अन्य को अपने ही कार्यकाल में ही स्थापित कर दिया.

कास्ट बैलेंसिंग में माहिर माने जाने वाले तत्कालीन PFA के कार्यकाल में सोनपुर के एक वरीय मंडल वित्त अधिकारी को गलत आरोप लगाकर हटा दिया था. उस अधिकारी के खिलाफ लिखित में कोई भी शिकायत नहीं थी फिर भी डिवीजन से जोन तक एक झूठी कहानी फैलायी गयी. इसके बाद सुनियोजित साजिश के तहत उनको चलता कर दिया गया. दिलचस्प बात यह रही कि उक्त अधिकारी को चलता करने के बाद एक जाति विशेष के अधिकारी को वहां तत्काल पोस्टिंग दे दी गयी.

विभागीय महकमें में चर्चा है कि यह पूरा खेल ठेकेदारों के इशारे पर चला. हाल में ही हाजीपुर मुख्यालय और दूसरे मंडलों में पहले से पोस्टेड अधिकारियों की वरीयता व योग्यता को दरकिनार कर कास्ट बैलेंसिंग और धनबल के खेल में एक ऐसे अधिकारी की पोस्टिंग मंडल में की गयी जिनका एक साल में SAG प्रमोशन आने वाला है. कास्ट बैलेंसिंग फार्मूला के तहत एक सीनियर स्केल अधिकारी को सोनपुर मंडल में तैनात किया तो उस बैच के ही एक दूसरे अधिकारी को वहीं पुराने पद पर बने रहने दिया गया.

जोन में चर्चा तो इस बात की है कि निर्माण विभाग के SAG अधिकारी को सिर्फ इसलिए हटाया कि वह इनके सप्लाई चेन में बाधक बन रहा था लेकिन बाद में बैकडोर से उस SAG अधिकारी को वहां और बाकी विभाग के टेंडर में नॉमिनेट किया जा रहा. पूरे मामले में दिलचस्प पहलू यह बना हुआ है कि पूर्व मध्य रेलवे के जीएम सब कुछ जानते-समझते हुए भी PFA की सप्लाई चेन तोड़ने में नाकाम दिख रहे. अब नजरें रेलवे बोर्ड पर टिकी है. अगर रेलवे बोर्ड स्तर पर उक्त अधिकारी का इतिहास और केमिस्ट्री की पूरी जांच करायी जाये तो एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होगा जिसकी जड़ें डिवीजन और जोन से आगे बढ़कर रेलवे बोर्ड तक जातीं हैं!

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