- X हेंडल से PCOM, CPTM, DRM, Sr Dom पर की जा रही अभद्र टिप्पणी
- कई डीआरएम का राजदार है PS दंडवते, 15 साल बाद भी नहीं किया गया तबादला !
- डीआरएम रायपुर ने आईडी पर लिया संज्ञान, Sr.DCM को जानकारी जुटाने के निर्देश
- रेलवे के अधिकारियों को दी गलत होने पर कानूनी कार्रवाई करने की चुनौती
RAIPUR. बिलासपुर जाेन से रायपुर डिवीजन के आला अधिकारियों को निशाने पर लेकर लगातार ट्वीटर यानी ‘X’ पर भड़ास निकाली जा रही है. इस दौरान ब्रांच अधिकारियों के खिलाफ अभद्र भाषा की बौछार तक ‘X’ पर की जा रही है. आलम यह है कि रायपुर डीआरएम और सीनियर डीओएम के लिए लगातार अभद्र भाषा लिखकर पोस्ट डाली जा रही है.
X आईडी @AKS6613 से रायपुर डिवीजन के अधिकारियों को ‘बलात्कारी’ तक कहकर संबोधित किया गया. ट्वीटर आईडी की जांच से पता चला कि यह कि पिछले कुछ महीनों से लगातार पर रायपुर रेल मंडल के ब्रांच अधिकारियों और डीआरएम के अलावा बिलासपुर जोन के अधिकारियों को निशाना बनाकर लगातार X आईडी @AKS6613 से टिप्पणी की जा रही है.
इस आईडी से कुल 2411 से अधिक पोस्ट किये गये है इसमें रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है. इसमें व्यवस्था से कमियों से लेकर विभागीय भ्रष्टाचार का जिक्र कर लगातार रेलवे बोर्ड, रेलमंत्री को टैग कर रायपुर के डीआरएम और सीनियर डीओएम पर निशाना साधा गया है.
वेवपोर्टल lalluram.com की रिपोर्ट के अनुसार 19 जुलाई को की गई पोस्ट के बाद डीआरएम रायपुर ने उक्त आईडी को लेकर संज्ञान लिया है. इसके बाद डीआरएम ने Sr.DCM को आईडी के संबंधित जानकारी जुटाने के निर्देश दिए है. संभव है रेल प्रशासन उक्त आईडी के संचालन की जानकारी लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है.
हालांकि X के @AKS6613 हेंडल से रेलवे अधिकारियों पर उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक करने का आरोप लगाया गया है. साथ ही अधिकारियों को यह चुनौती दी गयी है कि यादि वह गलत है कि उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें… वरना सभी भ्रष्ट हैं.
उक्त आईडी से रायपुर रेल मंडल के तमाम डीआरएम को निशाने पर लेकर PS दंडवते का ट्रांसफर नहीं होने की बात लिखी गयी है. ट्वीट में रेलवे बोर्ड के आदेश की कॉपी पोस्ट कर कहा गया है कि उक्त कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई और ट्रांसफर नहीं हो सकता, क्योंकि वो कई डीआरएम का राजदार है. अब तक इस मामले में रायपुर रेल मंडल के अधिकारियों ने पुलिस में कोई शिकायत नहीं की है.
आईडी के कई पोस्ट ऐसे है जिसे पढ़ने के बाद रेलवे अधिकारियों का अनुमान है कि ये कार्य किसी रेलकर्मी द्वारा ही किया जा रहा है. फिलहाल इंटरनल तरीके से उसका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन लगातार हो रहे ट्वीट ने अधिकारियों को परेशान कर दिया है.














































































