- ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रकिया को लेकर लगातार सवालों में घेरे में आ रहा है कार्मिक विभाग
- नियमों के विरुद्ध सीनियर को ब्रांच लाइन में दी पोस्टिंग, विरोध से रेल प्रशासन बैकफुट पर
- यूनियन नेताओं की चॉइस पोस्टिंग के लिए दरकिनार कर दिये गये रेलवे बोर्ड के भी नियम
CHAKRADHARPUR. चक्रधरपुर रेलमंडल का कार्मिक विभाग इन दिनों सुर्खियों में है. ऐसे कई मामले सामने आये है जिनमें कार्मिक अपने ही आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं करा सका. संवेदनशील पदों पर रुटीन तबादलों का मामला हो अथवा यूनियन नेताओं को स्पेशल लीव देने का, कार्मिक का पूरा सिस्टम ही सवालों के घेरे में खड़ा नजर आता है. कहां तो यहां तक जा रहा है कि सीनियर डीपीओ डॉ. ऋषभ कुमार सिन्हा की जानकारी में इस बार यूनियन नेताओं के लिए रेलवे बोर्ड के नियम-कानून को भी ताक पर रखा गया है ताकि उन्हें चॉइस पोस्टिंग दी जा सके. इसके लिए मान्यता प्राप्त यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा सीधे तौर पर लॉबिंग करने की बात सामने आयी है.
मामला क्रू कंट्रोलरों की पदोन्नति के बाद पदस्थापन से जुड़ा है, जिसमें कुल 36 क्रू कंट्रोलरों की पदोन्नति के बाद 19-11-2025 को पोस्टिंग आर्डर SER/P-CKP/LR/CC/POSTING/328372/2025/121 जारी किया गया था. इसमें प्रशासनिक तौर पर कुल 34 लोगों की पोस्टिंग की गयी. दो लोगों को इस सूची में पोस्टिंग नहीं देकर होल्ड पर रखा था. ये दो लोग रेलवे मेंस यूनियन के पदाधिकारी थे. पोस्टिंग के बाद रेल कर्मचारियों के बीच खेल में भारी भ्रष्टाचार समाहित होने की चर्चा हाेने लगी. इस आरोपों को बल इस कारण भी मिला कि यह पोस्टिंग भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे पूर्व सीनियर डीईई (ओपी) एसके मीना की अनुशंसा पर हुई थी. उन पर पहले से ही ट्रांसफर-पाेस्टिंग में अनियमितता के आरोप लग चुके हैं.
हालांकि, पोस्टिंग आर्डर जारी होने के साथ ही कुछ क्रू कंट्रोलर ने तो नये स्थान पर योगदान दे दिया लेकिन आदित्यपुर व दूसरे कुछ स्थानों से ब्रांच लाइन भेजे गये कुछ क्रू कंट्रोलरों ने नियमों के विपरीत सीनियरटी को नजरअंदाज कर पोस्टिंग में बड़े गोलमाल का आरोप लगाते हुए आदेश को कानूनी चुनौती दे डाली. बताया जाता है कि यह स्थिति रेल प्रशासन के लिए सांस-छुछुंदर वाली होकर रह गयी थी. कानूनी पेंच में फंसने का डर ही था कि आनन-फानन में ऑन रिक्वेस्ट आवेदन मंगाया गया और तीन माह बाद 26.03.2026 को कार्मिक विभाग की ओर से 28 क्रू कंट्रोलरों की संशोधित दूसरी संशोधित पोस्टिंग सूची OO.NO SER/P-CKP/LR/210/CC/Posting/366788/2026/190 जारी कर दी गयी. बताया गया कि निर्णय में एडीआरएम (ओपी) की भी सहमति रही.
आदेश देखने मात्र से यह स्पष्ट हो जाता है कि विरोध करने वालों के अलावा दूसरे लोगों को भी चॉइस पोस्टिंग दी गयी है. कहना गलत नहीं होगा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाली वर्तमान सरकार की खोखली नीति और बेखौफ अधिकारियों की मनमानी का परिणाम है कि पहले तो चुन-चुनकर कुछ लोगों को मनचाही पोस्टिंग दी गयी और फिर जब विरोध शुरू हुआ तो पोस्टिंग आर्डर संशोधित कर रेलवे बोर्ड के नियम-कानून का खुलेआम मजाक उड़ाया गया. कहां तो यहां तक जा रहा है कि ट्रांसफर/पोस्टिंग के इस भ्रष्ट खेल में सीनियर डीईई (ओपी) और कार्मिक विभाग ही नहीं, कुछ अन्य तथाकथित उच्च स्वास्थ्य अधिकारी भी लिप्त हैं.
इस संशोधित सूची को लेकर तर्क यह दिया जा रहा कि कुछ लोगों का चयन चीफ लोको इंस्पेक्टर के लिए हो गया है. इनकी संख्या 08 है. इस तरह 36 की जगह पोस्टिंग की इस सूची में कुल 28 नाम शामिल है. इसमें उन दो रेलवे यूनियन नेताओं का नाम भी है जिन्हें पहली पोस्टिंग सूची में होल्ड पर रखा गया था. इन यूनियन नेताओं में एक रवि कुमार को टाटा जबकि दूसरे अजय रंजन राय की पोस्टिंग डूमरिता दी गयी. रेलवे मेंस यूनियन रनिंग ब्रांच के सचिव अजय रंजन राय बंडामुंडा में पदस्थापित थे. अब सवाल यह है कि बंडामुंडा में पदस्थापित अजय रंजन राय को चंद KM दूर डुमरिता में चॉइस पोस्टिंग क्यों दी गयी? क्या यही वजह थी कि उनकी पोस्टिंग काे कार्मिक ने तीन माह तक अनाधिकृत रूप से होल्ड पर रखा ? डुमरिता में इस चॉइस पोस्टिंग के खेल की चर्चा बाद में की जायेगी फिलहाल कार्मिक विभाग के इस खेल को समझ लिया जाये.
यहां बड़ा सवाल उठ रहा है कि कार्मिक विभाग को क्रू कंट्रोलर की पोस्टिंग में अचानक परिवर्तन क्यों करना पड़ा? अगर ऑन रिक्वेस्ट ट्रांसफर ही करना था तो यह प्रक्रिया पूर्व में क्यों नहीं अपनायी गयी. प्रशासनिक पोस्टिंग के बाद अचानक रेल प्रशासन बैकफुट पर क्यों आया? यह किसी बड़े गोलमाल का संकेत तो नहीं ? पूरा मामला जांच के दायरे में हैं और कार्मिक विभाग और सीनियर डीपीओ की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा!
यूनियन नेताओं पर मेहरबान सीनियर डीपीओ, नियम-कानून ताक पर!
रेलवे मेंस यूनियन से जुड़े लोगों का नाम पोस्टिंग सूची में बिना स्पष्ट कारण के तीन माह तक होल्ड पर रखना और नयी सूची की चॉइस पोस्टिंग में उन्हें शामिल करना यह सिद्ध करता है कि ‘सिस्टम’ में भ्रष्टाचार का खेल किस सीमा तक पहुंच चुका है. आखिर सीनियर डीपीओ की ऐसी क्या मजबूरी थी कि दो लोगों की पोस्टिंग के लिए नियमों को उन्होंने ताक पर रख दिया. अब इसका जबाव तो सीनियर डीपीओ के पास है लेकिन खबर है कि रेलवे यूनियन नेताओं के आगे सीनियर डीपीओ डॉ. ऋषभ कुमार पूरी तरह से नत-मस्तक हैं. बीते एक से डेढ़ साल में यूनियन नेताओं के जितने स्पेशल लीव को कार्मिक ने स्वीकृति दी है उसकी गहराई से जांच हो जाये तो बड़ा खेल सामने आ सकता है. अब यह वित्तीय घोटाला है या प्रक्रियागत चूक, यह जांच का विषय होगा ? डीआरएम और जीएम को इस पूरे मामले की गहराई से जांच करानी चाहिए.
क्या कहता है ट्रांसफर-पोस्टिंग का नियम, यूनियन का विशेषाधिकार
रेलवे यूनियन से जुड़े लोगों की माने तो मान्यता प्राप्त रेलवे यूनियन के ऑफिस बेयरर के सामान्य तबादलों की स्थिति में कुछ नियम जरूर है (Rights of trade unioun) जो उन्हें तत्काल राहत प्रदान करते है, लेकिन ये नियम पदोन्नति-पोस्टिंग पर लागू नहीं होते. जानकारों का कहना है कि पदोन्नति के बाद यूनियन के दोनों ऑफिस बेयरर की भी अन्य रेलकर्मियों की ही तरह तत्काल प्रभाव से पोस्टिंग दी जानी थी लेकिन कार्मिक ने ऐसा नहीं किया. सवाल यह उठता है कि तीन माह तक कार्मिक ने पोस्टिंग रोकने का क्या आधार तय किया? कार्मिक की ओर से क्या इसकी सूचना डीआरएम (DRM), महाप्रबंधक (GM) या प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी (PCPO) को दी गयी थी? तीन माह बाद आखिर दोनों को किस नियम से चॉइस पोस्टिंग देकर पदोन्नति लिस्ट में एडजस्ट कर दिया गया ? कहां तो यहां तक जा रहा है कि कार्मिक ने दोनों नेताओं को जो समय और लाभ दिया, यह अधिकार उनके पास था ही नहीं! क्रमश :
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.


















































































