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मालगाड़ी का ओवरलोड कोयला हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आया, विस्फोट के साथ लगी आग, डर गये लोग

  • कुछ देर के लिए रेल यातायात प्रभावित, एक घंटे खड़ी रही बरौनी गोंदिया जैतहरी में

BHOPAL. मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन से सोमवार की सुबह गुजर रही थी मालगाड़ी में विस्फोट के बाद एक बड़ा हादसा टल गया. अम्बिकापुर से कटनी जा रही मालगाड़ी का कोयला अचानक ओएचई के 25000 वोल्ट के तार की संपर्क में आ गया. इससे जोरदार चिंगारी के साथ आग निकलने लगी. हाई टेंशन लाइन छू जाने से जोरदार धमाका हुआ. इससे लोग घबरा गये. हालांकि कुछ देर के लिए ट्रेनें बाधित हुईं. हादसा सोमवार सुबह करीब 5 बजे हुआ.

इस दौरान जैतहरी, छुलहा और मौहरी रेलवे स्टेशनों पर कई ट्रेनों को रोका गया. घटना के समय प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर रीवा-चिरमिरी पैसेंजर ट्रेन खड़ी थी और यात्री भी आवागमन कर रहे था. मालगाड़ी दूसरी पटरी पर थी, जिससे कोई बड़ा जानमाल का नुकसान नहीं हुआ. रेलवे सूत्रो के अनुसार मालगाड़ी में ओवरलोड जैसी समस्या नहीं हो सकती, क्योंकि हर जगह इसकी जांच होती है. कोयला वैसे भी ज्वलनशील है उसके अंदर कभी कभी धुंआ निकलने तथा चिंगारी जैसी स्थिति बनने से ओएचई केबल गल कर टूटने की संभावना व्यक्त की जा रही है.

प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों ने बताया कि विस्फोट इतना भयानक था कि काफी देर तक ट्रेन से चिंगारियां निकलती रहीं. रेलकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मालगाड़ी को प्लेटफॉर्म नंबर 4 के अतिरिक्त यार्ड में खड़ा कर दिया. घटना के बाद भी कुछ चिंगारियां निकलती देखी गईं और स्टेशन परिसर में बिजली के तार टूटकर पटरी पर गिर गए. जिससे यात्रियों में दहशत का माहौल बन गया था.

ओवरलोड कैसे हुई, जांच कर रहा विभाग

वहीं एआरएम आर.एस मोहंती ने बताया कि मालगाड़ी अंबिकापुर से कोयला लेकर कटनी की तरफ जा रही थी. गाड़ी ओवरलोड होकर यार्ड से कैसे निकली, इसकी जांच की जा रही है. फिलहाल, लाइन की मरम्मत का काम चल रहा है. हादसे के बाद बरौनी गोंदिया एक्सप्रेस को जैतहरी रेलवे स्टेशन पर रोका गया था. इसे एक नंबर प्लेटफार्म से एक घंटे की देरी से रवाना किया जा सका. रीवा-चिरमिरी एक्सप्रेस को अनूपपुर में ही एक घंटे तक खड़ा रखा गया. 3 मालगाड़ियां जैतहरी और अमलई में रोकी गई थीं.

बिना पूरी जांच के ही रवाना कर दी गयी मालगाड़ी 

अनूपपुर रेलवे स्टेशन पर कोयला हाईटेंशन लाइन से टकराने से धमाका और चिंगारियां निकालने के बाद भी सुरक्षा उपाय नहीं किये गये. बिजली के तार टूटकर पटरी पर गिर गए. बताया जा रहा है कि मामले में जिम्मेदार अफसरों ने बिना जांच किए और लेवलिंग करवाए मालगाड़ी को रवाना कर दिया. हालांकि, मालगाड़ी प्लेटफॉर्म के बीच वाले लूप ट्रैक पर थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया. रेलकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मालगाड़ी को प्लेटफॉर्म नंबर 4 के अतिरिक्त यार्ड में खड़ा कर दिया.

रेलवे अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि कोतमा कालरी से कोयला ट्रेन की वैगन में लोड कर संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट बिरसिंहपुर पाली उमरिया भेजा जा रहा था. ट्रेन रविवार–सोमवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे रवाना हुई थी. जब ट्रेन कोयला यार्ड से बाहर निकाली, तो कोतमा रेलवे स्टेशन के अधिकारियों ने मालगाड़ी को चेक नहीं किया. लोड करने के लिए लेवलिंग भी चेक भी करना होती है. बावजूद बिना जांच किए मालगाड़ी को रेलवे ट्रैक पर चलने योग्य बता दिया.

कोयला लोड कर लेवलिंग भी नहीं कराई

नियमानुसार ओएचई (ओवर हेड केबल) केबल और बोगी के बीच की हाइट में करीब डेढ़ फीट गैप होना चाहिए, जबकि मालगाड़ी के वैगन में ढाई फीट ज्यादा ऊपर तक कोयला लोड कर दिया गया था, जिससे यह ओवरहेड वायर से टकरा गया. एक वैगन में 65 टन कोयला आता है. जहां वैगन केबल से टकराई, वह पुराना रेलवे ट्रैक है. इसकी ऊंचाई भी कम है, इस कारण हादसा हो गया. इसके अलावा, वैगन में कोयला मशीन के जरिए लोड किया जाता है. उसके लेवलिंग के लिए लेबर रखा जाता है, लेकिन इसमें कोयला लोड करके लेवलिंग नहीं कराई गई.

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