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ECR : आरा में अमृत भारत एक्सप्रेस हादसा, सीनियर डीईएन 3 उत्पल कांत का तबादला, आखिर किसे बचाने की हो रही कोशिश?

  • जमीरा हाल्ट एवं कुल्हाड़िया स्टेशन के बीच स्लीपर बदलने का चल रहा है काम
  • पटरी पर रखे स्लीपर से टकराया इंजन, चालक की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
  • कार्य अनुबंध दुर्गा इन्टरप्राइजेज के नाम, काम करा रहा दानापुर के पेटी कान्टैक्टर  

PATNA. “सावधानी हटी, दुर्घटना घटी”, यह सूत्र वाक्य रेलवे से लेकर सड़क परिवहन के मामले में लागू होता है लेकिन जब जान बूझकर लापरवाही के कारण हादसे हो तो उसे गंभीरता से लिया जाना जरूरी है. पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल में 12 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली से चलकर राजेन्द्र नगर आने वाली ट्रेन संख्या 22362 अमृत भारत एक्सप्रेस 13 अप्रैल को आरा जंक्शन से 9.50 बजे रवाना होती है. यह ट्रेन डाउन लाइन में किमी संख्या 585 जमीरा हाल्ट एवं कुल्हाड़िया स्टेशन के बीच पटरी पर रखे कंक्रीट स्लीपर से टकरा जाती है. यह संयोग है कि इसमें ट्रेन बेपटरी नहीं हुई और कोई जनहानि तो नहीं हुई लेकिन रेलवे की संरक्षा उपायों को लेकर यह गंभीर संकेत जरूर दे जाती है.

पूर्व मध्य रेलवे दानापुर मंडल के संरक्षा से जुड़े लोग भी मानते है कि अमृत भारत एक्सप्रेस का दुर्घटनाग्रस्त नहीं होना किसी चमत्कार से कम नहीं. क्योंकि इसी सेक्शन पर 22 नवम्बर 2023 को आरा-बक्सर के बीच नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस हादसे को लोग भूले नहीं है. इसमें छह यात्रियों की मौत हो गई थी जबकि कई यात्री घायल हुए थे. जो परिस्थितियां है उससे स्पष्ट है कि रेलवे अधिकारियों ने इस हादसे से सबक लेना जरूरी नहीं समझा. रघुनाथपुर हादसे में भी रेलवे की जांच में कोई दोषी नहीं मिला, स्पष्ट था कि जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया गया!

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हालांकि 13 अप्रैल 2026 को कुल्हाड़िया एवं जमीरा हाल्ट के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस के हादसे के बाद सेफ्टी को लेकर कई सवाल एक साथ उठ खड़े हुए है. क्योंकि सेक्शन में बीते 24 दिनों से स्लीपर बदलने का कार्य चल रहा था. तब सवाल यह उठता है कि क्या इंजीनियरिंग ने कार्य के दौरान संरक्षा मानकों का पालन नहीं किया? क्या चालकों को कार्य स्थल के लिए जरूरी मेमो नहीं दिया गया था? हालांकि चालक की सतर्कता से हादसा टलने की बात कही जा रही है क्योंकि उसने कंक्रीट स्लीपर से टकराने के बावजूद ट्रेन को नियंत्रित कर लिया.

हादसे के बाद तत्काल प्रभाव से रेलवे ने कई लोगों पर कड़ी कार्रवाई की लेकिन सबसे बड़ा एक्शन दानापुर मंडल के वरीय मंडल अभियंता 3 (सीनियर डीईएन 3) उत्पल कांत पर लिया गया, जिनका तत्काल तबादला बीएलडब्ल्यू बनारस कर दिया गया है. सवाल उठता है कि संवदेक द्वारा सेक्शन में कराये जा रहे कार्य के मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी किसकी थी? यह सेक्शन बिहटा पीडब्लूआई उपेन्द्र कुमार के क्षेत्राधिकार में आता है जो पहले से कई गंभीर आरोपों के घिरे में हैं. दिलचस्प तथ्य यह सामने आया है कि यहां काम दुर्गा इन्टरप्राइजेज, बेगुसराय को दिया गया था लेकिन उसे दानापुर का एक पेटी कान्टैक्टर करा रहा था. इसकी जानकारी रेलवे अधिकारियों को पहले से थी लेकिन किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी!

अमृत भारत एक्सप्रेस हादसे के बाद वरीय मंडल अभियंता का तो स्थानांतरण कर दिया गया लेकिन लापरवाही के कारणों पर इंजीनियरिंग विभाग में मंथन चल रहा है. पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य अभियंता इसकी स्वयं मॉनिटरिंग कर रहे. अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में रेलवे के जिम्मेदार लोगों के साथ संवेदक पर क्या कार्रवाई की जाती है? रेलवे बार-बार हो रहे इस तरह की लापरवाही पर आगे क्या स्टैंड लेता है, या एक अधिकारी का तबादला कर मामले से इतिश्री कर ली जाती है.

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