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    Home » ECR : करोड़ों के टेंडर मिस-मैनेजमेंट के बीच PCEE का दूसरी बार तबादला, चौकड़ी की बेचैनी बढ़ी !
    रेलहंट स्पेशल

    ECR : करोड़ों के टेंडर मिस-मैनेजमेंट के बीच PCEE का दूसरी बार तबादला, चौकड़ी की बेचैनी बढ़ी !

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskDecember 24, 2025
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    • रेल सेफ्टी टेंडर्स में RDSO के नियमों को कमजोर करने के आरोपों पर GM/ECR भी मौन, शिकायत की जांच लटकी
    • पैसेंजर सेफ्टी से सीधे जुड़े प्रोजेक्ट्स में ट्रांसपेरेंसी, टेक्निकल डॉक्यूमेंट्स की अनदेखी गलत परंपरा को दे रही बढ़ावा
    • Sr DEE(G)/DNR की असमय विदाई के पीछे टेंडर, अब निशाने पर कमेटी में शामिल Sr DSTE और Sr DFM   

    PATNA. पूर्व मध्य रेलवे के प्रिंसिपल चीफ इलेक्ट्रकल इंजीनियर (PCEE/ECR) आरके चौधरी का दूसरी बार ट्रांसफर आदेश जारी किया गया है. यह आदेश 11 दिसंबर को जारी किया गया. इसमें उन्हें दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (PCEE/SECR) भेजा गया है. हालांकि अभी वह ECR से रिलीज नहीं हुए हैं लेकिन पूर्व मध्य रेलवे के विद्युत विभाग में करोड़ों के टेंडर मिस-मैनेजमेंट के आरोपों के बीच दूसरी बार जारी उनके तबादला आदेश से जोन से लेकर दानापुर डिवीजन तक विभाग में सक्रिय चौकड़ी की बेचैनी बढ़ गयी है. इसमें बड़ी भूमिका एक तथाकथित करोड़पति एसएसई की बतायी जा रही है जो डिवीजन से लेकर जोन तक अधिकारियों की आंखों का तारा बना हुआ है.

    हालांकि PCEE आरके चौधरी का ECR में कार्यकाल काफी विवादों में भरा रहा है. इसमें गैरजरूरी टेंडर और अवैध भुगतान के कई मामले विजिलेंस के पास तक पहुंचे जिनमें जांच चल रही है. कुछ को दबाव और प्रभाव से होल्ड पर रखा गया है जबकि कुछ का नतीजा आना अभी बाकी है. हालांकि इनमें सबसे दिलचस्प और पेचिदा मामला दानापुर मंडल विद्युत विभाग में सामने आया है. यहां निविदा संख्या EL-50-DNR-OPEN-45/2024-25 में रेलवे बोर्ड की गाइड लाइन को ही दरकिनार कर RDSO-approved OEM(s) को तकनीकी बिड में टेंडर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. इसे भ्रष्टाचार की राह में बढ़े हुए मनोबल का परिचायक माना जा रहा है.

    यह भी पढ़ें : ECR : 31 करोड़ के टेंडर में RDSO एप्रुव कंपनियों के टर्मिनेशन पर GM-PCEE का मौन!, चर्चा में विद्युत विभाग

    इसके बाद RDSO-approved OEM(s) ने निविदा की पारदर्शिता पर सवाल उठाये और मामले को रेलवे बोर्ड से लेकर GM/ECR और PCEE तक उठाया लेकिन दोनों संदिग्ध रूप से मौन साधे रहे. आरोप तो यहां तक लगाया गया कि ऐसे बिडर्स को कॉन्ट्रैक्ट दे दिया गया जो तय सर्टिफ़िकेशन और जरूरी टाइप टेस्ट और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा नहीं करते. हालांकि इसमें बड़ी बात यह सामने आयी कि रेलवे बोर्ड की स्पष्ट गाइड लाइन के बावजूद RDSO-approved OEM(s) को तकनीकी बिड में ही डिस्क्वालिफाई कर दिया गया. इस टेंडर के बाद यह भी सवाल उठाये गये कि ट्रांसपेरेंसी, टेक्निकल डॉक्यूमेंट्स की जांच और स्टैंडर्ड्स को दरकिनार कर निविदा का निष्पादन किया गया है जो पैसेंजर सेफ्टी से साथ खिलवाड़ है.

    दानापुर समेत देश भर चल रहे इस तरह टेंडर विवाद पर एक वरिष्ठ संपादक ने इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के हवाले से सख्त टिप्पणी की है. उसमें बताया है कि किस तरह “सेब की तुलना संतरे से की जा रही है,” और चेतावनी दी गयी है कि इस तरह के तरीके टेक्निकल क्वालिफिकेशन के मकसद को खत्म करते हैं, सेफ्टी के मकसद को कमजोर करते हैं, और पूरे प्रोक्योरमेंट फ्रेमवर्क की क्रेडिबिलिटी से समझौता करते हैं. यह रेल सेफ्टी टेंडर्स में RDSO के नियमों को कमजोर करने और असर डालने का गंभीर कृत्य है. 

    दिलचस्प बात यह रही कि निविदा संख्या EL-50-DNR-OPEN-45/2024-25 में अनियमितता के आरोपों के बीच टेंडर कमेटी में शामिल  Sr DEE (G) शिवेंद्र कुमार का प्रीमेच्योर ट्रांसफर कर दिया गया. उन्होंने डिवीजन में  07.02.2024 को ही प्रभार लिया था और 13.10.2025 को उन्हें चलता कर दिया गया. Sr DEE (G) शिवेंद्र कुमार के तबादले को इसी टेंडर से जोड़कर देखा जा रहा है और कहा जा रहा कि भ्रष्टाचार से सीधे जुड़े इस मामले में शिवेंद्र को विदाई नहीं बल्कि रिहाई दे दी गयी है! ऐसा माना जा रहा है कि टेंडर की गड़बड़ी के लिए अब कमेटी में शामिल Sr DSTE और Sr DFM को निशाने पर लिया जा सकता है ताकि मामले को डिवीजन स्तर पर ही रफा-दफा किया जा सके.

    यह भी पढ़ें : ECR : 31 करोड़ की निविदा में RDSO एप्रुव कंपनी का टर्मिनेशन बनेगा गले की फांस, अब जांच के घेरे में कमेटी!

    तीन माह में रद्द हुआ आदेश, रिलीज नहीं हुए चौधरी, अबकी बार …. 

    PCEE आरके चौधरी का पहली बार ट्रांसफर CAO/GLP के पद पर 04.09.2025 को किया गया था. यहां पदस्थापित मनीष कुमार को उनकी जगह PCEE बनाया गया था. हालांकि दोनों अपने मूल स्थान से रिलीज नहीं हुए और ठीक तीन माह बाद 04.12.2025 को रेलवे बाेर्ड से दिलचस्प रूप से दोनों तबादला आदेश रद्द हो गये. PCEE/ECR आरके चौधरी का दूसरी बार 11.12.2025 को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के PCEE के पद पर ट्रांसफर आदेश जारी हुआ है. उसी आदेश में राजीव कुमार वर्णवाल को PCEE/ECR बनाया गया है. अब तक आरके चौधरी रिलीज नहीं हुए है. कहां जा रहा है कि जोड़-तोड़ का खेल जारी है, चर्चा यहां तक है कि क्या इस बार भी तबादला आदेश रद्द होगा ?

    हार्डिंग पार्क में न डिजाइन न पास हुआ न ड्राइंग, बिना प्लेटफॉर्म बने करोड़ों का भुगतान ! 

    PCEE  आरके चौधरी के तबादले के बाद जोन में टेंडर मैनेजमेंट चौकड़ी की बेचैनी बढ़ी हुई है. इसके कई कारण बताये जा रहे हैं. कहां जा रहा है कि PCEE चौधरी के कार्यकाल में विद्युत विभाग में टेंडर का जो खेल हुआ उसकी तह तक जांच की जाये तो करोड़ों का गोलमाल सामने आयेगा. हालांकि हर स्तर पर गोलमाल की सामने लायी शिकायत पर PCEE कार्यालय मौन रहा.

    कहां तो यहां तक जा रहा है कि एक खास लॉबी पूरी तरह विभाग पर हावी रही और कई ऐसे मामले सामने आये है जिसमें आरोप लगा कि बिना काम के ही कई टेंडर में भुगतान कर दिया गया है. पटना के हार्डिंग पार्क में प्लेटफॉर्म निर्माण का उदाहरण भी इसमें शामिल है. कहां तो यहां तक जा रहा है कि यहां तो न डिजाइन न पास हुआ ड्राइंग, न ही प्लेटफॉर्म का निर्माण हुआ लेकिन संवेदक को आपूर्ति और स्टॉलेशन के नाम पर करोड़ाें का भुगतान कर दिया गया है जो जांच का विषय है. (विस्तृत खबर शीघ्र)

    डिवीजन का एक SSE बना विभाग का बड़ा खिलाड़ी

    डिवीजन का एक एसएसई विद्युत विभाग का बड़ा खिलाड़ी बना हुआ है. नीचे से ऊपर तक टेंडर मैनेजमेंट में उसकी भूमिका अहम होती है. कहने को तो यह रेलवे का कनीय पदाधिकारी है लेकिन इसकी पहुंच जोन से लेकर बोर्ड तक अधिकारियों के बीच बतायी जाती है. उसकी हर जगह मौजूदगी रश्क का भी विषय है और चर्चा का भी. दानापुर डिवीजन से लेकर ECR जोन तक हर कोई इस यक्ष प्रश्न को अपने तरीके से परिभाषित करता दिख रहा कि आखिर उस SSE के भीतर ऐसी कौन से सभी प्रतिभा छिपी हुई है जो Sr DEE से लेकर PCEE तक अमूमन हर अधिकारी तक उसकी पहुंच को आसान बनाती है.

    कुछ कर्मी इसका श्रेय SSE की तीव्र मेधा को देते हैं तो कुछ का कहना है कि उसका सुदर्शन व्यक्तित्व ही उसकी प्रतिभा का डंका बजा रहा है. कुछ को यह चर्चा करते सुने गये कि कामकाज में दक्षता उसे अधिकारियों की नजरों में ले गयी है. तो कुछ का मानना है कि कानाफूसी में महारथ से उसका मार्ग प्रशस्त हो रहा है. उसके विभाग से जुड़े लोग यह भी मानते है कि पत्रम पुष्पम और जुगाड़ जंतर में भी वह सिद्ध हस्त है, लिहाजा समय और आवश्यकता के अनुरूप अपने को फिट साबित करने में वह दूसरे लोगों से अलग निकल जा रहा है. … जारी 

    रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा. 

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