- चक्रधरपुर डिवीजन के डांगोवापोसी में रेलवे क्वार्टर आवंटन में AARM भी टार्गेट पर, क्लर्क पर होगा ‘एक्शन बैन’
- एएआरएम पर भी लटक रही कार्रवाई की तलवार,भ्रष्टाचार पर दोहरा मापदंड अपनाने के लग रहे आरोप
Fraud in railway quarter allocation. चक्रधरपुर रेलमंडल के डांगोवापाेसी में क्वार्टर आवंटन के फर्जीवाड़े में रेल प्रशासन के एक बड़ा निर्णय लिया है. रेल प्रशासन ने क्वार्टर आवंटन की प्रक्रिया में शामिल वेंडर लिपिक समेत यूनियनों के उन तमाम प्रतिनिधियों को हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया है, जिनकी अनुशंसा पर आवंटन को अंतिम रूप दिया गया. रेलवे मेंस यूनियन, एससी-एसटी एसोसिएशन और ओबीसी एसोसिएशन के प्रतिनिधि अब रेलवे की कमेटी का हिस्सा नहीं बन सकेंगे. रेलहंट ने इस मामले में आवंटन रद्द करने के बाद यह सवाल उठाया था कि अगर दोष साबित हो गया है तो दोषियों पर कार्रवाई क्या की जायेगी?
हालांकि क्वार्टर आवंटन की प्रक्रिया में निर्वतमान एएआरएम यशवंत कुमार पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गयी है. ऐसा माना जा रहा है कि आवंटन की पूरी प्रक्रिया को सही तरीके से निष्पादित करने की जिम्मेदारी एएआरएम की थी जो पूरी तरह इस दोषपूर्व प्रक्रिया का हिस्सा बने रहे. रेलवे महकमे में इस बात की चर्चा है कि एएआरएम के खिलाफ एक्शन नहीं होने पर प्रशासन की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में बनी रहेगी. यह सवाल हमेशा उठाया जायेगा कि रेलवे यूनियन कमेटी के सदस्यों और लिपिक पर एक्शन लेकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया!
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मालूम हो कि डांगोवापोसी में ऑपरेटिंग पुल के चार आवास को बिना अधिसूचना जारी किये ही क्वार्टर कमेटी की मिलीभगत से चुनिंदा लोगों को आवंटित कर दिया गया था. आवंटियों में एएआरएम के लिपिक समेत यूनियन प्रतिनिधियों से जुड़े लोग शामिल थे. रेलकर्मी यह मानते है कि यह पहला मामला नहीं है जब रेलमंडल में क्वार्टर आवंटन में ऐसा किया गया हो. उनका कहना है कि डांगोवापोसी में रेलवे क्वार्टर की जरूरत और आवेदकों की लंबी फेहरिस्त ने मामले को हंगामेदार बना दिया और रेल प्रशासन को तत्काल एक्शन लेकर टाइप टू क्वार्टर संख्या बी/115/1, बी/78/1, टी/4/1 और टाइप वन क्वार्टर संख्या ए/25/2 का गलत आवंटन रद्द करना पड़ा है.
हालांकि एडीआरएम विनय कुजूर ने क्वार्टर आवंटन में मिलीभगत के आरोपों के बाद क्वार्टर कमेटी के सदस्यों को बुलाकर फटकार जरूर लगायी लेकिन बड़े गोलमाल में किसी की जिम्मेदारी तय नहीं किये जाने से अब तक रेलकर्मियों में आक्रोश बना हुआ है. रेलकर्मियों का कहना है कि छोटी से घटना अथवा चूक पर सामान्य रेलकर्मी को तत्काल चार्जशीट थमा दी जाती है, ऐसे में आवंटन भ्रष्टाचार से सीधे जुड़े प्रमाणित मामले में अब तक कार्रवाई नहीं किया जाना रेल प्रशासन की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है.
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रेलवे मेंस कांग्रेस नेताओं की पहल और रेलकर्मियों की शिकायत पर अवैध आवंटन रद्द कर अधिसूचना जारी कर क्वार्टर आवंटर प्रक्रिया शुरू करने का आदेश तो दिया गया है लेकिन अब नजर भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में रेल प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी होगी.


















































































