- SERMU के डिवीजनल को-ऑर्डिनेटर एमके सिंह के झारसुगुड़ा दौरे के बाद बढ़ा टकराव
- ब्रांच काउंसिल मीटिंग के बाद सामने आयी तस्वीरों पर नेता और कार्यकर्ता कर रहे टिप्पणी
- बैठक में कुछ चेहरों की मौजूदगी और बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी पर भी उठाये जा रहे सवाल
JHARSUGUDA. दक्षिण पूर्व रेलवे जोन में एकल यूनियन बनकर सामने आयी रेलवे मेंस यूनियन में आपसी कलह और आला नेताओं के बीच चल रही धींगा-मुस्ती चरम पर पहुंच चुकी है. चक्रधरपुर रेलमंडल में तो रेलवे मेंस यूनियन पूरी तरह दो खेमों में बंटी नजर आने लगी है. आलम यह है कि यूनियन के लोग ही मानने लगे है कि केंद्रीय पदाधिकारियों के साथ मंडल संयोजक का तालमेल नहीं होना अब उनकी परेशानी का कारण बनने लगा है. एक-दूसरे के निर्णय को काटने और संगठन में टकराव का नतीजा है कि आम रेलकर्मियों के मुद्दे पीछे छुटते जा रहे है. यूनियन पर प्रशासन हावी है और चुनाव में किये गये वादों को पूरा करने की दिशा में ठोस पहल होती नहीं दिख रही.
खैर…नया मामला सांगठनिक नेतृत्व और कार्यकर्ताओं में अनुशासन का दंभ भरने वाली कॉमरेड यूनियन में बीते दिनों झारसुगुड़ा में आयोजित रनिंग ब्रांच काउंसिल मीटिंग के बाद सामने आया जिसमें अनुशासन की सभी सीमाएं टूटती नजर आयी. यहां डिवीजनल को-ऑर्डिनेटर एमके सिंह की अगुवाई में 25 जुलाई 2025 को ब्रांच काउंसिल मीटिंग का आयोजन किया गया. बैठक में कुछ चेहरों की मौजूदगी और बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी पर संगठन के भीतर और बाहर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

झारसुगुड़ा में यूनियन को-ऑर्डिनेटर का स्वागत करते सदस्य
हालांकि इस बीच यह बात सामने आयी कि झारसुगुड़ा रनिंग ब्रांच काउंसिल की मीटिंग में कर्मचारियों की मूलभूत समस्याओं पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से पुराने पदाधिकारी को बदलते हुए नये पदाधिकारी का चयन किया गया. इसके साथ ही रनिंग ब्रांच के एक ग्रुप में एक कार्यकर्ता को फूल-माला पहनाकर बधाई देने का फोटो वायरल होने हो गया. रेलकर्मियों का कहना था कि इस फोटो में दिखायी पड़ रहा शख्स सरडेगा रनिंग रूम शराबखोरी कांड का आरोपी है जिसके खिलाफ प्रशासनिक जांच चल रही है.

झारसुगुड़ा ब्रांच काउंसिल मीटिंग के बाद वायरल पोस्ट
रेलवे मेंस यूनियन के बैनर के सामने फोटो के साथ न्यूज वायरल होने के बाद रेलकर्मियों में इस बात की चर्चा शुरू हो गयी कि क्या सरडेगा रनिंग रूम शराबखोरी कांड के आरोपी को झारसुगुड़ा में SERMU रनिंग ब्रांच की कमान सौंप दी गयी है ! यह मामला रेलवे मेंस यूनियन के नेताओं के बीच विवाद का विषय बन गया है. रेलवे मेंस यूनियन से जुड़े कुछ लोगों ने यह माना कि जाेनल नेतृत्व ने भी इस कृत्य पर नाराजगी जतायी है. यूनियन नेताओं का कहना है कि आने वाले समय में चक्रधरपुर में यूनियन को लेकर कोई बड़ा निर्णय नेतृत्व कर सकता है.
मुझे इसकी जानकारी नहीं, अगर ऐसा हुआ तो यह गलत है : शिवजी शर्मा
वायरल फोटो और नयी कमेटी पर रेलवे मेंस यूनियन के केंद्रीय पदाधकारी शिवजी शर्मा से रेलहंट ने बात की. उन्होंने बताया कि डिवीजन को-ऑर्डिनेटर कोरम के अनुसार बैठक कर संभावित बदलाव का निर्णय ले सकते है. लेकिन इस निर्णय को केंद्रीय कमेटी से पारित कराना आवश्यक होगा. आम तौर पर ऐसे निर्णय बीजेएम में होते हैं.

शिवजी शर्मा, केंद्रीय पदाधिकारी, SERMU
उन्होंने यह भी कहा कि किसी के खिलाफ अगर एडमिनिस्ट्रेटिव कार्रवाई चल रही हो तो ऐसे व्यक्ति को किसी तरह की जिम्मेदारी सौंपा जाना गलत है और यह यूनियन की साख को गहरे तक प्रभावित करने वाला कदम है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बैठक की कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए इस मामले अधिक जानकारी यूनियन के जोनल पदाधिकारी ही दे सकते हैं.
झारसुगुड़ा में कोई बदलाव नहीं, मीटिंग के बाद फोटोग्राफी की गयी : एमके सिंह
उधर, रेलवे मेंस यूनियन के चक्रधरपुर डिवीजनल को-ऑर्डिनेटर एमके सिंह ने झारसुगुड़ा की कमेटी में किसी तरह के बदलाव की सूचना को सीरे से खारिज किया है. उन्होंने रेलहंट से बातचीत में कहा कि वह ब्रांच काउंसिल मीटिंग के लिए झारसुगुड़ा गये थे. मीटिंग में संगठन में किसी बदलाव अथवा नये पदाधिकारी के चयन का कोई प्रस्ताव नहीं आया है. जीएस की अनुमति और बीजेएम के बिना यह संभव नहीं है.

एमके सिंह, डिवीजनल को-ऑर्डिनेटर, SERMU
उन्होंने बताया कि उनके बैठक से निकलने के बाद अति उत्साह में कुछ कार्यकर्ताओं ने एक कार्यकर्ता को फोटो-माला पहनाकर बधाई दी और यह फोटो वायरल हो गया. इस कृत्य पर उन्होंने नाराजगी भी जतायी है. उनकी प्राथमिकता संगठन की एकता ओर रेलकर्मियों का हित है. वह सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं. इस दिशा में उनका प्रयास जारी है.
अनुशासन भंग करने वाले कार्यकर्ताओं पर कड़ी कारवाई की उठने लगी
झारसुगुड़ा में रेलवे मेंस यूनियन के ब्रांच काउंसिल मीटिंग के बाद यूनियन में इस बात की चर्चा तेज हो गयी कि संगठन कुछ लोगों की मुठ्ठी में चला गया है और ऐसे लोग नेतृत्व को भ्रमित कर रहे हैं. झारसुगुड़ा में डिवीजनल को-ऑर्डिनेटर के करीब ऐसे लोग रहे जो किसी ने किसी मामले में अनुशासन हीनता को लेकर प्रशासन के निशाने पर हैं. इसमें एक सरडेगा शराब कांड के वायरल वीडियो को लेकर जांच के दायरे में है तो एक वायरल वीडियो में डीआरएम और जीएम को ही चेतावनी देता नजर आ रहा है.
यूनियन के लोगों का कहना है कि झारसुगुड़ा में ब्रांच कमेटी को लेकर जो गलत सूचनाएं वायरल की गयी वह संगठन के नियम, प्रारंभिक सदस्यता की शर्तो का उल्लंघन के अलावा अनुशासन हीनता का बड़ा उदाहरण है. इस कृत्य के लिए मंडल संयोजक को जिम्मेवार लोगों पर कड़ी कार्रवाई कर यह संदेश देना चाहिए कि संगठन और अनुशासन के आगे कोई नहीं है, चाहे वह उनका कितना भी करीबी क्यों न हो ?
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उसे पूरा स्थान दिया जायेगा.
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