- 15.75 करोड़ के टेंडर EL-50-DNR-OPEN-01-2026-27 को लेकर Sr.DEE/G आये निशाने पर
- टेंडर कमेटी में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच HQ स्तर के अधिकारी से कराने की मांग
- प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता के निर्णय पर टिकी नजरें, दबाव काम आता है या कानून !
PATNA. चहेते संवेदक को काम नहीं मिला तो पूरा टेंडर ही रद्द करने की तैयारी चल रही है. मामला है पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर डिवीजन का, जहां एक अवार्ड हो चुके टेंडर को रद्द करने के लिए अभियंताओं की टीम डीएसआर (DRS) की आड़ लेकर बड़ा कारनामा करने की तैयारी में है. दिलचस्प है कि इस कृत्य के लिए नियम-कानून की व्याख्या तक बदलने की बेताबी दिख रही है.
कहां तो यहां तक जा रहा है कि टेंडर कमेटी में शामिल कुछ अधिकारियों से उक्त संवेदक के पुराने रिश्ते है जिसके लिए अभियंताओं की टीम इस निविदा को किसी भी तरह निरस्त करना चाहती है. हालांकि इसके पीछे का बड़ा कारण संवेदक की अभियंताओं के बीच गहरी पैठ और पुराने घोटाले के राज है जिनके सहारे असफल संवेदक टेंडर कमेटी में शामिल लोगों को ब्लैकमेल करने की स्थिति में है. इस संवेदक का बिल पहले भी बिना मटेरियल सप्लाई के कई बार पास किया गया है जिससे सरकार को जीएसटी के मद में लाखों का चूना तक लगने का अनुमान है. दानापुर मंडल में उक्त अधिकारी द्वारा बिना सप्लाई के बिल पास करने का एक मामला रेलवे विजिलेंस में भी लंबित चल रहा.
लगभग 15.75 करोड़ का यह टेंडर EL-50-DNR-OPEN-01-2026-27 यात्री सुविधा वाले पटना स्टेशन पर होल्डिंग एरिया के विस्तार और निर्माण से जुड़ा है. यह कार्य सीआरबी के सीधे निर्देश पर कराया जा रहा है लेकिन अब अभियंताओं की टीम इसे लटकाने के कुत्सित प्रयास में जुटी है. कारण एक चहेते संवेदक का टेंडर से बाहर निकल जाना बताया जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि वर्तमान टेंडर को डिस्चार्ज कर सिविल इंजीनियरिंग के एक-दो आइटम्स को इधर-उधर करके फिर से वही टेंडर जारी करने का प्रयास पूर्व मध्य रेलवे में अभियंताओं की चौकड़ी कर रही है ताकि पुराने संवेदन को उपकृत किया जा सके. इस संवेदक से टेंडर कमिटी में शामिल अमित कुमार का गहरा नाता रहा है जो कभी ECR में गोलमाल के मामलों की जाँच को लेकर चर्चा में रह चुके हैँ.
यहां यह बताना जरूरी है कि पूर्व मध्य रेल के निर्माण संगठन महेंद्रू हमेशा से ही भ्रष्टाचार के लिए चर्चा में रहा है. हालांकि यहां हर विभाग में भ्रष्टाचार घोषित है लेकिन इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट की कहानी निराली है. यहां अभियंता और संवेदकों का गठजोड़ ऐसा है कि बिना काम के भी बिल का भुगतान कर दिया जाता रहा है. हाल में सीबीआई रेड के बाद कई अधिकारियों को यहां से हटाया गया था. इसमें एक थे अमित कुमार जो Dy CEE/कंस्ट्रक्शन/नार्थ ईस्ट सेंट्रल रेलवे में रह चुके है. उनके कार्यकाल में वर्ष 2022 से 2024 सारे टेंडर/कांट्रैक्ट्स का पहला बिल बिना मैटेरियल सप्लाई किए पास होने का आरोप है.
पूर्व मध्य रेल में टेंडर का गोलमाल नयी बात नहीं है. यहाँ झूठ को सच और सच को झूठ का पायजामा पहनाने का क्रम जारी है. कारण संवेदक की सेवा लेते-लेते अधिकारी और अभियंता उनकी जेब में पहुंच चुके है और गलत को गलत कहने तक का नैतिक साहब इन अभियंताओं में नहीं रह गया है. यही हाल अब EL-50-DNR-OPEN-01-2026-27 टेंडर के निष्पादन को लेकर दिखायी पड़ रहा है. पूरी प्रक्रिया के बाद DRS की आड़ में इसे रद्द करने की तैयारी अभियंताओं ने कर ली है ताकि कुछ बदलावों के साथ चहेती एजेंसी को टेंडर दिलाया जा सके.
हालांकि कहा तो यहां तक जा रहा है कि टेंडर के कुछ बिंदुओं को लेकर विद्युत के अभियंताओं ने ही विभिन्न माध्यमों से शिकायत दर्ज करवायी है ताकि जांच के नाम पर इसे रद्द करने का एक ऑपशन बनाया जा सके. उधर दूसरी ओर टेंडर में शामिल एजेंसी भी इस बात को लेकर तैयार है कि अगर रेल प्रशासन टेंडर को निविदा से पूर्व किसी शर्त का हवाला देकर रद्द करता है उसे कानूनी रूप से चुनौती दी जायेगी.
वहीं दूसरी ओर रेलवे बोर्ड से टेंडर में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच HQ स्तर के अधिकारी से कराने की मांग भी उठने लगी है. ऐसे में सीआरबी से भी अनुरोध किया गया है कि टेंडर को तुरंत दूसरी टेंडर कमेटी को भेजा जाए और इस मामले में अब फैसला SAG कमेटी करे. ताकि कम्पोजिट टेंडर में सिविल इंजीनियरिंग का सदस्य भी रहे. हालांकि अनुरोध भी किया जा रहा है कि इस कमेटी में कोई सदस्य दानापुर डिवीजन से नहीं रखा जाना चहािए. अब देखने वाली बात है कि प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता टेंडर को लेकर क्या निर्णय लेते है?




















































































