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RPF DG भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर, इंस्पेक्टर अरुण कुमार टोकस सस्पेंड, निशाने पर कमांडेंट, तय होगी ASC की जिम्मेदारी !

  • चक्रधरपुर डिवीजन में सिक्यूरिटी सर्कुलर का अनुपालन सुनिश्चित कराने में लग गये दो माह  
  • RPF डीजी सोनाली मिश्रा की फटकार के बाद जागे कमांडेंट पी शंकर कुट्टी ने लिया एक्शन  
  • SER आईजी के मौन ने सिस्टम को बद से बदतर बनाया, सफेद हाथ बने CIB-SIB-IVG
  • राउरकेला में आरपीएफ का एक बड़ा अधिकारी CBI की गिरफ्त में आते-आते रह गया

KOLKATA. दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेलमंडल में आरपीएफ इंस्पेक्टर अरुण कुमार टोकस को अंतत: सस्पेंड कर दिया गया है. सीबीआई की छापेमारी में बंडामुंडा पोस्ट के एक जवान मोहम्मद असरार की गिरफ्तारी के 45 दिन बाद IPF अरुण कुमार टोकस को लाइन क्लोज किया गया था. तब सीनियर कमांडेंट पी शंकर कुट्टी की दोहरी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाये गये थे. तब सिक्यूरिटी सर्कुलर का हवाला देकर यह बात भी उठायी गयी कि चक्रधरपुर डिवीजन में सीनियर कमांडेंट दो तरह का कानून चला रहे है.

बिमलगढ़ में एक जवान के सीबीआई गिरफ्त में आने के बाद तत्काल प्रभाव से वहां के प्रभारी इंस्पेक्टर को हटा दिया गया था जबकि बंडामुंडा के मामले में IPF पर कार्रवाई डेढ़ माह से अधिक समय तक टाल कर रखी गयी? मामला मीडिया की सुर्खियां बना तब 45 दिन बाद IPF अरुण कुमार टोकस को लाइन सिर्फ क्लोज किया गया. यह मामला आईजी से लेकर RPF डीजी कार्यालय तक भी पहुंचा. देर से ही सही जांच की औपचारिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार 17 दिसंबर 2025 को  IPF अरुण कुमार टोकस के निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया है.

यह भी पढ़ें : SER/RPF : बंडामुंडा आरपीएफ प्रभारी टोकस और सीआईबी सब इंस्पेक्टर शांडिल्या CKP मुख्यालय से अटैच

चर्चा तो यहां तक है कि डीजी सोनाली मिश्रा ने समीक्षा बैठक में कमांडेंट पी शंकर कुट्टी की जांच प्रक्रिया को सवालों के घेरे में लाया तब जाकर टोकस के निलंबन का आदेश जारी किया गया. इस दौरान कमांडेंट मामले में जांच कराने की बात कहते रहे. तब सवाल यह उठा कि एक ही मामले में क्या दो-दो एजेंसियां जांच करेंगी? जब सीबीआई भ्रष्टाचार के मामले में जांच कर रही है तो सीनियर कमांडेंट सीकेपी इस मामले में कौन सी जांच करा रहे थे? बड़ा सवाल यह है कि अगर डिवीजन में कुछ गलत हो रहा था तो आईजी आरपीएफ क्यों मौन रहे ?

गौरतलब है कि 10 अक्टूबर 2025 को सीबीआई ने बंडामुंडा आरपीएफ पोस्ट के जवान मोहम्मद असरार को राउरकेला में एक कूड़ा उठाने वाली महिला से 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. इस मामले में घटना के 45 दिन बाद बंडामुंडा IPF अरुण कुमार टोकस को लाइन क्लोज किया गया जबकि दो माह 07 दिन बाद उनके निलंबित का आदेश जारी किया गया है.

भ्रष्टाचार पर CBI ने लिया एक्शन, सिक्यूरिटी सर्कुलर का नहीं हुआ पालन ! 

आरपीएफ डीजी सोनाली मिश्रा ने भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रूख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अगर केंद्रीय एजेंसी किसी को ट्रैप करती है तो उससे जड़े हर विभागीय अधिकारी को तत्काल जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई सुनिश्चित की जाये. लेकिन चक्रधरपुर डिवीजन के बंडामुंडा में सीबीआई की कार्रवाई के बाद सिक्यूरिटी सर्कुलर का पालन नहीं किया गया. इस मामले में अन्य लोगों की जिम्मेदारी तय नहीं की? तक सवाल यह उठाया गया कि इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं? कार्रवाई को रोककर अथवा विलंबित कर भ्रष्टाचार को फलने-फूलने का मौका किसने दिया? महकमे में यह चर्चा है कि अगर CKP कमांडेंट ने मामले में एक्शन नहीं लिया तो IG कार्यालय इस पर मौन क्यों रहा? सिक्यूरिटी सर्कुलर के उल्लंघन के लिए कौन जिम्मेदार है?

यह भी पढ़ें : ROURKELA में CBI ने बंडामुंडा RPF पोस्ट के कांस्टेबल को 15 हजार रुपये घूस लेते पकड़ा, सस्पेंड

महकमे में इस बात की चर्चा तेज है कि बंडामुंडा प्रकरण और चक्रधरपुर डिवीजन में तथाकथित भ्रष्टाचार के मामलों और कुप्रबंधन को लेकर डीजी RPF सोनाली मिश्रा काफी गंभीर हैं और उनके निशाने पर कमांडेंट भी हैं! इसका असर भी जल्द ही देखने को मिलेगा. इस पूरे प्रकरण में सिक्यूरिटी सकुर्लर 2022 की अवहेलना की गयी. इसमें यह स्पष्ट किया गया कि भ्रष्टाचार के किसी मामले में आरपीएफ पर्सनल के पकड़े जाने पर सीधे तौर पर सुपरवाइजर अधिकारी समेत CIB/SIB/IVG की जिम्मेदारी तय की जानी है. लेकिन चक्रधरपुर रेलमंडल में दो-दो सीबीआई गिरफ्तारी के बाद भी न तो एएससी अग्निदेव प्रसाद और न ही सीआइबी प्रभारी सुरेद्र कुमार की जिम्मेदारी तय की गयी? यह महकमे में संचालित कुप्रबंधन को ही परिभाषित करता है.

चक्रधरपुर : कंट्रोल में तीन-तीन इंस्पेक्टर, SIB इंस्पेक्टर का पद खाली 

दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर डिवीजन में SIB इंस्पेक्टर का पद कई माह से रिक्त है. सीनियर इंस्पेक्टर ही इस पर सवाल उठाते हैं. उनका कहना है कि सालों में यह व्यवस्था पहली बार देखी जा रहा है कि कंट्रोल में तीन-तीन इंस्पेक्टरों को बैठाकर रखा गया है जब सबसे संवेदनशील माने जाने वाला SIB इंस्पेक्टर का पद खाली है. CIB इंस्पेक्टर स्थानीय पोस्ट प्रभारी से तालमाल बनाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे. आईजी मुख्यालय तक संवेदनशील सूचना पहुंचाने वाला पूरा तंत्र ही सफेद हाथी बनकर रह गया है. इसमें IVG की भूमिका भी संदेह के दायरे में हैं. राउरकेला स्टेशन पर 200 से अधिक अवैध वेंडर हॉकरी कर रहे. झारसुगुड़ा समेत दूसरे स्टेशनों और ट्रेनों में अवैध वेंडिंग बेलगाम स्थिति तक पहुंच गयी है लेकिन CIB-SIB-IVG की रिपोर्ट में इसका कहीं जिक्र तक नहीं. चर्चा तो यहां तक है कि बीते एक माह पूर्व ही राउरकेला में आरपीएफ का एक बड़ा अधिकारी CBI की गिरफ्त में आते-आते रह गया, जब वह दलाल से तीन माह की एकमुश्त वसूली की तैयारी में था. जारी …

रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा. 

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