- 07 अप्रैल को टाटानगर रेलवे स्टेशन पर सरयू समर्थकों का धरना है प्रस्तावित, तैयारियां तेज
- सरयू ने रेलवे से स्वेत पत्र जारी कर ट्रेनों के विलंब से चलाने की मजबूरी बताने की रखी मांग
- CKP/DRM का कहना है – नई लाइन बिछाने के बाद ही दूर होगी ट्रेनों की लेतलतीफी
TATANAGAR. चक्रधरपुर डिवीजन में ट्रेनों की लेटलतीफी को लेकर अब तक ढुलमूल रवैया अपना रहे जनप्रतिनिधि अचानक से मुखर होते नजर आ रहे हैं. इसे लेकर टाटानगर रेलवे स्टेशन पर सियासी जोर आजमाइश की जमीन भी तैयार है. विधायक सरयू राय ने रेलवे के रूख पर नाराजगी जताते हुए कड़े तेवर के साथ 07 अप्रैल 2026 को टाटानगर रेलवे स्टेशन पर महाधरना देने का अल्टीमेटम दिया है. जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के कार्यकर्ताओं ने इसके इसके लिए पूरी ताकत झोंक दी है. शुक्रवार से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क और छोटी-छोटी बैठकों का दौर शुरू है. समर्थक जमीनी तैयारी में जुटे है. विधायक सरयू राय ने बीते दिनों आवास पर बैठक कर महाधरना को लेकर कार्यकर्ताओं को आवश्यक निर्देश भी दिया.
विधायक सरयू राय की धरना की घोषणा और तैयारियों के बीच सांसद विद्युत वरण महतो दिल्ली पहुंच गये. रेलमंत्री से मिले और रेलमंत्री का पत्र लेकर जमशेदपुर लौट आये हैं. सांसद विद्युत वरण महतो ने अपनी पहल को X पर साझा किया और बताया है कि रेलमंत्री से उन्हें ट्रेनों के विलंब होने के कारणों की जांच कराने का आश्वासन मिला है. यही नहीं रेलमंत्री ने चक्रधरपुर डिवीजन के अधिकारियों को इसे लेकर जरूरी निर्देश भी दिया है. सांसद ने रेलमंत्री का पत्र भी X पर साझा किया है.

सांसद विद्युत वरण महतो ने लोकसभा क्षेत्र की रेल समस्याओं और यात्रियों की सुविधा को लेकर भी रेल मंत्री को पत्र लिखा है. इसमें जमशेदपुर को दिल्ली, जयपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने के लिए नई ट्रेनों के संचालन, टाटानगर–चक्रधरपुर रेलखंड में यात्री ट्रेनों की लगातार देरी, टाटा–बादामपहाड़ रेल मार्ग पर मकुदामपुर लेवल क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण आदि मुद्दे शामिल है.
मालगाड़ी के आगे बढ़ाने से रेलवे को फायदा मिलता है, उसकी तुलना में जो यात्रियों की परेशानी होती है उसकी कीमत जोड़ा जाये तो यह कई गुणा अधिक होगी. रेलमंत्रालय इस पर स्वेत पत्र जारी कर बताये कि ट्रेनों को लेट चलाने में उसकी क्या मजबूरी है ? रेलमंत्री को कारण बताना चाहिए. रेलवे की समितियां क्यों मौन हैं?
सरयू राय, विधायक
सांसद विद्युत वरण महतो की पहल और विधायक सरयू राय की चेतावनी के बीच चक्रधरपुर से टाटा, चांडिल से टाटा, घाटशिला से टाटा के बीच ट्रेनों के विलंब का क्रम जारी है. विधायक सरयू राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ट्रेनें चांडिल-चक्रधरपुर-घाटशिला तक तो समय पर आ जाती है. वहां उन्हें रोककर मालगाड़ियों को पास कराया जाता है. सवाल यह है कि इतनी कम दूरी से टाटानगर तक आने में मात्र 30 मिनट का समय लगता है तब ट्रेनों को 03 से 05 घंटे क्यूं लग जा रहा ? दो साल से यह क्रम जारी है.
उन्होंने कहा कि अगर मालगाड़ी के आगे बढ़ाने से रेलवे को जो फायदा मिलता है, उसकी तुलना में जो यात्रियों की परेशानी होती है उसकी कीमत जोड़ा जाये तो यह कई गुणा अधिक होगी. रेलमंत्रालय इस पर स्वेत पत्र जारी कर दे ताकि टाटानगर में देश भर के लोग रहते है सभी अपने मूल स्थान पर आते-जाते है वहां ट्रेनों को लेट चलाने की क्या मजबूरी है? इस पर रेलवे अधिकारी मौन है तो क्या रास्ता बचता है ? सरयू ने रेलमंत्री से कारण बताते की मांग की है. उन्होंने रेलवे की समितियों पर भी सवाल उठाये ?
हालांकि टाटानगर स्टेशन पर आयोजित धरना कार्यक्रम में विधायक सरयू राय ने घटक दल भाजपा को भी आमंत्रित करने और साथ लेने की बात कही है. लेकिन दूसरी ओर सांसद विद्युत वरण महतो रेलमंत्री का पत्र लेकर ही आ गये. इसमें रेलमंत्री ने ट्रेनों के विलंब के कारणों की जांच कराने और इसके लिए अधिकारियों को निर्देश देने की बात कही है. सांसद की अचानक की गयी इस पहल पर राजनीतिक गलियारे में रेलवे की जमीन पर सरयू की सियासी जोर आजमाइश को मात देने के रूप में देखा जा रहा है. अब देखना है सात अप्रैल को सरयू का धरना किस करवट बैठता है !
उठ रहे कई सवाल
- रेलमंत्री की ओर से सांसद को जारी पत्र के बाद क्या भाजपा नेता सरयू के धरना में शामिल होंगे ?
- सोशल मीडिया में #LATE_DIV_CKP महीनों से ट्रोल हो रहा, अधिकारी अब तक क्यों मौन रहे ?
- रेलवे के इतने बड़े तकनीकी तंत्र में रेलमंत्री को चक्रधरपुर में ट्रेनों के विलंब की जानकारी नहीं ?
- दो साल से यात्री परेशान हैं लेकिन सांसद की ओर से इस तरह की पहल पहले क्यों नहीं की गयी ?
- रेलमंत्री की ओर के सुधार को लेकर कोई टाइम-फ्रेम नहीं, तो यह सिर्फ आश्वासन रह जायेगा ?
















































































मालगाड़ी के आगे बढ़ाने से रेलवे को फायदा मिलता है, उसकी तुलना में जो यात्रियों की परेशानी होती है उसकी कीमत जोड़ा जाये तो यह कई गुणा अधिक होगी. रेलमंत्रालय इस पर स्वेत पत्र जारी कर बताये कि ट्रेनों को लेट चलाने में उसकी क्या मजबूरी है ? रेलमंत्री को कारण बताना चाहिए. रेलवे की समितियां क्यों मौन हैं? 
