Lucknow. रेलवे टिकटों की कालाबाजारी और यात्रियों से मनमानी वसूली करने वाले एक बड़े डिजिटल सिंडिकेट का रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने खुलासा किया है.
आरपीएफ की अपराध शाखा और लखनऊ मंडल की टास्क टीम ने एक संयुक्त कार्रवाई में प्रतिबंधित ‘गदर’ और ‘एलेक्सा’ सॉफ्टवेयर के जरिए तत्काल टिकटों की दलाली करने वाले एक शातिर दलाल को गिरफ्तार किया है.
आरोपी पिछले चार साल से फर्जी आईआरसीटीसी आईडी के दम पर प्रति टिकट 3,200 से 5,000 रुपये तक की अवैध वसूली कर रहा था.
मंडल सुरक्षा आयुक्त अरुण त्रिपाठी के निर्देश पर हुई इस छापेमारी में आरपीएफ ने संतकबीरनगर के चिउटना बाजार (सेमरियावा-टीमा रोड) स्थित एक जनरल स्टोर पर दबिश दी.
वहां से मुख्य आरोपी नसीबुल्ला (41) को रंगे हाथ दबोचा गया. हालांकि, इस अवैध नेटवर्क से जुड़े दो अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी है.
बस्ती के आरपीएफ इंस्पेक्टर राशिद बेग मिर्जा ने बताया कि आरोपी साधारण यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर ‘सुपर सेलर’ और ‘मल्टीस्टेट तत्काल’ जैसे प्रतिबंधित हाईटेक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था.
इन सॉफ्टवेयर की मदद से वह चंद सेकेंडों में तत्काल टिकट बुक कर लेता था, जिससे आम यात्रियों को कंफर्म टिकट नहीं मिल पाता था. आरोपी इन टिकटों के बदले स्लीपर क्लास के लिए 3,200 रुपये और एसी क्लास के लिए 5,000 रुपये तक वसूलता था.
अवैध कमाई का यह पूरा लेन-देन यूपीआई और फोनपे के जरिए डिजिटल माध्यम से किया जा रहा था.
मौके से आरपीएफ ने कई अवैध ई-टिकट, पीआरएस काउंटर टिकट, व्हाट्सएप चैट और डिजिटल लेन-देन के पुख्ता रिकॉर्ड बरामद किए हैं. आरोपी का मोबाइल जब्त कर दुकान को सील कर दिया गया है.
मामले की आगे की जांच उपनिरीक्षक कमलेश कुमार यादव को सौंपी गई है. आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि दलाली के इस नेटवर्क में शामिल अन्य चेहरों को भी जल्द बेनकाब किया जाएगा.
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