- मीडिया के सामने दिया बयान, 24 घंटे के भीतर तबादला, अचानक मोदी-शाह को सैल्यूट करने लगे कमांडेंट
AGRA. आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन मास्टर (Dy SS) के साथ आरपीएफ जवानों द्वारा की गई कथित अभद्रता और मारपीट के मामले ने अब एक बेहद संवेदनशील और राजनीतिक मोड़ ले लिया है.
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला प्रशासनिक फैसला तब सामने आया, जब आरपीएफ की ओर से कमांडेंट ने मीडिया के सामने आकर बयान जारी किया गया. हालांकि इसके महज 24 घंटे के भीतर ही सीनियर कमांडेंट पी राजमोहन का तबादला AGRA/NCR से हटाकर दूसरे ज़ोन NFR में Dy CSC के पद पर कर दिया गया है.
रेलवे बोर्ड द्वारा आनन-फानन में की गई इस बड़ी कार्रवाई को आरपीएफ की मनमानी के खिलाफ रेल कर्मचारियों के भारी जनाक्रोश और ट्रेड यूनियनों के चौतरफा दबाव के रूप में देखा जा रहा है.
क्या था कमांडेंट का बयान जिसने भड़काई आक्रोश की आग?
दरअसल, आगरा कैंट स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन मास्टर के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था. इस गंभीर मुद्दे पर विभागीय गलती स्वीकार करने या सुलह का रास्ता निकालने के बजाय आरपीएफ की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई. आरपीएफ का पक्ष लेते हुए कमांडेंट ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो प्रसारित हो रहा है, वह “अधूरा सच” बयां कर रहा है.
कमांडेंट ने मीडिया के सामने दावा किया था कि घटना वाले दिन प्लेटफॉर्म पर भारी भीड़ थी और आरपीएफ के जवान केवल अपनी ऑन-ड्यूटी जिम्मेदारी निभा रहे थे. उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिना पूरी जांच के जवानों पर एकतरफा कार्रवाई नहीं की जा सकती. लेकिन इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया.
हालांकि इस प्रेस कांफेंस का दिलचस्प पहलू यह रहा कि पत्रकारों को जानकारी देते-देते अचानक कमांडेंट उठाकर पीएम-गृहमंत्री को सैल्यूट करने लगे. इसे घोर लापरवाही के रूप में देखा गया और इस घटना के ठीक बार रेलवे बोर्ड ने सीधी कार्रवाई करते हुए आगरा के आरपीएफ कमांडेंट पी राजमोहन के तबादले का आदेश जारी कर दिया.
रेलवे कर्मचारियों और संगठनों ने आरोप लगाया कि कमांडेंट खुलकर अपने दोषी जवानों का बचाव कर रहे हैं और पीड़ित डिप्टी स्टेशन मास्टर को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं.
आक्रोश की ज्वाला, लाल झंडे और यूनियनों ने खोला मोर्चा
कमांडेंट के इस ‘बचावत्मक’ बयान के आते ही ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (AIRF), नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन (NCRMU), भारतीय रेलवे मजदूर संघ (BRMS) और उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (UMRKS) जैसे बड़े संगठन पूरी तरह गोलबंद हो गए. कर्मचारियों का गुस्सा इस कदर भड़का कि उन्होंने आरपीएफ के इस रवैये को “वर्दी की तानाशाही” करार दिया.
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि आगरा मंडल में आरपीएफ द्वारा लगातार रेलकर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है, जिसमें पहले भी लगभग 40 ट्रैकमैन साथियों पर अनर्गल एफआईआर (FIR) दर्ज कराना और मथुरा व आगरा के लोको पायलटों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं शामिल हैं. यूनियनों ने स्पष्ट चेतावनी दे दी कि यदि तानाशाही रवैया बंद नहीं हुआ और पीड़ित रेलकर्मियों को न्याय नहीं मिला, तो पूरे ज़ोन में चक्का जाम कर दिया जाएगा.
रेलवे बोर्ड का त्वरित हंटर, साख बचाने की कवायद
रेल संचालन ठप होने की आशंका और लाखों रेल कामगारों के उग्र होते आंदोलन को देखते हुए रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा. सहायक कमांडेंट के बयान के 24 घंटे पूरे होने से पहले ही सीनियर डीएससी पी राजमोहन का ट्रांसफर ऑर्डर जारी कर उन्हें आगरा मंडल से हटाकर दूसरे जोन NFR में भेज दिया गया है.
प्रशासनिक गलियारों में इस तबादले को कोई सामान्य फेरबदल नहीं, बल्कि एक सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जा रहा है. बोर्ड ने इस त्वरित फैसले से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि रेल संचालन की रीढ़ माने जाने वाले स्टेशन मास्टर, ट्रैकमेन और लोको पायलटों के मान-सम्मान से समझौता कर किसी भी अधिकारी के अहंकार या बल की मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
“पिक्चर अभी बाकी है…”
कमांडेंट के तबादले की खबर आते ही रेलवे कर्मचारी यूनियनों में जश्न का माहौल है. उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ और मेंस यूनियन के पदाधिकारियों ने रेल मंत्रालय के इस फैसले का स्वागत किया है. हालांकि, यूनियन नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. उन्होंने दो टूक कहा है कि जब तक पीड़ित डिप्टी स्टेशन मास्टर और पूर्व में प्रताड़ित किए गए ट्रैकमैन साथियों पर दर्ज कराई गई झूठी एफआईआर वापस नहीं ली जाती और दोषी जवानों को निलंबित नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा.
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क्या था कमांडेंट का बयान जिसने भड़काई आक्रोश की आग?
