Visakhapatnam. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB), विशाखापट्टनम ने दक्षिण मध्य रेलवे (S.C. Railway) के अधिकारियों और निजी ठेकेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी, हेराफेरी और रिश्वतखोरी के एक गंभीर मामले में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (FIR – RC 14(A)/2026) दर्ज की है.
यह मामला रेलवे की 179.50 करोड़ रुपये की ‘ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग’ परियोजना में 7 करोड़ रुपये के बोनस बिल को पास कराने के एवज में 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने और देने से जुड़ा है.
खबर है कि सीबीआई ने इस मामले में वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (SSE) बापिराजू को हिरासत में ले लिया है. उन्हें 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया है. इस मामले में कंपनी के एमडी का बेटा भी पकड़ा गया है. हालांकि अब तक सीबीआई की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गयी है.
मामले के मुख्य आरोपी
सीबीआई की प्राथमिकी में 5 नामजद व अन्य आरोपी
- श्री बापिराजू, वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (SSE), मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर (CSTE) कार्यालय, दक्षिण मध्य रेलवे, विजयवाड़ा.
- श्री आर. श्रीनिवास राव, प्रबन्ध भागीदार (Managing Partner), मेसर्स गणपति इंजीनियरिंग वर्क्स, सिकंदराबाद.
- श्री रामकृष्ण रेड्डी, प्रबन्ध भागीदार, मेसर्स गणपति इंजीनियरिंग वर्क्स, सिकंदराबाद.
- श्री राघवैया येल्ला, प्रबन्ध निदेशक (MD), मेसर्स येल्ला कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, विशाखापट्टनम.
- श्री श्रीचंद, पुत्र श्री राघवैया येल्ला.
179.50 करोड़ रुपये का ठेका और बोनस बिल का विवाद
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा 25 सितंबर 2023 को ‘मेसर्स गणपति येल्ला जेवी’ (M/s. Ganapathi Yella JV) को 179.50 करोड़ रुपये की लागत वाला ‘ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग’ का काम सौंपा गया था. इस संयुक्त उद्यम (JV) ने निर्धारित समय से पहले काम पूरा कर लिया और लगभग 7 करोड़ रुपये के बोनस का दावा पेश किया, जो CSTE कार्यालय विजयवाड़ा में लंबित था.
छुट्टी के दिन दफ्तर खोलकर फाइलों में हेरफेर
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 13 और 14 जून 2026 (शनिवार और रविवार) को सरकारी छुट्टी के बावजूद, श्री पी.आर. विट्टल (CSTE), श्री आर. विश्वनाथ रेड्डी (उप CSTE), श्री बापिराजू (SSE), श्री गोविंद राजुलु (SSE), और श्री हरिकृष्णा (OS) सहित अन्य अधिकारियों ने विजयवाड़ा स्थित कार्यालय में आकर बोनस फाइल की तारीखों में हेरफेर की. ठेकेदार फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए बोनस के प्रभावी दिनों की संख्या 140 दिन तय की गई.
1 करोड़ रुपये की रिश्वत का सौदा
14 जून 2026 को उप CSTE आर. विश्वनाथ रेड्डी ने बापिराजू को सूचित किया कि CSTE पी.आर. विट्टल ने 7 करोड़ रुपये का बोनस बिल मंजूर कर दिया है. इसके बाद बापिराजू ने बताया कि ठेकेदार फर्म को करीब 6 करोड़ रुपये का शुद्ध बोनस मिलेगा, जबकि अधिकारियों के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये का “कमीशन/रिश्वत” तय हुआ है.
15 अगस्त 2026 को आरोपी राघवैया येल्ला ने बापिराजू को सूचना दी कि 16 अगस्त को उनका बेटा श्रीचंद विशाखापट्टनम से विजयवाड़ा की यात्रा के दौरान रिश्वत की रकम पहुंचाने आएगा. बापिराजू ने यह रकम कट्टीपुडी (Kathipudi) में लेने की सहमति जताई. इसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाकर 15 लाख की अग्रिम राशि लेते वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (SSE) बापिराजू व अन्य को रंगे हाथ धर दबोचा.
सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 एवं 8 के तहत मामला दर्ज कर लिया है. सीबीआई के उप पुलिस अधीक्षक एन. राघवेंद्र कुमार को ‘ट्रैप लेयिंग ऑफिसर’ (TLO) जबकि निरीक्षक ए. नरेश कुमार को जांच सौंपी गयी है.
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