Danguwaposi (Chakradharpur Railway Division). दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल अंतर्गत डांगुवापोसी रेलवे यार्ड इन दिनों रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संदिग्ध कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता दिख रहा है. जिस यार्ड की सुरक्षा का जिम्मा RPF के कंधों पर है, वहीं दिन के उजाले में खुलेआम मालगाड़ियों से भारी मात्रा में आयरन ओर (लोह अयस्क) पटरी पर गिराया जाता देखा जा सकता है.
दर्जनों मजदूरों की फौज, ट्रकों और ट्रैक्टरों का काफिला बेखौफ होकर इस कीमती संपत्ति की ढुलाई में जुटा हुआ है. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाली बात रेलवे सुरक्षा बल का मौन धारण कर लेना है, जिससे रेलवे और निजी कंपनियों को हर महीने करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है. रेलहंट को मिले वीडियो से जमीनी हकीकत का पता चल जाता है.
दुर्गम स्टेशन पर ‘खास मेहरबानी’, TMM को ताक पर रख मिला एक्सटेंशन
विभागीय सूत्रों के अनुसार, डांगुवापोसी जैसे दुर्गम और सुदूर स्थान पर तैनात RPF इंस्पेक्टर विजेंद्र कुमार ने कार्यकाल बढ़ाने के लिए सेवा विस्तार (Extension) का आवेदन दिया था. आमतौर पर कोई भी अधिकारी अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और परिवार की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सुगम स्थानों पर तबादला या एक्सटेंशन मांगता है. लेकिन डांगुवापोसी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित जगह पर टिके रहने की यह ललक कई सवाल खड़े करती है.
आरोप हैं कि ट्रांसफर मैनेजमेंट मॉड्यूल (TMM) के तय नियमों को दरकिनार करते हुए, तत्कालीन आरपीएफ आईजी ने विशेष व्यवस्था कर इंस्पेक्टर के एक साल के सेवा विस्तार को हरी झंडी दे दी. इस प्रशासनिक मेहरबानी के पीछे की असली वजह अब धीरे-धीरे यार्ड की पटरियों पर दिखाई देने लगी है.
‘स्वीपिंग’ के नाम पर डंपर-ट्रैक्टर का खेल, आरपीएफ का पहरा फिर भी कोई रोक नहीं
सूत्रों का दावा है कि यार्ड के उन हिस्सों में मालगाड़ियों से आयरन ओर गिराया जा रहा है, जहां वे-मशीन (वजन मापने की व्यवस्था) नहीं है. वैगन से अनधिकृत रूप से उतारे या गिराए गए इस माल को ‘स्वीपिंग’ की आड़ में बड़े-बड़े ट्रकों और ट्रैक्टरों में लादकर आदित्यपुर, जमशेदपुर और चांडिल जैसे आसपास के औद्योगिक इलाकों में पहुंचा दिया जाता है.
पटरी पर दिन-रात चलने वाले इस अवैध काम के दौरान बाकायदा RPF जवानों की तैनाती रहती है, लेकिन किसी अधिकारी या जवान को इसे रोकने की जरूरत महसूस नहीं होती. दिलचस्प है कि यहां आयरन ओर के साथ ही कोयला की अनलाेडिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है.
“हिस्सा लो और चुप रहो”, जवानों को दी जाती है सख्त हिदायत!
आरपीएफ की कार्यशैली पर सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि यहां आने वाले नए जवानों को ड्यूटी जॉइन करते ही एक खास ‘पाठ’ पढ़ाया जाता है. सूत्रों की मानें तो जवानों को सख्त हिदायत दी जाती है,”अपना तय हिस्सा लो और चुपचाप पड़े रहो.”
इतना ही नहीं, जवानों को यह चेतावनी भी दी जाती है कि अगर अंदर चल रही इस अवैध गतिविधि या ‘कमाई के खेल’ की जानकारी बाहर की अथवा फोटो-वीडिया किसी से शेयर की गई, तो सीनियर कमांडेंट को ‘कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट’ (गोपनीय रिपोर्ट) भेजकर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करवा दी जाएगी या उनका तुरंत ट्रांसफर करवा दिया जाएगा. इस डर और ‘हिस्सेदारी’ के चलते यहां तैनात हर अधिकारी से लेकर जवान तक ने साध ली है पूर्ण चुप्पी.
क्या रेलवे अफसर भी हैं साझेदार? उठ रहे तीखे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने पूरे रेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
- पहला बड़ा सवाल : जब डांगुवापोसी स्टेशन से आधिकारिक रूप से कोई कमर्शियल लोडिंग (Commercial Loading) होती ही नहीं, तो फिर रेलवे यार्ड और पटरियों के बीच रोज सैकड़ों टन आयरन ओर कहां से आ रहा है?
- दूसरा सवाल : क्या यार्ड में दिन के उजाले में ट्रकों और डंपरों की आवाजाही की जानकारी क्षेत्रीय रेलवे प्रबंधक (ARM), वाणिज्य निरीक्षक (CCI) और स्टेशन अधीक्षक (SS) को नहीं है?
- तीसरा सवाल : क्या यह संभव है कि RPF, वाणिज्य विभाग और स्थानीय रेल प्रशासन की नाक के नीचे करोड़ों का खेल बिना किसी ऊपरी शह के चल रहा हो? या फिर हर विभाग अपना-अपना हिस्सा लेकर मूकदर्शक बना हुआ है?
दक्षिण पूर्व रेलवे में भ्रष्टाचार और सीबीआई (CBI) की लगातार हो रही कार्यवाहियों के बावजूद डांगुवापोसी में जिस निडरता से रेलवे की संपत्ति की लूट हो रही है, वह सुरक्षा तंत्र की साख पर गहरा धब्बा है.
(इस मामले की अंदरूनी परतों और विभागीय साठगांठ की पूरी कहानी जारी रहेगी…)
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उसे पूरा स्थान दिया जायेगा.




