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Home » अब रेलकर्मियों के क्वार्टरों में भी लगेगा ‘स्मार्ट प्रीपेड मीटर’, रेलवे बोर्ड ने बदला पुराना आदेश
जोन/बोर्ड/डिवीजन

अब रेलकर्मियों के क्वार्टरों में भी लगेगा ‘स्मार्ट प्रीपेड मीटर’, रेलवे बोर्ड ने बदला पुराना आदेश

News DeskBy News DeskJuly 3, 2026
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  • रेलवे स्टाफ क्वार्टरों से हटेंगे पुराने मीटर, प्रीपेड व्यवस्था से रुकेगा करोड़ों का राजस्व नुकसान

  • मोबाइल की तरह रिचार्ज करना होगा रेलवे क्वार्टर का बिजली मीटर, बोर्ड ने बदला अपना ही पुराना फैसला

NDLS. भारतीय रेलवे ने अपने बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और राजस्व नुकसान को रोकने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. रेलवे बोर्ड के नए निर्देश के अनुसार, अब रेलवे परिसर में मौजूद सभी स्टाफ क्वार्टरों, रेलवे की दुकानों (कमर्शियल आउटलेट्स), वेंडिंग स्टॉल और दफ्तरों में पारंपरिक बिजली मीटरों को हटाकर अत्याधुनिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का  निर्णय लिया है.

इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य बिजली की बर्बादी को रोकना, रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करना और मैनपावर (मानव श्रम) की निर्भरता को कम करना है. हालांकि इसके लिए समय सीमा का अब तक खुलासा नहीं किया गया है. बीते माह जारी अपने आदेश मेंरेलवे बोर्ड ने सभी महाप्रबंधकों को इस दिशा में काम करने का निर्देश दिया है.

योजना के मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य

रेलवे बोर्ड ने इस डिजिटल बदलाव के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए हैं:

बिजली चोरी पर पूर्ण विराम: कई रेल मंडलों से रेलवे की बिजली के अनधिकृत इस्तेमाल और सीधे तार डालकर चोरी करने की शिकायतें आती रही हैं. स्मार्ट मीटर लगने से किसी भी तरह की छेड़छाड़ (Tampering) होने पर तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट मिल जाएगा.

पारदर्शी और सटीक बिलिंग: अक्सर मैन्युअल मीटर रीडिंग में देरी या गलतियों के कारण कर्मचारियों और दुकानदारों को गलत बिल मिलने की शिकायतें होती थीं. अब जितनी बिजली इस्तेमाल होगी, उतना ही डिजिटल बिल बनेगा.

मैनुअल रीडिंग से मुक्ति: इस तकनीक के बाद रेलवे को हर महीने मीटर रीडिंग लेने के लिए कर्मचारियों को घर-घर या दुकान-दफ्तर नहीं भेजना पड़ेगा, जिससे रेलवे के मैनपावर की बड़ी बचत होगी.

‘प्रीपेड’ व्यवस्था से कैसे बदलेगा सिस्टम?

जैसे हम अपने मोबाइल फोन को इस्तेमाल करने से पहले रिचार्ज करते हैं, ठीक उसी तरह अब रेलवे क्वार्टर में रहने वाले रेलकर्मियों और रेलवे स्टेशनों पर दुकान चलाने वाले वेंडर्स को अपने बिजली मीटर को पहले रिचार्ज करना होगा.

‘जितना खर्च, उतना भुगतान’: उपभोक्ता अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से मीटर को ऑनलाइन ऐप या पोर्टल के जरिए रिचार्ज कर सकेंगे.

अलर्ट सिस्टम: रिचार्ज खत्म होने से पहले उपभोक्ताओं के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर कम बैलेंस का मैसेज (Alert) आएगा, ताकि वे समय पर रीचार्ज कर सकें.

रियल-टाइम ट्रैकिंग: उपभोक्ता खुद भी एक मोबाइल ऐप के जरिए यह देख सकेंगे कि उनके घर या दुकान में रोजाना कितनी बिजली खर्च हो रही है, जिससे वे बिजली की बचत के प्रति जागरूक होंगे.

रेलवे दफ्तरों को कैसे होगा फायदा?

स्टाफ क्वार्टर और दुकानों के अलावा रेलवे के प्रशासनिक कार्यालयों (डीआरएम ऑफिस, स्टेशन मास्टर रूम, पार्सल ऑफिस आदि) में भी स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं. इससे रेलवे प्रशासन को यह सटीक डेटा मिल सकेगा कि किस विभाग या सेक्शन में कितनी बिजली की खपत हो रही है. इसके आधार पर रेलवे अपने ऊर्जा संरक्षण (Energy Conservation) के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से हासिल कर सकेगा.

क्रियान्वयन की समय-सीमा

रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों (GMs) को इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्देश दिया है. पहले चरण में प्रमुख ए-1 और ए श्रेणी के रेलवे स्टेशनों की दुकानों और बड़े रेल मंडलों के स्टाफ क्वार्टरों को कवर किया जा रहा है.

इसके बाद इसे छोटे स्टेशनों और कॉलोनियों में भी पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा. दावा है कि इस तकनीकी सुधार से रेलवे का करोड़ों का राजस्व बचेगा.

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