TATANAGAR/CKP. दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर (CKP) रेल मंडल का वाणिज्य (Commercial) विभाग एक बार फिर भेदभावपूर्ण तबादलों और प्रशासनिक विसंगतियों को लेकर सुर्खियों में है. मंडल के सीनियर डीसीएम (Sr. DCM) आदित्य चौधरी की कार्यशैली और हालिया फैसलों ने रेलवे के भ्रष्टाचार विरोधी दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.
विभाग में शुचिता और रोटेशन पॉलिसी को ताक पर रखकर चहेते रेलकर्मियों को लगातार कमाऊ सीटों पर बनाए रखने का खेल प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है.

दो कमर्शियल सुपरिंटेंडेंट के कार्यक्षेत्र में फेरबदल
रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक कार्यालय आदेश (Office Order) के अनुसार, टाटानगर के दो वरिष्ठ कमर्शियल सुपरिंटेंडेंट के प्रभार में आपसी बदलाव किया गया है:
एके चौधरी (अमित कुमार चौधरी): कमर्शियल सुपरिंटेंडेंट (लेवल-8) को मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक (CS/TATA PARCEL) के पद से हटाकर टाटानगर के गुड्स शेड (CS/PSTA/TATA) का नया प्रभारी (In-charge) नियुक्त किया गया है.
बिस्वजीत मुखर्जी: कमर्शियल सुपरिंटेंडेंट, जो अब तक टाटानगर गुड्स शेड (CS/PSTA/TATA) के प्रभारी के रूप में कार्यरत थे, उन्हें वहां से स्थानांतरित कर टाटानगर पार्सल (TATA/Parcel) का नया प्रभारी बनाया गया है.
TATANAGAR : अमित पर बरसी आदित्य की कृपा, टाटा पार्सल के फिर बने “चौधरी”
28 साल की सेवा में 26 साल टाटानगर में ही बीते !
इस पूरे ट्रांसफर-पोस्टिंग के पीछे एक बड़ा प्रशासनिक खेल और रोटेशन नियमों का उल्लंघन साफ दिखाई देता है. रेलवे के रिकॉर्ड के मुताबिक, कमर्शियल सुपरिंटेंडेंट अमित चौधरी अपने सेवाकाल के कुल 28 वर्षों में से लगभग 26 साल तक केवल टाटानगर में ही पदस्थापित रहे हैं.
अनियमितताओं के बावजूद मिला ‘प्राइम’ प्रभार
अमित चौधरी इससे पूर्व टाटानगर में बतौर गुड्स सुपरवाइजर लगातार 8 से 10 वर्षों तक जमे रहे थे. उस दौरान गुड्स शेड से भारी वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगने के बाद ही उन्हें वहां से हटाया गया था. लेकिन विडंबना देखिए कि महज कुछ माह इधर-उधर रखने के बाद, उन्हें पुनः टाटानगर में ही मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक (CPS) बनाकर भेज दिया गया.
हाल के दिनों में टाटानगर पार्सल में भी लगातार हो रही गड़बड़ियों और अनियंत्रित कार्यशैली की शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंच रही थीं. नियमों के तहत इन गंभीर शिकायतों के बाद अधिकारी को किसी गैर-संवेदनशील पद या टाटानगर से बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा करने के बजाय उन्हें फिर से टाटानगर के ही गुड्स शेड (PSTA) का सर्वोपरि प्रभारी बना दिया गया.
दिलचस्प है कि गुड्स शेड (PSTA) में 8 साल से अधिक समय तक रहने के बाद पूर्व में उन्हें अनियमितताओं के आरोपों में हटाया गया था.
सीनियर डीसीएम की भूमिका सवालों के घेरे में
एक ही रेलकर्मी को बार-बार गंभीर आरोपों के बावजूद टाटानगर के सबसे महत्वपूर्ण और राजस्व वाले विभागों (पार्सल और गुड्स) में ही घुमाते रहना चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम (Sr. DCM) की भूमिका को संदिग्ध बनाता है.
रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि संवेदनशील पदों पर लंबे समय से जमे कर्मचारियों का रोटेशन अनिवार्य रूप से गैर-संवेदनशील या अन्य स्टेशनों पर किया जाए. इसके विपरीत, इस प्रकार की ‘सुविधाजनक’ पोस्टिंग रेल प्रशासन की पारदर्शिता पर बट्टा लगा रही है और निष्पक्ष जांच की मांग को जन्म दे रही है…क्रमश :
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उस पर गंभीरता से संज्ञान लिया जायेगा.
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