- • रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला: चिकित्सा परिचर्या नियम (RMAR), 2013 के पैरा 601 (4) में हुआ संशोधन
• हार्ट अटैक, दुर्घटना और प्रसव समेत 12 गंभीर स्थितियां ‘आपातकाल’ के दायरे में शामिल, मिलेगा पूरा रिइंबर्समेंट
NEW DELHI. भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर है. रेलवे बोर्ड ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए चिकित्सा परिचर्या नियम (RMAR), 2013 के तहत ‘आपातकाल’ (Emergency) की परिभाषा को पूरी तरह से बदल दिया है.
इस नए संशोधन के बाद, अब किसी भी आपात स्थिति में इलाज के लिए रेलवे डॉक्टरों या अस्पतालों से ‘रेफरल पत्र’ बनवाने की कागजी अनिवार्यता खत्म हो गई है. रेल कर्मचारी अब सीधे किसी भी नजदीकी निजी या सरकारी अस्पताल में जाकर अपनी जान बचा सकेंगे और उनके इलाज का पूरा खर्च (रिइंबर्समेंट) रेलवे प्रशासन उठाएगा.
हालांकि रेलवे बोर्ड ने यह आदेश मई 2026 में ही जारी किया था लेकिन अब तक इस सुविधा का लाभ कई डिवीजन में रेलकर्मियों को नहीं मिलने की बात सामने आयी है. ऐसे केस में रेलकर्मी परेशान है और उनकी शिकायत की सुनवाई भी नहीं हो पा रही है.
क्या है रेलवे बोर्ड का नया आदेश?
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक/स्वास्थ्य (G) डॉ. अनिल कुमार द्वारा जारी आधिकारिक पत्र संख्या 2021/H-1/11/47/Change of Definition (दिनांक: 08.05.2026) के अनुसार, नियमों के पैरा 601 (4) में संशोधन कर दिया गया है. बोर्ड ने अब ‘आपातकाल’ के दायरे को व्यापक बनाते हुए इसमें 12 विशिष्ट और गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों को शामिल किया है.
अब अगर कोई रेल कर्मचारी या पेंशनभोगी नीचे दी गई 12 स्थितियों का सामना करता है, तो उसे आपातकाल माना जाएगा:
- तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम (हार्ट अटैक): दिल का दौरा पड़ने या छाती में अचानक गंभीर दर्द की स्थिति.
- अचानक चेतना खोना: मरीज का अचानक बेहोश हो जाना.
- लकवा/अंगों की कमजोरी: शरीर के किसी हिस्से या अंग का अचानक काम बंद करना या पैरालिसिस का अटैक.
- सांस लेने में गंभीर कठिनाई: रेस्पिरेटरी फेलियर या सांस का अचानक उखड़ना.
- गंभीर चोट/आघात/दुर्घटना: सड़क या कार्यस्थल पर हुए बड़े हादसे, जिसमें तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत हो.
- अचानक और गंभीर दर्द: शरीर के किसी भी हिस्से में असहनीय और अचानक उठा दर्द.
- प्रसव/गर्भावस्था संबंधी आपात स्थिति: प्रसव पीड़ा या गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न हुई कोई भी अचानक जटिलता.
- किसी भी प्रकार का रक्तस्राव: शरीर के अंदरूनी या बाहरी हिस्से से अत्यधिक ब्लीडिंग होना.
- तीव्र पेट दर्द/उल्टी/दस्त: गंभीर पेट दर्द के साथ उल्टी-दस्त के कारण होने वाला निर्जलीकरण (Dehydration).
- सांप/कीड़े के काटने/जहर का मामला: किसी जहरीले जीव का काटना या पॉइजनिंग की स्थिति.
- जलना/बिजली का झटका: आग से झुलसने या हाई-वोल्टेज करंट लगने की घटना.
- कोई अन्य जानलेवा स्थिति: ऐसी कोई भी परिस्थिति जिसे इलाज करने वाले डॉक्टर द्वारा ‘जानलेवा’ (Life Threatening) प्रमाणित किया गया हो.
कागजी कार्रवाई और चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति
अब तक की व्यवस्था के अनुसार, आपात स्थिति में भी कर्मचारियों या उनके आश्रितों को चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) का दावा पास कराने के लिए रेलवे डॉक्टरों से ‘रेफर’ कराने की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था. कई बार नजदीकी रेलवे अस्पताल न होने या रेफरल में देरी के कारण मरीजों की जान पर बन आती थी, और बाद में बिल पास कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे.
रेलवे बोर्ड के इस नए आदेश के बाद यह साफ कर दिया गया है कि इन 12 परिस्थितियों में मरीज को बिना किसी देरी के निकटतम गैर-रेलवे सरकारी या निजी अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है. इलाज पूरा होने के बाद रेलवे प्रशासन नियमानुसार चिकित्सा व्यय की पूरी प्रतिपूर्ति (Full Reimbursement) सुनिश्चित करेगा. बोर्ड के इस फैसले से देश भर के लाखों रेल परिवारों को न सिर्फ समय पर बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि उन्हें वित्तीय और मानसिक तनाव से भी बड़ी मुक्ति मिलेगी.
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