पश्चिम रेलवे
- 16 मार्च 2024 को आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में AnyDesk सॉफ्टवेयर के उपयोग की सूचना
- परीक्षा में शामिल 100 उम्मीदवारों में से 4 रेलवे कर्मचारियों को 87.67% से 90.33% के बीच उच्च अंक मिले
- ऐसे कई संदिग्धों के बैंक खातों में अघोषित लेनदेन के प्रमाण मिले हैं, जिनका सीधा संबंध प्रमोशन परीक्षा से है
Ahmedabad/New Delhi. पश्चिम रेलवे में विभागीय पदोन्नति परीक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. स्टाफ वेलफेयर इंस्पेक्टर (SWI) के पदों पर पदोन्नति देने के नाम पर बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी और धांधली का मामला सामने आया है.
पूरे मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रेलवे अधिकारियों, तकनीकी सहायकों और कोचिंग सेंटर के गठजोड़ के खिलाफ शिकंजा कस दिया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में सीबीआई के निशाने पर प्रमोशन पाकर वेलफेयर इंस्पेक्टर बने चार लोग भी शामिल है.
प्रारंभिक जांच में विभागीय पदोन्नति परीक्षा (Departmental Promotion Exam) में पास कराने और रिश्वत देने के लिए फंड जुटाने से जुड़ी बाकायदा ‘कोचिंग क्लास’ चलाने की बात सामने आयी है. CBI की जांच में सामने आया है कि स्टॉफ वेलफेयर इंस्पेक्टर (SWI) के पद की परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को न केवल नकल कराने के तरीके सिखाए गए, बल्कि यह भी ट्रेनिंग दी गई कि रिश्वत के लाखों रुपये का इंतजाम कैसे किया जाए.
रेलवे में पदोन्नति का क्या है पूरा ‘खेल’
अफसर की पत्नी के व्यावसायिक परिसर से संचालन: CBI की जांच में सामने आया है कि जिस कोचिंग क्लास के जरिए यह पूरा फर्जीवाड़ा चलाया जा रहा था, वह कथित तौर पर रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी के नाम से किराए पर लिए गए कमर्शियल परिसर में चल रही थी. कोचिंग क्लास के नाम पर उम्मीदवारों को रिश्वत देने और धांधली के तौर-तरीके सिखाए जा रहे थे.
परीक्षा में धांधली और विजिलेंस से बचने की ट्रेनिंग: कोचिंग क्लास का मुख्य उद्देश्य सिर्फ सिलेबस पढ़ाना नहीं था, बल्कि परीक्षार्थियों को यह सिखाना था कि परीक्षा के दौरान नकल या अनुचित साधनों का उपयोग कैसे करना है. इतना ही नहीं, यदि रेलवे विजिलेंस (सतर्कता विभाग) की टीम पूछताछ करे, तो उनके सवालों से बचने और अपना बचाव कैसे करना है, इसका बाकायदा प्रशिक्षण दिया जा रहा था.
2 से 5 लाख रुपये में पदोन्नति की डील: रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, SWI पद पर पदोन्नति सुरक्षित करने के लिए प्रति उम्मीदवार 2 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की बोली लगाई गई थी. रिश्वत की इस रकम का लेनदेन रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों के जरिए किया गया.
सोसाइटियों से लोन लेकर दी गई रिश्वत: जांच में एक और हैरान करने वाला तथ्य सामने आया. विभागीय परीक्षाओं से ठीक पहले रेलवे क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटियों से अचानक लोन लेने वाले कर्मचारियों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी गई. उम्मीदवारों को रिश्वत की रकम चुकाने के लिए क्रेडिट सोसाइटी से लोन लेने की सलाह दी गई थी.
सर्वर हैकिंग और रिमोट एक्सेस का इस्तेमाल: CBI जांच में यह बात उजागर हुई कि 16 मार्च 2024 को आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के दौरान AnyDesk जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया था. परीक्षा सर्वर को परीक्षा खत्म होने के बाद तुरंत बंद करने के बजाय दो दिनों से अधिक समय तक सक्रिय रखा गया, ताकि उत्तरों में मनमाफिक फेरबदल की जा सके.
उम्मीदवारों के अंकों में अजीब समानता: परीक्षा में शामिल 100 उम्मीदवारों में से 4 रेलवे कर्मचारियों ने 87.67% से 90.33% के बीच असाधारण रूप से उच्च अंक हासिल किए. जांच एजेंसी को ऐसे कई संदिग्धों के बैंक खातों में अघोषित लेनदेन मिले हैं, जिनका सीधा संबंध इस धांधली से है.
ऐसी सूचना है कि पश्चिम रेलवे के सतर्कता विभाग की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए CBI ने वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों, लिपिकों और चार पदोन्नत वेलफेयर इंस्पेक्टरों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
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