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ECR पीएफए के नये फरमान से अधीनस्त बेचैन, नया आदेश सिस्टम की कंट्रोलिंग या किला बचाने के छटपटाहट!

  • अब ट्रांसफर-पोस्टिंग से पहले सभी स्तर पर लेनी होगी अनुमति , PFA ने सभी विभाग को भेजा पत्र  

PATNA. पूर्व मध्य रेल के पीएफए ने एक नया आदेश जारी कर सभी तरह की ट्रांसफर-पोस्टिंग से पहले उसकी सूचना उन्हें देने का आदेश जारी किया है. मलतब साफ है कि अब सभी तरह की ट्रांसफर-पोस्टिंग में PFA का दखल होगा. वैसे भी विभागीय हेड होने के नाते सिस्टम को दुरुस्त करने की पूरी जिम्मेदारी उनकी ही है. ऐसे में अगर पावर को सेंट्रलाइज्ड कर लिया जाये तो क्या अंतर पड़ता है.

लेकिन यहां बड़ी दिलचस्प बात यह है कि यह आदेश ऐसे समय में आया है जब पूर्व मध्य रेलवे में PFA की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठाये जा रहे हैं. आलम यह है कि कई मामलों में तो जीएम तक को सीधे ताैर पर हस्तक्षेप करना पड़ा. ऐसे में पहले से अनियमितता के आरोपों से घिरे वित्त विभाग में अगर पूरा कंट्रोल सेंट्रलाइज्ड हो जाये तो नीचे के अधिकारी क्या करेंगे?

इस आदेश को लेकर बड़ी बेचैनी अफसरों में है. सवाल उठाये जाने लगा है कि क्या नीचले स्तर पर भ्रष्टाचार अनियंत्रित हो गया था जो PFA को सभी तरह के ट्रांसफर-पोस्टिंग में हस्तक्षेप करना पड़ा है! या इसके पीछे का खेल कुछ और है? जानकारों का कहना है कि यह पूरा कृत्य सिस्टम की कंट्रोलिंग अपने हाथ में लेने को लेकर ही रचा गया है. इसे लेकर अब पूरे जाेन में चर्चा शुरू हो गयी है और जीएम से सीधे इस आदेश पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध भी पर्दे के पीछे से किया जा रहा है.

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कहा तो यहां तक जा रहा है कि कनीय कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को अपने स्तर पर केंद्रीयकृत करने का यह आदेश एक खास समुदाय के लोगों को यह भरोसा दिलाने के मकसद से लिया गया है कि उनके सही-गलत कार्यों की जवाबदेही कोई अन्य अधिकारी अब नहीं तय कर सकेगा. पीएफए में एक विभागाध्यक्ष के तौर पर असीम शक्तियां निहित है, हकीकत में उनका प्रयोग सिस्टम में एकरूपता और किसी के प्रति हुए भेदभाव को दूर करने के लिए किया जाना चाहिए था. ऐसे में सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब पीएफए खुद सारी शक्तियों के स्वामी बन जायेंगे तो उनके पक्षपातपूर्ण रवैये और भेदभाव की शिकायत किससे की जायेगी?

क्या एक चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी अपने विभागाध्यक्ष की शिकायत जीएम या रेलवे बोर्ड तक पहुंचा सकेगा ? रेलवे के आला अधिकारी भी मानते है कि अगर सिस्टम में कोई बड़ी गड़बड़ी या अनियमितता नहीं चल रही हो तो ऐसे में यह आदेश रेलवे बोर्ड और सरकार द्वारा दी गयी शक्ति के विकेंद्रीकरण की नीति के विपरीत है. मालूम हो कि एक खास समुदाय के प्रति इनकी साफ्ट नीति जगजाहिर है. यही कारण है इस आदेश को दूसरे समुदाय से जुड़े कर्मचारी कास्ट बैलेंसिंग के फैक्टर के रूप में देख और चर्चा कर रहे.

पूरे जाेन में इस बात की चर्चा है कि पीएफए पहले एडमिनिस्ट्रेटिव ग्राउंड के आधार पर अपनी पसंदीदा अधिकारियों और कर्मचारियों को इच्छित स्थान और पद पर विराजमान कर चुके हैं. कुछ बचे हैं उनको एडजस्ट करने का प्रयास भी चल रहा. नया फरमान इसी कड़ी का एक हिस्सा है. दिलचस्प है कि जीएम पूरे कृत्य पर मौन हैं? रेलवे बोर्ड भी इसे असहज नहीं मानता? चर्चा इस बात की भी है कि रिटायरमेंट की तारीख़ नज़दीक आने के साथ ही पीएफए की तेजी बढ़ गयी है और नया आदेश सिस्टम में ट्रांसफर-पोस्टिंग कंट्रोल को हाथ में लेकर अपने मनपसंद लोगों को चुनिंदा स्थानों पर बैठना हो सकता है !

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