- डिवीजन में उद्घाटन से पहले ही खुली ‘अमृत भारत’ स्टेशन के विकास की पोल, रेलवे का गति-शक्ति प्राेजेक्ट में लूट का खेल !
- टाटानगर में हाता स्टेट हाइ-वे की घुमावदार डिजाइन बनाने के पीछे का सच सीनियर डीईएन को-ऑर्डिनेशन को बताना चाहिए
- टाटा-हाता सड़क दुर्घटनाओं का बनेगी पर्याय, डिवीजन बनाने में आम लोगों से अधिक केदारों और दुकानदारों का रखा गया ख्याल
CHAKRADHARPUR. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट अमृत भारत स्टेशन योजना का चक्रधरपुर रेलमंडल में कैसा काम चल रहा है इसका नजारा आम जनता ने गुरुवार की शाम देखा. चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन के सेकेंड एंट्री में बने नवनिर्मित स्टेशन भवन की फॉल सीलिंग हवा के झोंके को नहीं सह सकी और अचानक भरभराकर गिरने लगी. संयोग यह रहा कि भवन के अंदर कोई यात्री नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा तय था.
नवनिर्मित स्टेशन भवन के भीतर से गिरने वाली सीलिंग ने यहां चल रहे कार्य की गुणवत्ता को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. हालांकि इस घटना पर अधिकारी और अभियंता मौन है लेकिन कहां जा रहा है कि पीएम गति शक्ति योजना लूट का पर्याय माना जाने लगा है. योजना के तहत चल रहे कार्य की गुणवत्ता को लेकर टाटानगर से आदित्यपुर तक कई स्थानों पर सवाल उठाये गये हैं. प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार पर सीबीआई तक की निगरानी है.
टाटानगर में तो दो साल बाद भी अमृत भारत स्टेशन योजना का बुरा हाल है. अभियंताओं की अदूरदर्शी नीति के साथ भेदभाव और मनमानी ने गति शक्ति योजना को चारागाह बना दिया है. दो साल में लगातार डिजवाइन बदली गयी अब जो मुख्य सड़क की डिजाइन में जो बदलाव किया गया है वह लूट की बड़ी पटकथा लिखने को तैयार है. टाटा-हाता स्टेट हाइ-वे की सड़क को ऐसा घुमावदार बना दिया गया है जो दुर्घटनाओं का कारण बनेगा. कहां जाता है कि इस डिवीजन को तैयार करने में सीनियर डीईएन को-ऑर्डिनेशन ने ठेकेदारों और दुकानदारों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा, जिन्होंने उनकी सुविधा का ध्यान रखा था. इन सबके बीच आम लोग को पीसने की तैयारी है.
इस मामले में फिर बात होगी, फिलहाल चक्रधरपुर रेल मंडल मुख्यालय में ही निर्माण की गुणवत्ता की बात करें. यहां कार्य की हकीकत तब सामने आ गयी जब हवा के झोंके से सेकंड एंट्री में बने नवनिर्मित स्टेशन भवन की फॉल सीलिंग भरभराकर गिरने लगी. गुरुवार को आयी आंधी-तूफान और बारिश के दौरान घटना घटी. इसमें स्टेशन भवन की फॉल सीलिंग के कई हिस्से टूटकर नीचे गिर गये. भवन करोड़ों रुपये की लागत से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बनाया जा रहा है. उद्घाटन से पहले इसका यह हाल गुणवत्ता से अधिक धन के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण है.
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि नवनिर्मित सेकंड एंट्री भवन की गुणवत्ता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें काफी गंभीरता से नहीं लिया. फॉल सीलिंग गिरने की घटना ने आरोपों को मजबूती दी है. सवाल उठ रहा है कि क्या कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता की जगह बजट लूट पर अधिक जोर है! डिवीजन में ट्रेनों की समयबद्धता को लेकर मची चीख-पुकार के बीच विकास कार्यों में गुणवत्ता ने डीआरएम तरुण हुरिया की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है.
हालांकि गति शक्ति प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार की कहानी नयी नहीं है. कई स्थानों पर प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतों पर सीबीआई ने धावा बोला है और घूसखोरी से लेकर योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की जांच चल रही है. अगर योजनाओं में भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआई की टीम जल्द ही चक्रधरपुर रेलमंडल में धमक जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.


















































































