- पटना कैट ने पदोन्नति पैनेल रद्द कर तीन माह में नया पैनेल बनाने का दिया आदेश, नहीं हुआ अनुपालन
- पटना हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, कैट में अवमानना का मामला बना गले की फांस, अभियंता भी बेबश
- रेलवे बोर्ड की गाइड लाइन से बाहर जाकर 1:5 की जगह 1:7 अभ्यर्थियों को शामिल करना पड़ा महंगा
- कार्मिक की सलेक्शन प्रक्रिया पर मौन है ECR/GM, चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग
PATNA. पूर्व मध्य रेलवे में व्यवस्था का भ्रष्टाचार नई बात नहीं है लेकिन अब यह कुकर्म बनकर सामने आया है. आलम यह है कि छह साल पहले किये गये पाप को अब कलंक से धोने की मजबूरी बन आयी है. बात हो रही पूर्व मध्य रेलवे के कार्मिक विभाग की, जिसने छह साल पहले साल 2019 में Gr.B ADEN (30% Quota) के 14 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया. इसमें सामान्य वर्ग से 08, ST से 04 और ST वर्ग से 02 का चयन करना था. यह प्रक्रिया 31.12.2019 तक पूरी कर ली गयी.
प्रक्रिया के बाद एक आरक्षित पद पर रिक्त रहने स्थिति में कुल 13 नवनियुक्त सभी सहायक मंडल अभियंताओं की पोस्टिंग कर दी गयी और इस तरह इन लोगों ने 2026 तक 6 वर्ष की सेवा भी पूरी कर ली है. ऐसे में इन्हें एक वेतन उन्नयन का लाभ भी मिल चुका है. यहां तक तो सब फील गुड चल रहा था. अचानक बीते इसी माह ECR कार्मिक विभाग ने CAT के एक निर्णय का हवाला देकर पदोन्नति पाकर छह साल से निर्विवाद काम करने वाले सभी 13 सहायक अभियंताओं को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों नहीं उनकी पदोन्नति रद्द कर उन्हें पुराने पद पर वापस भेज दिया जाये ? मजे की बात यह कि सभी 13 सहायक अभियंताओं को Revert करने का निर्णय की सूचना उनके कैडर कन्ट्रोलिंग अधिकारी PCE/ECR तक को नहीं दी गयी.
पदोन्नति पाकर सहायक अभियंता बने लोगों के लिए यह नोटिस अप्रत्याशित है. नोटिस भेजने वाले कार्मिक के जिम्मेदार लोगों को कौन समझाये गये उनके पाप की ही सजा ये लोग भुगतने की स्थिति आ गये है जिनको अब राहत मिल सकती है तो सिर्फ पटना हाईकोर्ट से. ऐसा नहीं है कि रेल प्रशासन ने अपने पाप को ढकने का प्रयास नहीं किया. कैट के आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती जरूर दी गयी लेकिन वहां से भी अब तक राहत नहीं मिली है. हाईकोर्ट ने केस तो स्वीकार किया लेकिन अब तक कैट के आदेश पर स्थगन नहीं दिया है. इधर दूसरी ओर बड़ी समस्या यह सामने आयी कि कैट गये अभ्यार्थियों ने 10.09.2025 को दिये गये पैनल रद्द करने के आदेश नहीं मानने पर अवमानना याचिका दायर कर दी है. इससे कार्मिक अफसरों के परेशानी और बेचैनी बढ़ गयी है.
कहां हुआ खेल, कैसे फंसा मामला
पूर्व मध्य रेलवे के कार्मिक विभाग ने इस चयन प्रक्रिया में शुरू से गड़बड़झाला किया. बताया जाता है कि रेलवे बोर्ड की गाइड लाइन से बाहर जाकर (1:5) की जगह (1:7) अभ्यर्थियों को मुख्य लिखित परीक्षा के लिए बुलावा भेज दिया था. यही गोलमाल हुआ. कहा जाता है कि दो खास अभ्यर्थियों के चयन के लिए यह पूरा खेल रचा गया था. इस तरह अन्तिम चयन में चुनिंदा दो अभ्यार्थी समेत कुल 13 का चयन हुआ और अंतिम सूची जारी कर दी गयी. हालांकि यह पूरा मामला तब उलझ गया जब मुख्य परीक्षा के बाद मौखिक परीक्षा में शामिल दो अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो सका. चयन नहीं होने वाले दोनों अभ्यार्थियों का आरोप था कि विस्तारित अनुपात वाली विसंगति के कारण ही उनका चयन नहीं हो सका और उन्होंने यह बात कार्मिक अधिकारियों के संज्ञान में लाया लेकिन रेल प्रशासन मौन साधे रहा.

मजबूर दोनों अभ्यार्थी कैट/पटना (Central Administrative Tribunal, Patna) पहुंच गये और चयन प्रक्रिया को चुनौती दी. सुनवाई के दौरान रेल प्रशासन ने CAT में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की लेकिन CAT ने दूध का दूध और पानी का पानी कर गलत ढंग से चयनित अधिकारी के नामों तक का उल्लेख कर दिया. इस तरह कैट ने दिनांक 10.09.2025 के अपने आदेश में रेलवे द्वारा प्रकाशित पूरे पैनेल को रद्द करते हुए तीन माह में नया पैनेल बनाने का आदेश जारी कर दिया. अब यही आदेश कार्मिक के अफसरों के लिए गले की घंटी बन गया है. महकमे में चर्चा है कि अगर कार्मिक ने नियमानुसार वर्णित 1:5 के अनुपात का पालन किया होता तो यह स्थिति ही उत्पन्न नहीं होती. क्योंकि तब न तो अतिरिक्त अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सम्मिलित हो पाते और न ही उनका अंतिम रूप से चयन परेशानी का कारण बनता.
भूल सुधार की जगह बदले की कार्रवाई तो नहीं !
कैट की अवमानना की कारवाई से फिलहाल कार्मिक विभाग के अधिकारी परेशान है. ऐसे में भूल सुधार कर नया वास्तविक पैनल बनाने की जगह कुल 13 लोगों को पदोन्नति छीनकर पूर्व के पद पर भेजने की नोटिस दिये जाने को बदले की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा. यहां सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि दो गलत पदोन्नति वालों की जगह पैनेल के सभी लोगों को नोटिस भेजने के पीछे इनकी मंशा क्या होगी ?
आखिर रेल प्रशासन इस मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच क्यों नहीं करता, जिन्होंने नियमों से बाहर जाकर 1: 5 की जगह 1:7 के अनुपात में मुख्य परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को अवसर दिया. फिलहाल ECR में प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (PCPO) के पद पर सुरेश चंद्र श्रीवास्तव पदस्थापित हैं. अब देखना है कि कैट के आदेश के आलोक में ECR का कार्मिक विभाग अपनी गलती को सुधार की दिशा में आगे बढ़ता है या इस कलंक की बेदी पर 13 अभियंताओं के पदोन्नति की बलि ले लेगा. क्रमश :
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.


















































































