Connect with us

Hi, what are you looking for?

Rail Hunt

जोन/बोर्ड/डिवीजन

चक्रधरपुर रेलमंडल में एक और दुर्घटना का कारण असमान लोडिंग ! जांच पूरी… रिपोर्ट पर अधिकारी मौन

  • अन ईवेन लोडिंग (बेतरतीब लोडिंग) से डिरेलमेंट पर रेलवे बोर्ड ने निगरानी के दिये थे आदेश 
  • जिम्मेदारों को सालों से पाल रहा है महकमा, रोटेशनल ट्रांसफर के नियम नहीं होते यहां लागू 

Chakradharpur. दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल के अंतर्गत मुर्गामहादेव और देवझर के बीच क्या डिरेलमेंट का कारण क्या अन ईवेन लोडिंग (बेतरतीब लोडिंग) था. इस मामले मेंरेलवे बोर्ड ने पहले कई बार निगरानी के आदेश दिये है लेकिन उसका अनुपालन यहां होता नहीं दिख रहा है. खैर.. बताया जाता है कि मुर्गामहादेव और देवझर के बीच हुए डिरेलमेंट की प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है. जांच में प्राथमिक तौर पर क्या सामने आया इसे अब तक रेलवे ने सार्वजनिक नहीं किया है.

यह भी पढ़ें : असमान लोडिंग मालगाड़ियों के डिरेलमेंट का बड़ा कारण, अब तीन जोन में लोडिंग की ड्रोन से होगी निगरानी

लेकिन इस बार भी महकमे में यह चर्चा शुरू हो गयी है कि हादसे का कारण मालगाड़ी डिब्बो में बेतरतीब आयरन ओर की लोडिंग ही थी. बताया जा रहा है की मालगाड़ी के सभी डिब्बों में समानांतर तरीके से आयरन ओर लोड नहीं थे. कुछ डिब्बों में ओवर लोडिंग की बात भी सामने आयी है. रेलवे के सूत्रों का कहना है कि यही कारण रहा कि अलग-अलग भार लेकर चल रहे डिब्बों में परिचालन के दौरान हल्के घुमाव पर ही बैलेंस बिगड़ गया और डिब्बा एक और झुकते हुए पलट गया. यह मालगाड़ी एक बार नहीं बल्कि दो बार हादसे का शिकार हुई.

आदित्य चौधरी, सीनियर डीसीएम, सीकेपी

रेलवे की तकनीकी भाषा में इसे अन ईवेन लोडिंग की समस्या कहा जाता है. हालांकि मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने इस मामले में रिपोर्ट आने की जानकारी से इनकार किया है. उन्होंने बताया कि रिपोर्ट आने पर ही वे कोई अधिकारिक जानकारी दे पाएंगे. बहरहाल जिस तरह से रेल मंडल में रेल हादसे बढ़े हैं उससे रेलवे बोर्ड की भी नजर चक्रधरपुर रेलमंडल पर टेढ़ी है. जून 2025 में ही रेलवे बोर्ड में असमान लोडिंग के कारण डिरेलमेंट की घटनाओंपर चिंता जताते हुए इसके  लिए निगरानी तंत्र स्थापित करने और अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा था.

रोटेशन ट्रांसफर आदेश बेमानी, सीआई 7 साल से जमे हैं तो 15 साल से जमे क्लर्क हो गये करोड़पति 

चक्रधरपुर रेलमंडल के लोडिंग सेक्शन माने जाने वाले बड़बिल-बड़ाजामदा इलाके में लोडिंग का अघोषित दबाव ऐसा है कि अधिकारियों को सिर्फ आकड़ों से मतलब रहा. नियम-कानून बेमानी होते गये. यहां सेक्शनल सीआई ओमप्रकाश पिछले सात (07) से जमे हैं. ओमप्रकाश पहले डीपीएस सेक्शन के सीआई बने. तब उनका सर्विंग स्टेशन (क्षेत्राधिकार) बांसपानी-जरुली-बड़बिल-बड़ाजामदा-गुवा-बोलानी था. नये आदेश में उन्हें बड़बिल सेक्शन का सीआई बनाया गया. तब भी उनका उनका सर्विंग स्टेशन (क्षेत्राधिकार) बांसपानी-जरुली-बड़बिल-बड़ाजामदा-गुवा-बोलानी यही रहा. यानी सिर्फ नाम बदला गया जिम्मेदारी (क्षेत्राधिकार) यथावत रही.

यह भी पढ़ें : चक्रधरपुर रेल मंडल के लोडिंग सेक्शन डीपीएस-बड़बिल-बड़ाजामदा में बह रही भ्रष्टाचार की गंगा

दिलचस्प बात है कि इस सेक्शन में 15-20 साल से जमे क्लर्क करोड़पति हो गये! विक्रांत-विनोद-उमेश समेत अन्य लोगों को सीनियरिटी को दरकिनार कर सालों से बड़बिल-बड़ाजामदा-किरीबुरु यानी घुमा फिराकर 15 KM के दायरे में ही प्रभारी बनाकर रखा गया. इस कुकृत्य में लगभग सभी सीनियर डीसीएम भागीदार बनते रहे. वर्तमान में भी यह क्रम जारी है. लूट तंत्र प्रभावी होता गया तो सिस्टम में अधिकारी व क्लर्क के बीच का भेद मिटता चला गया. जिसने गड़बड़ी अथवा अनियमितता को लेकर स्वाभाविक डर को खत्म कर दिया. रेलवे बोर्ड (Railway Board)और सीवीसी (CVC) ने जिस लक्ष्य को लेकर रोटेशनल ट्रांसफर का नियम लागू किया वहीं यहां ध्वस्त हो चुका है. रेलवे बोर्ड विजिलेंस से लेकर जोनल अधिकारियों तक की यहां नहीं चलती. इंतजार है तो सिर्फ सीबीआई का… (विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र)

दुर्घटनाओं को कम करने से अधिक ऊर्जा लगा रहे गलतियां छुपाने में  

चक्रधरपुर रेलमंडल के लोडिंग सेक्शन में हादसों का कारण तकनीकी हो या मानवीय, दोनों ही स्थिति में रेलवे को करोड़ों का नुकसान होता है. हादसों को कम करने में अधिकारी नाकाम नजर आ रहे हैं. ऐसे में इंजीनियरिंग से लेकर कॉमर्शियल के लोग गलतियों को छुपाने में ज्यादा ऊर्जा लगा रहे हैं. यही वजह है की हर बार की तरह इस बार भी जांच में आई रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से रेलवे पीछे हट रही है. चक्रधरपुर रेल मंडल में बड़े-बड़े हादसे हुए लेकिन कभी भी किसी हादसे की रिपोर्ट मीडिया के सामने नहीं लायी गयी. कारणों को चिह्नित कर नहीं बताया गया?  यह पता नहीं चल सका कि किस पर जिम्मेदारी तय की गयी और प्रशासन ने क्या कार्रवाई की? नये डीआरएम तरुण हुरिया ऊर्जावान हैं और गड़बड़ियों पर सख्त है. उसने उम्मीद की जाती है कि रेलवे की ही साख पर लगे रहे धब्बा को रोकने की सख्त पहल करेंगे?

रेलवे बोर्ड के रोटेशनल तबादले का आदेश 

 

Spread the love
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

अभी अभी

You May Also Like

न्यूज हंट

इमरजेंसी आरक्षण कोटा आवंटन में चल रहे गोलमाल की भी जांच कर रही है सीबीआई ठेकेदार से बकाया 8.50 लाख का लंबित बिल क्लीयर...

आरपीएफ-जीआरपी

दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस यूनियन के भोजूडीह ब्रांच का वर्किंग प्रेसिडेंट है रविंद्र कुमार  DHANBAD. सीबीआइ की टीम ने भोजूडीह रेलवे जंक्शन के बंगलोपाड़ा...

जोन/बोर्ड/डिवीजन

नये ज्वाइन टेक्नीशियन में ड्रॉपआउट रेट अधिक, वर्क प्रेशर-मेंटल स्ट्रेस से निपटने में आ रही मुश्किलें  50 परसेंट नए जॉइन करने वाले कुछ माह...

जोन/बोर्ड/डिवीजन

NEW DELHI. रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने 52 हफ्तों में 52 सुधारों की घोषणा की थी, लेकिन कई जोन से लेकर डिवीजन तक यह मजाक बनकर...