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    Home » दक्षिण पूर्व रेलवे रिश्वतकांड में जांच की आंच CSTE बीके पटेल तक पहुंची, गिरफ्तारी भी संभव! 
    रेल न्यूज

    दक्षिण पूर्व रेलवे रिश्वतकांड में जांच की आंच CSTE बीके पटेल तक पहुंची, गिरफ्तारी भी संभव! 

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskJuly 27, 2026
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    सांकेतिक तस्वीर AI जेनरेटेड
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    • चक्रधरपुर के Dy. CSTE सत्यम कुमार निलंबित, वरीय अधिकारियों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार 

    KOLKATA. दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के चक्रधरपुर मंडल में रेलवे सिग्नलिंग एवं दूरसंचार (S&T) के बड़े ठेकों और बिलों को पास कराने के नाम पर किये जा रहे भ्रष्टाचार के मामले में Dy. CSTE सत्यम कुमार की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की जांच कोलकाता मुख्यालय गार्डेनरीच के अधिकारियों तक पहुंच गयी है.

    सीबीआई की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कोलकाता की कंपनी M/s MRT सिग्नल्स लिमिटेड के निदेशक और दूसरे प्रतिनिधि रेलवे अधिकारियों के साथ साठगांठ करके अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाकर ठेकों के निष्पादन, बिलों को पास करने और फाइलों की मंजूरी के मनचाही राहत ले रहे थे.

    इसमें चक्रधरपुर डिवीजन के उप-मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर (Dy. CSTE) सत्यम कुमार और दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय गार्डेनरीच (कोलकाता) के कुछ अधिकारियों की भूमिका को चिह्नित किया गया था. इस सूचना पर सीबीआई ने 24 जुलाई 2026 की रात 10:00 बजे स्टेशन डायरी (G.D. Entry No. 3969) में मामला दर्ज कर औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी. 24 जुलाई 2026 को प्राथमिकी (केस संख्या: RC0102026A0005) दर्ज की गयी. इसमें यह बात सामने आयी थी कि …

    1. मई 2026: 5 लाख रुपये की पहली किस्त की डिलीवरी

    मई 2026 के दौरान कंपनी के प्रतिनिधि अमित टिबरेवाल ने अपने एक कर्मचारी सचिन झा के जरिए चक्रधरपुर में Dy. CSTE सत्यम कुमार को ₹5,000,000 (5 लाख रुपये) की नकद घूस पहुंचाई थी. यह रकम M/s MRT सिग्नल्स लिमिटेड की वेरिएशन फाइल को आगे बढ़ाने और अनुचित लाभ देने के एवज में दी गई थी.

    2. वरिष्ठ अधिकारियों तक पैठ और फाइल फॉरवर्ड करना

    कंपनी के निदेशक अंकित अंचलिया और प्रतिनिधि अमित टिबरेवाल लगातार फाइलों की मंजूरी के लिए चक्रधरपुर से लेकर कोलकाता स्थित रेलवे मुख्यालय तक लॉबिंग कर रहे थे. वे चक्रधरपुर की HUN वेरिएशन फाइल को लेकर Dy. CSTE सत्यम कुमार और उनके वरिष्ठ अधिकारी बीके पटेल (CSTE, दक्षिण पूर्व रेलवे, गार्डेन रीच मुख्यालय) के साथ लगातार संपर्क में थे. अमित टिबरेवाल द्वारा की गई इस पैरवी और दबाव के आधार पर सत्यम कुमार ने इस फाइल को अपने उच्च अधिकारी बीके पटेल के पास अग्रसारित किया था.

    3. 24 जुलाई 2026: गार्डेन रीच में बैठक और टेलीफोनिक बातचीत

    24 जुलाई 2026 को सत्यम कुमार ने अमित टिबरेवाल को फोन पर सूचित किया कि वह MRT सिग्नल्स लिमिटेड के वेरिएशन बिल और सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं. सत्यम कुमार ने बताया कि वह इसके लिए गार्डेनरीच मुख्यालय में CSTE बीके पटेल का इंतजार कर रहे हैं.अब सीबीआई यह पता लगा रही है कि कंपनी के अधिकारियों ने क्या काेई रकम इस एवज में CSTE बीके पटेल तक भी पहुंचाया था. फिलहाल पूरे केस की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तरुण कुमार सिन्हा कर रहे हैं.

    4. 25 जुलाई 2026: हावड़ा स्टेशन पर रिश्वत डिलीवरी का प्लान

    बातचीत के दौरान सत्यम कुमार के कहने पर अमित टिबरेवाल ने तय किया कि रिश्वत की बकाया रकम की डिलीवरी 25 जुलाई 2026 की तड़के हावड़ा रेलवे स्टेशन पर की जाएगी. सत्यम कुमार को हावड़ा-राउरकेला वंदे भारत एक्सप्रेस से रवाना होना था. योजना यह थी कि ट्रेन खुलने से ठीक पहले अमित टिबरेवाल का कर्मचारी स्टेशन पहुंचकर रिश्वत का बैग सत्यम कुमार को सौंप देगा. हालांकि सीबीआई ने हावड़ा स्टेशन पर ही सत्यम कुमार व अन्य को रकम के साथ धर दबोचा. सत्यम कुमार को निलंबित कर दिये जाने की सूचना है.

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    FIR में कौन-कौन लोग और संस्थाएं हैं आरोपी

    • सत्यम कुमार – उप-मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर (Dy. CSTE), दक्षिण पूर्व रेलवे, चक्रधरपुर मंडल.
    • अमित टिबरेवाल – प्रतिनिधि एवं कर्मचारी, M/s MRT सिग्नल्स लिमिटेड, कोलकाता.
    • अंकित अंचलिया – निदेशक, M/s MRT सिग्नल्स लिमिटेड, कोलकाता.
    • M/s MRT सिग्नल्स लिमिटेड तथा नोनापुकुर, कोलकाता स्थित कार्यालय.
    • अज्ञात अधिकारी एवं कर्मचारी – दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय (गार्डेनरीच) और कंपनी के व्यक्ति.

    जाने किन कामों में बदलाव के लिए दी गयी रकम ?

    M/s MRT सिग्नल्स लिमिटेड भारतीय रेलवे में सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन प्रोजेक्ट्स पर काम करती है और दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत विभिन्न कार्यों का निष्पादन कर रही है. जांच और एफआईआर के मुताबिक, यह रिश्वत निम्नलिखित प्रमुख कामों और बदलावों को पास कराने के बदले दी जा रही थी:

    • वेरिएशन बिल (Variation Bills) की मंजूरी: चक्रधरपुर मंडल के अंतर्गत चल रहे प्रोजेक्ट्स में मूल बजट और मात्रा से अधिक या अलग काम कराने से संबंधित ‘वेरिएशन बिलों’ को पास कराना.
    • सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट (Supplementary Agreement): ठेके के मूल शर्तों में संशोधन या अतिरिक्त कार्य के लिए पूरक समझौते को रेलवे की ओर से मंजूरी दिलाना.
    • हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (HUN) फाइल: चक्रधरपुर मंडल से जुड़ी High Utilization Network (HUN) की वेरिएशन फाइल को आगे बढ़ाना और स्वीकृत कराना.
    • PVC और RA बिलों का भुगतान: ‘प्राइस वेरिएशन क्लॉज’ (PVC) बिलों और ‘रनिंग अकाउंट’ (RA) बिलों को बिना किसी रुकावट या कटौती के पास करवाना.

    कंपनी टेंडर में अनुचित बदलाव और बढ़ाए गए बिलों को स्वीकृत कराकर रेलवे को गलत तरीके से आर्थिक नुकसान पहुंचा रही थी और आरोपी अधिकारी अपने निजी लाभ के लिए इसे मंजूरी दे रहे थे. सीबीआई का यह मानना है कि कंपनी और रेलवे अधिकारियों के बीच लॉबिंग और बैठकों का पूरा घटनाक्रम से साफ होता है कि कंपनी के अधिकारियों और रेलवे के बीच घूसखोरी का यह खेल काफी व्यवस्थित तरीके से चल रहा था.

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    कानूनी धाराएं और आगे की जांच में खुलेंगे नये राज

    सीबीआई ने इस मामले में देश के नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 8, 9, 10 और 12 के तहत मामला दर्ज किया है. ये धाराएं लोकसेवक को घूस देने, लोकसेवक द्वारा रिश्वत लेने, व्यावसायिक संगठन द्वारा रिश्वतखोरी करने, और इस अपराध में उकसाने या मदद करने से जुड़ी हैं.

    दक्षिण पूर्व रेलवे में सामने आया यह मामला केवल एक फाइल का नहीं, बल्कि गार्डेनरीच मुख्यालय से लेकर मंडलों तक फैले एक संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा करता है. सीबीआई अब इस मामले में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता और वित्तीय लेन-देन के डिजिटल व दस्तावेजी सबूत खंगाल रही है.

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