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रेलवे की ‘पेंशन अदालत’ 15 दिसंबर 2026 को होगी आयोजित, बोर्ड ने जारी की अधिसूचना

सांकेतिक तस्वीर AI

NEW DELHI. भारतीय रेलवे ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों की पेंशन संबंधी समस्याओं व शिकायतों के निवारण के लिए ‘पेंशन अदालत-2026’ के आयोजन की आधिकारिक घोषणा कर दी है. रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नवीनतम आदेश के अनुसार, सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों (PUs) में इस वर्ष भी 15 दिसंबर 2026 (मंगलवार) को पेंशन अदालत का आयोजन किया जाएगा.

रेलवे बोर्ड का आदेश और पुराना संदर्भ

रेलवे बोर्ड के उप निदेशक (कल्याण) द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (No. 2026/E(W)/22/01/1) के अनुसार, यह आयोजन मास्टर सर्कुलर संख्या 08/2019 में दिए गए दिशानिर्देशों के तहत किया जा रहा है. रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पेंशनरों की लंबे समय से लंबित शिकायतों और तकनीकी समस्याओं का समाधान करने के लिए इस अदालत का आयोजन हर साल 15 दिसंबर को तय दिशानिर्देशों के तहत ही किया जाता है.

संसदीय समिति की सिफारिशें और व्यापक प्रचार का निर्देश

कार्मिक, लोक शिकायत, कानून एवं न्याय से संबंधित संसदीय स्थाई समिति की सिफारिशों का पालन करते हुए, पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoP&PW) ने व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया है.

  • अग्रिम प्रचार अभियान: पेंशन अदालतों के आयोजन से काफी समय पहले व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है.

  • बहु-स्तरीय माध्यम: जानकारी साझा करने के लिए केवल पारंपरिक तरीकों का ही नहीं, बल्कि विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाएगा. इसमें पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन, संबंधित सरकारी कार्यालय, और पेंशन वितरित करने वाले बैंक तथा डाकघर शामिल हैं.

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग: पेंशनभोगियों तक सूचना पहुंचाने के लिए आधिकारिक वेबसाइटों, पेंशन पोर्टल, एसएमएस अलर्ट (SMS Alerts) और सोशल मीडिया का सक्रियता से प्रयोग किया जाएगा.

पेंशनभोगियों को दी जाएगी पूर्व सूचना

रेलवे बोर्ड ने यह पुनः दोहराया है कि जिन पेंशनरों या पारिवारिक पेंशनरों की शिकायतों पर विचार किया जाना है, उन्हें पेंशन अदालत की तिथि से काफी पहले लिखित या अग्रिम सूचना दी जानी चाहिए. इससे पेंशनभोगी अपनी समस्याओं और आवश्यक दस्तावेजों को सही समय पर प्रस्तुत कर सकेंगे.

सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधकों (कार्मिक) को निर्देश दिए गए हैं कि वे DoP&PW और रेलवे बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करें, ताकि शिकायतों का बिना किसी देरी के त्वरित समाधान हो सके.

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