- एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के कॉन्ट्रैक्ट वेरिएश फाइल (Contract Variation File) और प्राइस वेरिएशन क्लॉज (PVC) से जुड़े मामलों को पास कराने के लिए ली जा रही थी रिश्वत
- कोलकाता/हावड़ा से रंगे हाथों किसी रेलवे अधिकारी की गिरफ्तारी रेलवे के सतर्कता विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है
- रेलवे में सीबीआई का कसा शिकंजा, 48 घंटे में चार स्थानों पर छापेमारी, पकड़े गये भ्रष्टाचारी, पांच राज्यों में चल रही घूसखाेरों के खिलाफ कार्रवाई
KOLKATA/CKP. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने रेलवे में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के चक्रधरपुर मंडल में तैनात डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर (DyCSTE) सत्यम कुमार को ₹4 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है.

(DyCSTE) सत्यम कुमार
इस कार्रवाई में सीबीआई ने आरोपी अधिकारी के साथ-साथ रिश्वत देने वाली कोलकाता की निजी कंपनी ‘मेसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड’ (M/s MRT Signals Ltd.) के दो प्रतिनिधियों सुब्रत चक्रवर्ती और राजू पंडित को भी धर दबोचा है. पश्चिम बंगाल में कई वर्षों के अंतराल के बाद ट्रैप (रंगे हाथ पकड़ने) की यह सीबीआई की पहली और बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है.
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को आरोपी रेलवे अधिकारी और निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. आरोप है कि चक्रधरपुर रेल मंडल के तहत सिग्नल एवं दूरसंचार कार्यों को अंजाम दे रही कंपनी एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के कॉन्ट्रैक्ट वेरिएश फाइल (Contract Variation File) और प्राइस वेरिएशन क्लॉज (PVC) से जुड़े मामलों को पास कराने और अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले में भारी रिश्वत की मांग की गई थी.
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दो किश्तों में तय हुई थी सौदेबाजी
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी अधिकारी ने मई 2026 के दौरान फाइल आगे बढ़ाने के एवज में पहले ही ₹5 लाख की रिश्वत ले ली थी. इसके बाद बाकी बची रकम लेने और आगे भी सरकारी लाभ पहुंचाते रहने के लिए ₹4 लाख की अतिरिक्त मांग की गई थी. कंपनी के प्रतिनिधि यह रकम देने हावड़ा पहुंचे थे, जहां सीबीआई की विशेष टीम ने पहले से जाल बिछा रखा था.
हावड़ा रेलवे स्टेशन पर बिछाया गया जाल
सीबीआई की टीम को जैसे ही गुप्त सूचना मिली, उन्होंने हावड़ा रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी कर दी. जैसे ही निजी कंपनी के प्रतिनिधियों ने डिप्टी चीफ इंजीनियर को ₹4 लाख की नकदी सौंपी, सीबीआई की टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. रिश्वत की पूरी राशि (₹4 लाख) मौके से ही जब्त कर ली गई.
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तीन राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी
रंगे हाथ गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने इस नेटवर्क की परतें उधेड़ने के लिए एक साथ तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में स्थित आरोपियों के आवासीय और कार्यालय ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की.
सीबीआई ने आरोपितों के पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार स्थित आवासीय एवं कार्यालय परिसरों पर भी तलाशी ली. इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं. सभी आरोपितों को सक्षम अदालत में पेश किया जा रहा है.
- बरामदगी: छापेमारी के दौरान सीबीआई को कई आपत्तिजनक दस्तावेज, ठेकों से जुड़ी फाइलें और डिजिटल साक्ष्य (कंप्यूटर, हार्ड ड्राइव आदि) मिले हैं, जिन्हें जांच टीम ने जब्त कर लिया है.
- अदालत में पेशी: गिरफ्तार अधिकारी और दोनों प्रतिनिधियों को सक्षम अदालत में पेश किया जा रहा है, जहां सीबीआई आगे की पूछताछ के लिए रिमांड की मांग करेगी.
SER जोन से चक्रधरपुर डिवीजन तक हड़कंप
चक्रधरपुर रेल मंडल और दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय में इस कार्रवाई के बाद से हड़कंप मचा हुआ है. चक्रधरपुर डिवीजन राजस्व और माल ढुलाई के लिहाज से भारतीय रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण डिवीजनों में गिना जाता है. ऐसे में इस डिवीजन के इतने बड़े तकनीकी अधिकारी की कोलकाता/हावड़ा से रंगे हाथों गिरफ्तारी होना रेलवे के सतर्कता विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस सिंडिकेट में रेलवे के कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल थे. सीबीआई ने साफ किया है कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी यह जीरो टॉलरेंस नीति आगे भी जारी रहेगी.
आगे और कस सकता है शिकंजा
सीबीआई ने गिरफ्तार अधिकारी और कंपनी के प्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है. सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि चक्रधरपुर डिवीजन में लंबित अन्य टेंडरों और बकायों से जुड़ी फाइलों की भी पड़ताल की जाएगी, जिससे यह साफ हो सके कि इस भ्रष्टाचार के नेटवर्क में रेलवे के और कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं.
यहां देखे सीबीआई की विज्ञप्ति

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