PATNA. पूर्व मध्य रेल (ECR) के दानापुर मंडल में 47 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले एक सोलर टेंडर ने रेलवे के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है. झाझा रेलवे स्टेशन परिसर में 12 मेगावाट क्षमता (12MWp) का सोलर ग्रिड स्थापित करने के लिए जारी इस टेंडर की शर्तों और प्रक्रिया पर सवाल उठते ही सीधी उंगली दानापुर मंडल के विद्युत विभाग और Sr DEE(G)/DNR की जवाबदेही पर उठ रही है.
बिना ठोस जमीनी आकलन और नियमों को ताक पर रखकर निकाले गए इस टेंडर को ऊपरी स्तर पर प्रशासनिक विफलता और संभावित संस्थागत भ्रष्टाचार के रूप में देखा जा रहा है. निविदा प्रकाशन के लिए जिस तरीके का उपयोग किया गया वह भी इन दिनों सवालों के घेरे में आ गया है.

टेंडर के मुख्य बिंदू
- निविदा संख्या: ईएलजी/50/दानापुर/सोलर/12MWp/2026–27
- कार्य: झाझा स्टेशन परिसर में 12MWp क्षमता का सोलर ग्रिड निर्माण
- अनुमानित लागत: ₹46,89,60,000/- (लगभग 47 करोड़ रुपये)
- अग्रधन राशि (EMD): ₹1,28,16,000/-
- निविदा तिथि: 17.08.2026
- निर्दिष्ट वेबसाइट: bharat-electronic.com
प्रशासनिक विफलता और अनियमितताओं का बड़ा आधार
- ई-प्रोक्योरमेंट नियमों का उल्लंघन: रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी बड़े प्रोक्योरमेंट IREPS या GeM पोर्टल के जरिए पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होंगे. इसके बावजूद 47 करोड़ रुपये के टेंडर में ऑफलाइन प्रक्रिया और संदिग्ध तरीके अपनाना सीधे तौर पर उच्चाधिकारियों की नीयत और पर्यवेक्षण पर सवाल खड़ा करता है.
- गैर-सरकारी पोर्टल का सहारा: आधिकारिक सरकारी व रेलवे डोमेन को दरकिनार कर एक निजी/गैर-सरकारी वेबसाइट का उल्लेख करना न केवल प्रक्रियात्मक लापरवाही है, बल्कि निविदा की निष्पक्षता को संदिग्ध बनाता है.
- अव्यावहारिक योजना व भूमि की अनुपलब्धता: 12MWp प्लांट के लिए करीब 30 से 40 एकड़ उपयुक्त भूमि आवश्यक है. झाझा जैसे स्टेशन परिसर में इतनी विशाल भूमि की उपलब्धता, वैधानिक स्वीकृतियों और स्थानीय खपत की आवश्यकता का समुचित अध्ययन किए बिना ही विभागीय प्रमुख द्वारा इतना बड़ा टेंडर जारी कर देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है.
- चहेती एजेंसी को उपकृत करने की आशंका: टेंडर की शर्तों का ढांचा इस तरह तैयार किया गया प्रतीत होता है जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो और किसी विशेष एजेंसी को फायदा पहुंचे.
भूल-सुधार का दावा, पर उठते बड़े सवाल
मामले के तूल पकड़ने के बाद विभागीय सूत्रों से जानकारी सामने आ रही है कि इस टेंडर को लेकर ‘भूल सुधार’ (Corrigendum) जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि 47 करोड़ रुपये जैसे भारी-भरकम बजट के टेंडर को जारी करने से पहले समीक्षा और स्वीकृति के स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई? क्या विभागीय प्रमुख ने बिना प्रक्रिया जांचे फाइल आगे बढ़ाई या फिर गड़बड़ी उजागर होने के बाद बचाव के रास्ते तलाशे जा रहे हैं? इस विभाग के प्रमुख के रूप में फैयाज हुसैन पदस्थापित हैं.
रेलवे अभिकर्ताओं और जानकार हलकों में अब रेलवे विजिलेंस और रेलवे बोर्ड से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है.
इस टेंडर पर रेलहंट की नजर बनी रहेगी !
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उस पर तत्परता से संज्ञान लिया जायेगा.
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