PATNA. दानापुर. पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के दानापुर मंडल में प्रशासनिक निष्पक्षता और नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक बड़े भ्रष्टाचार के खेल की चर्चा इन दिनों रेल गलियारों में गर्म है. लोको शेड और रनिंग रूम के नाम पर चल रहे इस तंत्र में ऐसे-ऐसे किरदारों की जुगलबंदी सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है. आरोप हैं कि पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर न केवल वित्तीय अनियमितता की जा रही है, बल्कि जवाबदेही तय करने वाले अधिकारी भी बेबस नजर आ रहे हैं.
डीजल चोरी से शुरू हुआ जुगलबंदी का सफर
मामले की जड़ें साल 2021 से पहले की बताई जाती हैं. सूत्र बताते हैं कि जब अजय कुमार (लोको पायलट/शंटर) राजगीर में तैनात थे, उसी दौरान कौशलेंद्र कुमार (लोको पायलट) वहां के डिपो इंचार्ज के पद पर कार्यरत थे. आरोप है कि इस दौरान दोनों की साठगांठ से ‘रेलवे डीजल इन्वेंटरी’ (RDI) में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई. लाखों रुपये मूल्य के डीजल का गबन कर इस अवैध कमाई का लाभ कथित रूप से व्यवस्था से जुड़े कई रसूखदारों तक पहुंचाया गया, ताकि मामले को दबाया जा सके.
कार्रवाई के बजाय मिला सरंक्षण और मनचाही तैनाती
जब डीजल चोरी की खबरें सार्वजनिक हुईं और प्रशासनिक जांच की आंच बढ़ने लगी, तब मामले को दबाने के लिए एक सोची-समझी रणनीति अपनाई गई. निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और अजय कुमार का तबादला दानापुर कर दिया गया.
दानापुर आगमन के बाद इस तंत्र को और मजबूती मिली. आरोप हैं कि ईसीआर के अपर महाप्रबंधक (AGM) अमरेंद्र कुमार की प्रत्यक्ष छत्रछाया में इस पूरे नेटवर्क को सींचा गया. कौशलेंद्र कुमार को राजगीर रनिंग रूम का इंचार्ज बनाए रखा गया, जबकि अजय कुमार को दानापुर रनिंग रूम की कमान सौंपते हुए कौशलेंद्र के आधिकारिक सहायक के रूप में तैनात कर दिया गया.
एजीएम की संदिग्ध भूमिका और समानांतर ‘सेवा’ तंत्र
इस पूरे प्रकरण में एजीएम अमरेंद्र कुमार की भूमिका सबसे ज्यादा कटघरे में है. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद के रसूख का इस्तेमाल कर इन दोनों कर्मचारियों को प्रशासनिक जांच से न केवल बचाया, बल्कि उन्हें वसूली और ‘विशेष सेवाओं’ का मुख्य जरिया बनाया.
आरोप है कि दानापुर रनिंग रूम के नाम पर आवंटित होने वाले लाखों रुपये के सरकारी बजट का गबन रोजमर्रा की बात बन चुका है. इसके साथ ही, सरकारी पद पर तैनात कर्मचारियों का दुरुपयोग वरिष्ठ अधिकारियों के व्यक्तिगत काम निपटाने, जैसे दीघा स्थित आवासीय परिसर में दैनिक सब्जी पहुंचाना और घरेलू कामकाज संभालना, आदि के लिए किया जा रहा है.
सूत्रों का यह भी दावा है कि दानापुर मंडल की विभिन्न लॉबियों से एकत्रित की जाने वाली अवैध राशि को विशेष वाहकों के जरिए ट्रेन के इंजन (लोको) के रास्ते दानापुर भेजा जाता है. वहां से यह धनराशि अजय कुमार के माध्यम से ऊपरी प्रशासनिक तंत्र में बैठे प्रभावशाली लोगों के खातों और लॉकरों तक पहुंचाई जाती है. इस काम के बदले दोनों कर्मचारियों को बिना ट्रेन चलाए पूरे महीने का वेतन और अवैध मलाई का निश्चित हिस्सा दिया जा रहा है.
अधिकारियों की लाचारी, रसूख के आगे नियम-कानून पस्त
सोशल मीडिया और रेल कर्मचारियों के बीच जब इस पूरे नेटवर्क की पोल खुली, तो बदनामी से बचने के लिए स्थानीय रेल प्रशासन (Sr.DEE/OP/DNR) ने दबाव में आकर दोनों कर्मचारियों को वापस मूल ड्यूटी (ट्रेन परिचालन) पर भेजने की प्रशासनिक हिम्मत जुटानी चाही. हालांकि, इस प्रक्रिया में शीर्ष स्तर पर बैठे एजीएम साहब का प्रभाव आड़े आ गया.
चर्चा है कि शीर्ष अधिकारी के सीधे हस्तक्षेप और दबाव के आगे विभागीय अफसर पूरी तरह बेबस नजर आ रहे हैं. स्थिति यह है कि दानापुर रेल मंडल में नियमों को ताक पर रखकर यह समानांतर व्यवस्था बेरोक-टोक चलाई जा रही है, जिससे निष्ठावान और ईमानदार रेल कर्मियों के बीच भारी असंतोष व्याप्त है. अब देखना है इस मामले में एजीएम के स्तर पर क्या पहल होती है!
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उस पर तत्परता से संज्ञान लिया जायेगा.
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