Danguwaposi (Chakradharpur Railway Division). दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के चक्रधरपुर रेल मंडल अंतर्गत डांगुवापोसी रेलवे यार्ड में रेल संपत्ति की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चक्रधरपुर मंडल के इस सुदूर यार्ड में मालगाड़ियों से आयरन ओर (लोह अयस्क) का अनधिकृत उठाव और ‘स्वीपिंग’ का विवादित खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है.
कुछ दिनों की खामोशी के बाद यह अनधिकृत कारोबार अब नए तरीके से शुरू होने की सूचना है. अंतर केवल इतना है कि जो काम पहले दिन के उजाले में बेखौफ होता था, वह अब रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों के माध्यम से अंजाम दिया जा रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के आंतरिक सतर्कता तंत्र और विभागीय जांच प्रक्रिया पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं.
डांगुवापोसी में अन-लोडिंग का ‘अवैध’ खेल, दिन के उजाले में उतार जा रहा ‘आयरन ओर’, RPF का संदिग्ध मौन!
हाल ही में Rail Hunt द्वारा डांगुवापोसी में आयरन ओर की अवैध रूप से अनलोडिंग का मामला उजागर किए जाने के बाद RPF के सहायक सुरक्षा आयुक्त (ASC) अमरेश चंद्र सिन्हा ने मौके की जांच की थी. हालांकि, जांच पूरी होने के बावजूद इसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है.
सूत्रों और जानकार सूत्रों का दावा है कि RPF अधिकारी जांच रिपोर्ट को ‘गोपनीय’ बताकर दबा रहे. आरोप हैं कि विभागीय जांच में लीपापोती की गई है और सहायक सुरक्षा आयुक्त की रिपोर्ट के जरिए वरिष्ठ कमांडेंट से लेकर आईजी (IG) और महानिदेशक (DG) स्तर के अधिकारियों तक को भ्रामक जानकारी दी गई हो सकती है.
चर्चाओं में यह बात भी सामने आ रही है कि डांगुवापोसी में पदस्थापित RPF इंस्पेक्टर विजेंद्र कुमार और जांच अधिकारी के बीच निकटता रही है. ऐसे में एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर सवाल उठना स्वाभाविक है. असली सच क्या है, यह तो केवल जांच रिपोर्ट के सार्वजनिक होने या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा.
जांच पूरी होते ही फिर सक्रिय हुआ सिंडिकेट
सबसे बड़ा सवाल प्रक्रियात्मक क्रोनोलॉजी (घटनाक्रम) को लेकर उठ रहा है:
खबर का असर: मीडिया में रिपोर्ट आने के तुरंत बाद डांगुवापोसी यार्ड से भारी वाहन, डंपर और ट्रैक्टर रातों-रात गायब हो गए थे और ‘स्वीपिंग’ का काम पूरी तरह ठप पड़ गया था.
जांच के बाद की स्थिति: जैसे ही सहायक सुरक्षा आयुक्त की जांच प्रक्रिया समाप्त हुई, वैसे ही यार्ड के आसपास मजदूरों की आवाजाही शुरू होने और रेलवे ट्रैक पर आयरन ओर गिराये जाने की सूचनाएं मिलने लगीं.
यदि यार्ड में सब कुछ नियमों के तहत हो रहा था, तो जांच के दौरान यह काम बंद क्यों हुआ? और यदि कोई गड़बड़ी थी, तो जांच समाप्त होते ही गतिविधियां दोबारा कैसे शुरू हो गईं? यह स्थिति सीधे तौर पर स्थानीय RPF प्रशासन और जांच अधिकारी की भूमिका को संदेह के दायरे में लाती है.
सुदूर स्टेशन पर सेवा विस्तार (Extension) की वजह क्या ?
स्थानांतरण प्रबंधन प्रणाली (TMM) के तय मानकों के विपरीत, डांगुवापोसी जैसे मूलभूत सुविधाओं से वंचित और दुर्गम स्टेशन पर RPF इंस्पेक्टर को एक साल का सेवा विस्तार (Extension) दिया जाना शुरुआती समय से ही चर्चा का विषय रहा है.
आमतौर पर अधिकारी अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार के स्वास्थ्य के आधार पर सुगम स्थानों की मांग करते हैं. ऐसे में एक गैर-व्यावसायिक लोडिंग स्टेशन पर बने रहने की जिद और प्रशासनिक स्तर पर उन्हें दिए गए एक्सटेंशन को अब सीधे तौर पर यार्ड में चल रहे संदिग्ध व्यापारिक तंत्र से जोड़कर देखा जा रहा है.
Safety से खिलवाड़, मालगाड़ियों के बेपटरी होने का कारण यह तो नहीं?
जानकारों का कहना है कि डांगुवापोसी और आसपास के रेल खंडों में बार-बार मालगाड़ियों के बेपटरी (Derailment) होने की घटनाओं के पीछे भी मालगाड़ियों के वैगनों से अनधिकृत रूप से गिराया जाने वाला अयस्क एक मुख्य कारण हो सकता है.
पटरियों पर लोड असंतुलन: आयरन ओर अथवा पिलेट अवैध उठाव के दौरान पटरियों पर और वैगन गिट्टियों (Ballast) के बीच लोह अयस्क का जमाव ट्रेन के सुचारू संचालन में बाधा पैदा करता है.
- मालगाड़ी वैगन का असंतुलन : मालगाड़ी वैगन के बेपटरी होने की घटनाओं में यह बात सामने आती रही है कि आयरन ओर अथवा पिलेट का वैगन में एक तरफा लाेडिंग का असंतुलन कारण हो सकता है. जांच का विषय है कि यह असंतुलन एक तरफ से अवैध रूप से गिराये गये ‘आयरन ओर’ के कारण तो नहीं हो रहा ?
संरक्षा मानकों की अनदेखी: पटरियों के पास अनधिकृत व्यक्तियों और वाहनों की आवाजाही रेलवे सुरक्षा के कड़े नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है. बावजूद आरपीएफ की जानकारी में यह कृत्य सालों से चल रहा है.
बीते दिनों रेल मंत्री ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि रेलवे सेफ्टी और संरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई होगी. ऐसे में सुरक्षा मानकों से समझौता किया जाना जांच अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करता है.
RPF DG स्तर से उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए रेल मामलों के विशेषज्ञों और मीडिया वर्ग का मानना है कि इस पूरे प्रकरण का सच सामने लाने के लिए गंभीर कदमों का उठाया जाना जरूरी है.
Independent Inquiry : चक्रधरपुर मंडल से इतर रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक (DG, RPF) या रेलवे बोर्ड स्तर की किसी स्वतंत्र सतर्कता टीम (Vigilance Team) से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए.
सेवा विस्तार की समीक्षा : डांगुवापोसी में दिए गए एक्सटेंशन और TMM नियमों की अनदेखी के कारणों की प्रशासनिक समीक्षा की जाए. DPS में एक्सटेंशन मांगने की मुख्य वजह के सही कारणों का पता लगाया जाना चाहिए.
रिपोर्ट को सार्वजनिक/समीक्षित करना: पूर्व में सौंपी गई सहायक सुरक्षा आयुक्त की जांच रिपोर्ट की निष्पक्षता की जांच किसी वरिष्ठ केंद्रीय अधिकारी से कराई जाए.
दिन के उजाले से शुरू होकर रात के अंधेरे तक पहुंचे इस पूरे खेल पर जब तक शीर्ष नेतृत्व सख्त रुख नहीं अपनाएगा, तब तक रेलवे संपत्ति की सुरक्षा और संरक्षा पर सवाल उठते रहेंगे.
स्टेशन मास्टर की भूमिका भी संदिग्ध, 17 नंबर लाइन पर नहीं ली जाती गाड़ियां
डांगुवापोसी में एक स्टेशन मास्टर I B LENKA पिछले 20 साल से पदस्थापित हैं. ट्रेन संचालन, वैगन/लोकेशन, यार्ड मैनेजमेंट, से जुड़ा यह पद संवेदनशील श्रेणी में आता है बावजूद एक ही स्टेशन मास्टर का इस सेक्शन में पदस्थापित होना भी गंभीर सवाल खड़े करता है. यहां GN MAJHI फिलहाल ARM हैं.
सूत्रों का कहना है कि डांगुवापोसी में लाइन नंबर 17 पर पहले मालगाड़ियां नहीं ली जाती थी. यह लाइन समीप के रोड से सटा है और इसी के रास्ते अवैध ओर को ट्रेक्टरों पर लोड करने का काम होता था. यहां अवैध काम रुकने के बाद लाइन नंबर पर 17 पर दिन के समय गाड़ियां ली जाती देखी गयी है!
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उसे पूरा स्थान दिया जायेगा.
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