कॉ गौतम के सामने चुनौतियां
- एकल यूनियन होने के बावजूद SERMU की किसी मंच पर दमदार मौजूदगी नहीं दिखती
- यूनियन नेताओं के बीच बढ़ती गुटबाजी और कॉरपोर्रेट कल्चर ने बदला नेताओं का मिजाज
- काम नहीं होने से कर्मचारी-कार्यकर्ताओं में आक्रोश, नेताओं को भाव तक नहीं देने अधिकारी
- यूनियन नेताओं को प्रबंधन थमा रहा चार्जशीट, बेबश मुंह ताक रहे यूनियन के पदाधिकारी
- तबादला-पोस्टिंग से लेकर हाउस रेंट की निकासी में भी अवैध रूप से लेन-देन के आरोप
KOLKATA. अर्बन बैंक चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद (SERMU) दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस यूनियन ने मान्यता के चुनाव में दमदार उपस्थिति दर्ज करायी थी. इस तरह दक्षिण पूर्व रेलवे (South Eastern Railway) जोन में एकल यूनियन के रूप में परचम तो लहराया लेकिन प्रशासनिक मंच पर कहीं भी अपनी दमदार उपस्थिति नहीं दर्ज करा सकी. यूनियन में बढ़े कॉरपोरेट कल्चर, तबादला-पोस्टिंग से लेकर हाउस रेंट की निकासी तक में कर्मचारियों से वसूली के आरोपों ने यूनियन के बड़े नेताओं की छवि को दागदार ही किया है.
रेल प्रबंधन की गैरजरूरी सख्ती और यूनियन के प्रति कर्मचारियों में बढ़ते असंतोष के बीच SERMU में अचानक बड़ा बदलाव सामने आया है. नवंबर-दिसंबर में जनरल काउंसिल मीटिंग से पहले ही आशीष मुखर्जी को हटाकर काॅ गौतम मुखर्जी ने यूनियन महासचिव की कमान संभाल ली है. हालांकि यह निर्णय शनिवार 6 सितंबर 2025 को आद्रा के जेएम विश्वास भवन में आयोजित साउथ ईस्टर्न रेलवे वर्किंग कमेटी की बैठक में लिया गया. बैठक में सभी डिवीजन के को-ऑर्डिनेटर के अलावा ब्रांच सचिवों के बीच निर्णय पर सर्वसम्मति बनी और सभी ने एकमत से इस निर्णय का स्वागत किया और कॉ गौतम में आस्था जतायी.

अर्बन बैंक चुनाव में SERMU की करारी हार और चेयरमैन की कुर्सी गवां देने वाले कॉ गौतम मुखर्जी कई महीनों से सांगठनिक और प्रशासनिक मुख्यधारा से सीधे तौर पर लगभग कटे हुए थे. हालांकि वह AIRF के साथ ही SERMU में उपाध्यक्ष की भूमिका में स्थापित थे. लेकिन अचानक दो टर्म पूरा कर चुके आशीष मुखर्जी को बदलने का गौतम मुखर्जी का नया दांव चौकने वाला है. यूनियन के जानकारों का कहना है कि इसके कई कारण है. अघोषित तौर पर यूनियन के अधिकांश निर्णय गौतम मुखर्जी ही लेते थे, आशीष मुखर्जी सिर्फ चेहरा ही थे.
साउथ ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन की वर्किंग कमेटी की बैठक में कॉ गौतम मुखर्जी को जनरल सेक्रेटरी बनाने का निर्णय ऐसे समय में लिया गया जब एकल यूनियन की मान्यता के बावजूद संगठन दुर्गति की स्थिति में है. रेल प्रशासन हावी है, पूरे जोन में यूनियन की नहीं चल रही. यूनियन के ब्रांच नेताओं पर प्रशासनिक डंडा चल रहा है और कार्यकर्ताओं में निराशा घर करती जा रही है. ऐसे में सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित गौतम मुखर्जी के कमान संभालने को कार्यकर्ता एक बड़ी उम्मीद के रूप में लिया ले रहे.

हालांकि महासचिव के रूप में यूनियन की कमान संभालने वाले कॉ गौतम मुखर्जी के सामने कई चुनौतियां मुंह बायें खड़ी हैं. यूनियन नेता अब मजदूर की आवाज बनने की जगह अधिकारियों की चापलूसी में मग्न हैं. आलम यह है कि एक ही स्थान पर सिर्फ विभाग बदलने वाले अधिकारियों को भी शॉल ओढ़ाने डिवीजनल को-ऑर्डिनेटर तक पहुंच जाते हैं. यूनियन के ब्रांच पदाधिकारी ठेकेदारों के केयरटेकर बनाकर उनका कार्य संभाल रहे. अधिकारियों की दलाली में जुटे ये लोग संगठन की अहम सूचनाएं लीक कर अपने ही लोगों को प्रबंधन का निशाना बनवा दे रहे.
हालांकि कमान संभालने के बाद कॉ गौतम मुखर्जी ने स्पष्ट संकेत दिया कि संगठन के कील-कांटों को दुरुस्त किया जायेगा. संगठन में चमचागिरी और अधिकारियों की दलाली नहीं चलेगी. आरोपों के घेरे में आये नेताओं को तत्काल जिम्मेदारी से मुक्त किया जायेगा. रेलकर्मियों की परेशानी दूर करने और SERMU की प्रतिष्ठा को नये सिरे से स्थापित करने में उनका पूरा जोर होगा. ऐसे कई बदलाव आने वाले समय में नजर आने लगेगा.
दक्षिण पूर्व रेलवे के कर्मचारियों में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार : एमके सिंह
चक्रधरपुर मंडल संयोजक मनोज कुमार सिंह ने कहा कि दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस यूनियन के एनर्जेटिक और कद्दावर नेता कॉमरेड गौतम मुखर्जी के महासचिव बनने से यूनियन की गरिमा स्थापित होगी और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के दिशा में कदम तेज होंगे. कर्मचारियों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होगा.
















































































