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CKP DIV : डीआरएम की चिंता सच हुई साबित, बंडामुंडा अस्पताल में दो माह पहले बनी दीवार गिरी

  •  भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रेलवे अस्पताल में निर्माण कार्य, दीवार ढहने से कार्य गुणवत्ता की जांच सवालों के घेरे में 

BANDAMUNDA. रेलनगरी बंडामुंडा के रेलवे अस्पताल में जारी निर्माण कार्य अब भ्रष्टाचार और लापरवाही का पर्याय बनता जा रहा है. ताज़ा घटनाक्रम में अस्पताल परिसर में महज दो महीने पहले बनाए गए स्टेज की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई. लगभग दस लाख रुपये की लागत से एके एंटरप्राइज द्वारा किए जा रहे इस निर्माण कार्य पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में जमकर घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और इंजीनियरिंग मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई. दीवार टूटने के बाद साफ हो गया कि इसमें न तो मज़बूत फाउंडेशन तैयार किया गया था और न ही पिलर बनाए गए थे. ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद दो महीने भी निर्माण टिक नहीं पाया, जो भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है.

आईओडब्लू की भूमिका पर भी सवाल

लोगों का कहना है कि इस कार्य की गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी रेलवे आईओडब्लू (इंस्पेक्टर ऑफ वर्क्स) शिव प्रसाद सिंह की थी, लेकिन उन्होंने अपनी आंखें मूंद रखी थीं. यही कारण है कि उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है. उल्लेखनीय है कि शिव प्रसाद सिंह का करीब एक महीने पहले राउरकेला तबादला हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद वे अब तक बंडामुंडा आईओडब्लू की कुर्सी पर जमे हुए हैं.

डीआरएम की चेतावनी सही साबित

गौरतलब है कि 20 अगस्त को चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया ने बंडामुंडा का एक दिवसीय दौरा किया था. उस दौरान उन्होंने रेलवे हाई स्कूल और रेलवे अस्पताल में जारी निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए कार्य में लापरवाही के लिए आईओडब्लू को फटकार लगाई थी. अब, महज एक हफ्ते बाद रेलवे अस्पताल की दीवार ढहने की घटना ने डीआरएम की आशंका को सही साबित कर दिया.

ग्रामीणों में आक्रोश, उच्चस्तरीय जांच की मांग

दीवार ढहने की घटना को निर्माण की गुणवत्ता से जोड़कर देखा जा रहा. इसे सरकारी धन की बर्बादी बताते हुए ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है. स्थानीय लोगों ने सरकार और रेलवे प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों को चिन्हित करने और सख्त सज़ा देने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार दोबारा न हो.

रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उसे पूरा स्थान दिया जायेगा. 

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