- धनबाद मंडल के बरकाकाना में हुए खुलासे के बाद डीआरएम ने दिए जांच के आदेश
- यूनियन के पदाधिकारी है आरोपी इंचार्ज एमपी महतो, छह साल से एक स्थान पर जमे हैं
- एक माह पूर्व ही भ्रष्टाचार के मामले में डिवीजन में सीएलआई को बर्खास्त किया गया था
DHANBAD. पूर्व मध्य रेलवे में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है. धनबाद डिवीजन के बरकाकाना स्टेशन कैरेज एंड वैगन विभाग के एक इंचार्ज फर्जी हाजिरी बनाकर रेलवे को लाखों का चूना लगा रहे थे. जो सूचना सामने आयी है कि उसके अनुसार इंचार्ज एमपी महतो अपने चहेतों को बिना आवकाश के ही छुट्टी पर भेज देते और सकूशल वापस लौटने पर मैजुअल रजिस्टर में उनकी हाजिरी दर्ज कराकर पूरा वेतन भी दिलवा देते हैं. यह कृत्य लंबे समय से चल रहा है.
इंचार्ज एमपी महतो एक कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी हैं. धनबाद मंडल की घटना मीडिया में आने के बाद ईसीआर जोन में चर्चा का विषय बनी हुई है. बताया जा रहा है कि एमपी महतो यूनियन के नाम पर अवैध वसूली एवं कार्यालय मेंटेनेन्स के नाम पर कर्मचारियों से अनाधिकृत रूप से यूपीआई स्कैनर लगाकर वसूली कर रहे हैं. अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि यह वसूली किस खाते में जा रही है और उसका संचालन कौन कर रहा है? यह जांच का अगला बिंदु हो सकता है.
धनबाद डीआरएम अखिलेश मिश्र ने मीडिया में सामने आयी सूचनाओं के आधार पर जांच के आदेश दिए हैं. यहां कर्मचारियों का कहना है कि अवैध वसूली में सहयोग नहीं करने वालों को प्रताड़ित और तरह-तरह से परेशान किया जाता है. कुछ लोगों ने यह बात डीआरएम तक भी पहुंचायी है. सूचना के अनुसार पूरे मामले की जांच सीनियर सेक्शन इंजीनियर शत्रुघ्न कुमार और राजेश कुमार कर रहे हैं.
कर्मचारी यूनियन की पैठ का मिलता रहा है फायदा
कैरेज व वैगन विभाग के इंचार्ज बरकाकाना में पदस्थ एमपी महतो को यूनियन में होने का फायदा मिलता रहा है. हालांकि जांच कमेटी पुख्ता सबूतों के आधार पर आगे बढ़ रही है. अब देखना है कि यूनियन पदाधिकारी इस मामले में क्या भूमिका निभाते हैं और जांच को किस तरह प्रभावित किया जाता है. जांच के बाद उन कर्मचारियों में दहशत है जिन्होंने साहब के समर्थन से बिना अवकाश के ही दूरदराज की यात्राएं की हैं. ड्यूटी अवधि में यात्रा के लिए पास के दुरुपयोग को भी सबूत के तौर पर जुटाया जा रहा है.
सेंसेटिव पोस्ट के नियम यहां भी दरकिनार
6 साल से एक स्थान पर जमे कैरेज इंचार्ज की भूमिका जांच के साथ ही कई खुलासे सामने आ रहे हैं. रेलवे बोर्ड और सीवीसी के नियमों के अनुसार किसी भी स्थान पर जो पद संवेदनशील श्रेणी से जुड़ा हो वहां चार साल से अधिक पोस्टिंग नहीं हो सकती है. लेकिन यूनियन के प्रभाव का दुरुपयोग कर अधिकांश स्थानों पर इस नियम का खुला उल्लंघन किया जाता रहा है. अब जांच पर सबकी नजरें और जांच अधिकारी इस दबाव में है कि किस तरह यूनियन के दबाव को दरकिनार कर प्रबंधन के सामने सच को सहज रूप से रखा जा सके.



















































































