- सीबीआई और विजिलेंस की जांच में सामने आये चौंकाने वाले खुलासे, अस्पताल के रिकार्ड जब्त
BHOPAL. रेलवे के स्वास्थ्य महकमे में भ्रष्टाचार और जालसाजी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे विभाग को हिलाकर रख दिया है. सीबीआई (CBI) और विजिलेंस की संयुक्त टीम ने भोपाल के निशातपुरा कोच फैक्ट्री स्थित रेलवे अस्पताल में चल रहे ‘कैंसर इलाज घोटाले’ का पर्दाफाश किया है.
यहां तैनात एक महिला डॉक्टर और अस्पताल के बाबुओं (क्लर्कों) ने मिलकर निजी कैंसर अस्पतालों के साथ एक बड़ा ‘कमिशन का खेल’ रचा. चौंकाने वाली बात यह है कि महकमे के ज़िम्मेदार अफसरों ने इस गंभीर गड़बड़ी पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी थी.
₹15 हजार का बिल… भुगतान ₹17 करोड़ का!
जांच में जो सबसे बड़ा और हैरान करने वाला खुलासा हुआ है, वह है बिलों में की गई बेतहाशा हेराफेरी. सूत्रों के मुताबिक, रेलवे अस्पताल में इलाज के लिए आए कैंसर मरीजों के वास्तविक बिल महज ₹15,000 के आसपास थे. लेकिन महिला डॉक्टर प्रतिभा वर्मा और वहां तैनात बाबुओं ने निजी कैंसर अस्पतालों से साठगांठ कर, इन मामूली बिलों में फर्जीवाड़ा किया और उन्हें बढ़ाकर सीधे ₹17 करोड़ का कर दिया. यही नहीं, इस भारी-भरकम राशि का रेलवे के खजाने से भुगतान भी करा दिया गया.
12% कमिशन का गंदा खेल
सीबीआई और विजिलेंस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे 12% कमिशन का खेल चल रहा था. रेलवे अस्पताल के कर्मचारी निजी अस्पतालों के बिलों को पास कराने के बदले यह मोटी रकम वसूलते थे. करीब दो महीने पहले इस भ्रष्टाचार की शिकायत रेलवे के सीनियर अधिकारियों को मिली थी, जिसके बाद इसकी गोपनीय जांच तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई थी.
टीम ने मंगलवार को सीबीआई के साथ मिलकर अचानक अस्पताल के रिकॉर्ड्स ज़ब्त किए, जिसके बाद इस महाघोटाले की कलई खुल गई. फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और कई बड़े चेहरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मामले की जांच चल रही है और कई चौंकाने वाले खुलासे आने बाकी है.
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