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Home » SER : अवैध वेंडिंग की जांच को गोपनीय बताने वाले RPF को CIC का झटका- 4 हफ्ते में देनी होगी ‘स्टेटस रिपोर्ट’
आरपीएफ-जीआरपी

SER : अवैध वेंडिंग की जांच को गोपनीय बताने वाले RPF को CIC का झटका- 4 हफ्ते में देनी होगी ‘स्टेटस रिपोर्ट’

Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskJuly 2, 2026
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सांकेतिक चित्र
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    • SER/RPF मुख्यालय और CKP डिवीजन में अवैध वेंडिंग की जांच स्टेटस रिपोर्ट नहीं देने पर आयोग ने की सुनवाई 

TATANAGAR. रेलवे में ‘अवैध वेंडिंग’ के खेल और उसकी जांच रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठे आरपीएफ (RPF) अधिकारियों को केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने कड़ा झटका दिया है. आयोग ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार और कदाचार की जांच को ‘गोपनीय’ या ‘निजी जानकारी’ बताकर छुपाया नहीं जा सकता है.

दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के एक मामले की सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त स्वागत दास की पीठ ने रेलवे सुरक्षा बल (RAILWAY PROTECTION FORCE) प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह 4 हफ्ते में हर हाल में स्टेटस रिपोर्ट और अंतिम नतीजा शिकायतकर्ता को सौंपे.

आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शिकायत पर क्या एक्शन हुआ, यह जानना नागरिक का मौलिक अधिकार है. आयोग ने आरपीएफ की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें जांच को गोपनीय व सुरक्षा कारणों का हवाला देकर धारा 8(1)(j) और 8(1)(g) के तहत सूचना देने से से मना कर दिया गया था.

हालांकि आयोग ने CPIO को जुर्माना से यह कहकर राहत दे दी कि इस जानकारी रोकने के पीछे दुर्भावना या जानबूझकर सूचना रोकने की मंशा नहीं थी बल्कि गलत कानूनी धारणा मुख्य कारण थी.

क्या है पूरा मामला ?

यह मामला शिकायतकर्ता जमशेदपुर निवासी अनिल कुमार बनाम दक्षिण पूर्व रेलवे (चक्रधरपुर डिवीजन) से जुड़ा है. शिकायतकर्ता ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) मुख्यालय द्वारा एक शिकायत के संबंध में की गई जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की मांग की थी. तत्कालीन जन सूचना अधिकारी (CPIO) और प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(j) (व्यक्तिगत जानकारी) और धारा 8(1)(g) (शारीरिक सुरक्षा को खतरा) का हवाला देकर जानकारी देने से मना कर दिया था.

विभाग के इस अड़ियल रवैये के खिलाफ शिकायतकर्ता ने केंद्रीय सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया था. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई में शिकायतकर्ता की ओर से प्रमोद कुमार और रेलवे की ओर से चक्रधरपुर डिवीजन से आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त  (ASC/RPF/CKP) अमरेश चंद्र सिन्हा ने पक्ष रखा.

सुनवाई में आयोग की तीखी टिप्पणी

सूचना आयुक्त स्वागत दास की पीठ ने मामले के रिकॉर्ड्स का अवलोकन करने के बाद प्रतिवादी ( रेलवे विभाग RPF) के रवैये पर असंतोष जताया. आयोग ने दो टूक शब्दों में कहा कि जन सूचना अधिकारी (PIO) ने शिकायतकर्ता को पूरी जानकारी न देकर आरटीआई कानून की मूल भावना का उल्लंघन किया है.

आयोग ने स्पष्ट किया कि जब कोई नागरिक किसी गड़बड़ी या कदाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे यह जानने का पूरा कानूनी अधिकार है कि उसकी शिकायत पर विभाग ने क्या कदम उठाए (Action Taken) और उसकी वर्तमान स्थिति (Status) क्या है. इसे किसी तीसरे पक्ष की ‘निजी जानकारी’ बताकर छुपाया नहीं जा सकता.

दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला

आयोग ने अपने आदेश को कानूनी मजबूती देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के प्रसिद्ध फैसले कमल भसीन बनाम राधा कृष्ण माथुर (2017) का संदर्भ दिया. कोर्ट ने अपने इस फैसले में व्यवस्था दी थी कि भ्रष्टाचार या कदाचार की शिकायतों पर सतर्कता विभाग (Vigilance) द्वारा की गई जांच और उसका नतीजा पूरी तरह से सार्वजनिक हित (Public Interest) का मामला है.

ECR: ‘अवार्ड’ की चमक में छिपा आरटीआई का ‘अंधेरा’, ट्रांसफर-ड्यूटी खेल पर प्रशासनिक पर्दा!

अदालत ने माना कि भले ही विभाग के अंदरूनी अधिकारियों की फाइल टिप्पणियां या आपसी विचार-विमर्श गोपनीय रखे जा सकते हैं, लेकिन शिकायत का अंतिम और व्यापक परिणाम शिकायतकर्ता को बताना ही होगा.

आयोग का कड़ा निर्देश और समय सीमा

केंद्रीय सूचना आयोग ने रेलवे प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर शिकायतकर्ता को उसके आवेदन करने की तिथि पर शिकायत पर की मौजूदा स्थिति और जांच का अंतिम नतीजा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए.

आयोग ने अधिकारियों के इस बहाने को भी खारिज कर दिया कि जानकारी किसी अन्य विभाग के पास है. आयोग ने आदेश दिया कि यदि सूचना किसी दूसरे विभाग से भी संबंधित है, तो मुख्य पीआईओ आरटीआई अधिनियम की धारा 5(4) के तहत संबंधित अधिकारी से सहायता लेंगे और शिकायतकर्ता को यह जानकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर बिल्कुल मुफ्त प्रदान करेंगे.

Finding को देखने के बाद आगे की रणनीति बनाएंगे : शिकायतकर्ता

दो साल के लम्बे अंतराल के बाद आये आयोग के निर्णय पर संतोष जताते हुए शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने कहा की RPF की जांच फाइंडिंग मिलने के बाद यह तय करेंगे की आगे क्या करना है. उन्होंने कहा की उनकी शिकायत सबूतों के साथ थी, अगर जांच रिपोर्ट से ऐसा प्रतीत हुआ की किसी को राहत देने के लिए सबूतों को अनदेखा किया गया है तो RPG/DG से पूरी जांच की समीक्षा करने का अनुरोध किया जायेगा. इस मामले को अधूरा नहीं छोडेंगे.

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