- CKP मंडल में ट्रांसफर नीति पर रनिंग कर्मचारियों का आक्रोश चरम पर, मुद्दा भुनाने मैदान में उतरी SERMC
- कर्मचारियों का आरोप : नई तबादला नीति कुछ चुनिंदा लॉबियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनायी
CKP/TATA. दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल (CKP DIV) में लोको रनिंग स्टाफ के लिए घोषित नई ट्रांसफर नीति को लेकर रेल प्रशासन और कर्मचारियों के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है.
रेल प्रबंधन ने नई नीति के जरिए पूरी ट्रांसफर व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास किया है, जिससे रनिंग कर्मचारियों में भारी आक्रोश है. इस संवेदनशील मुद्दे पर जहां मान्यता प्राप्त यूनियन (SERMU) प्रबंधन के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखने में नाकाम दिख रही है वहीं प्रतिद्वंदी मेंस कांग्रेस (SERMC) ने बड़ा दांव खेल दिया है.
रेलवे मेंस कांग्रेस ने कर्मचारियों के आक्रोश को भुनाने की पूरी तैयारी कर ली है. इस योजना के तहत आनन-फानन में जरुली में एक बड़ी बैठक आयोजित की. कांग्रेस महासचिव शिवारंजन मिश्रा ने कर्मचारियों की मांगों का जोरदार समर्थन करते हुए नई नीति का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि पुरानी ट्रांसफर नीति कहीं अधिक व्यावहारिक, न्यायसंगत एवं कर्मचारी हितैषी थी.
एसआर मिश्रा ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि रेलवे मेंस कांग्रेस इस विषय को काफी गंभीरता से रेल प्रशासन के समक्ष उठाएगी. नई JPO में आवश्यक संशोधन कराने अथवा पुरानी न्यायसंगत व्यवस्था को बहाल कराने के लिए संगठन अपनी पूरी शक्ति लगा देगी.
हालांक रनिंग स्टाफ और सुपरवाइजरों के लिए जारी ट्रांसफर पॉलिसी (JPO) के असंतोष के बीच दोनों प्रमुख यूनियनों के बीच मुद्दे को अपने पाले में करने की राजनीतिक होड़ भी शुरू हो चुकी है.
हालांकि, रेलवे मेंस यूनियन (SERMU) ने नई पॉलिसी को लेकर अपना विरोध डीआरएम के सामने दर्ज कराया है. लेकिन दूसरी तरफ, चर्चा है कि मेंस यूनियन में चल रही अंदरूनी खींचतान और रनिंग ब्रांच के कुछ नेताओं पर ‘ठेकेदारी सिस्टम’ में लिप्त होने के लग रहे आरोपों के कारण आम रेलकर्मियों के बीच संगठन के प्रति असंतोष देखा जा रहा है.
सियासी हलकों में माना जा रहा है कि कर्मचारियों के इसी कथित अविश्वास का पूरा फायदा उठाने की तैयारी में मेंस कांग्रेस (SERMC) जुट गई है.
यह नई ट्रांसफर पॉलिसी (JPO) में क्या है
यह नई ट्रांसफर पॉलिसी मुख्य रूप से लोको रनिंग स्टाफ (जैसे- ALP, LPG, Sr. ALP) और सुपरवाइजरों के स्थानांतरण और पोस्टिंग को व्यवस्थित करने के लिए लागू की गई है. इसके तहत चक्रधरपुर मंडल के विभिन्न लॉबियों (जैसे- टाटा, आदित्यपुर, राउरकेला, बोंडामुंडा, जरुली, डीपीएस आदि) में कर्मचारियों की तैनाती के नियम तय किए गए हैं.
कर्मचारी इस पॉलिसी का विरोध क्यों कर रहे हैं ?
कठिन लॉक-इन और निवास अवधि (Lock-in & Residency Period) : नए नियमों के तहत नई भर्ती या प्रमोशन पाकर आए कर्मचारियों के लिए जरुली (JARULI), डीपीएस (DPS), झारसुगुड़ा (JSG) जैसी लॉबियों में 2 साल का लॉक-इन और उसके बाद 3 साल की न्यूनतम निवास अवधि (कुल 5 वर्ष) अनिवार्य कर दी गई है. हालांकि इसमें सीनियरिटी लागू रहेगी. यह व्यवस्था पूर्व के JPO में भी प्रभावी थी.
सीनियरिटी का नुकसान : कर्मचारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से उनके गृह स्टेशनों पर लौटने की राह बेहद लंबी और मुश्किल हो जाएगी. इससे उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर बुरा असर पड़ेगा.
पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग : जरुली और डीपीएस जैसी लॉबियों में 200 से अधिक कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर इस नई नीति को तुरंत वापस लेने और पुरानी पारदर्शी व्यवस्था को बहाल करने की मांग की है.
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