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CKP DIVISION : रनिंग स्टाफ की नई ट्रांसफर पॉलिसी पर क्यों मचा है बवाल? जानें वो 9 कड़े नियम जिन्होंने बढ़ाई रेलकर्मियों की टेंशन

प्रतीकात्मक

लोको रनिंग स्टाफ और सुपरवाइजरों के लिए जारी JPO ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर हंगामा बरपा हुआ है. जानिए इस नई नीति के उन तकनीकी और कड़े नियमों के बारे में, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है.

CHAKRADHARPUR. दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर (CKP DIVISION ) मंडल में लोको रनिंग स्टाफ (LPG, Sr. ALP और ALP) के लिए घोषित की गई नई ट्रांसफर पॉलिसी इस समय विवादों के केंद्र में है.

रेल प्रशासन जहां इसे पूरी तरह डिजिटल (HRMS) और पारदर्शी बनाने का दावा कर रहा है, वहीं रनिंग कर्मचारी इस नीति के कड़े प्रावधानों को अपनी ‘घेराबंदी’ और मनमानी मान रहे हैं.

इस नई पॉलिसी में आखिर ऐसा क्या है जिसे लेकर यूनियनों में सियासी घमासान छिड़ गया है और कर्मचारी गेट मीटिंग पर उतरने को मजबूर हैं ?

आसान भाषा में समझते हैं इस नई ट्रांसफर नीति के वो सभी मुख्य बिंदु  जिसमें 2 से 5 साल तक के कड़े लॉक-इन और रेजिडेंसी पीरियड से लेकर डीआरएम की विशेष शक्तियों तक का पूरा लेखा-जोखा शामिल है.

1. Initial Combined Priority List Prior to Migration to HRMS (HRMS पर ट्रांसफर होने से पहले की शुरुआती कंबाइंड प्रायोरिटी लिस्ट)

मैनुअल विकल्पों का एकीकरण: HRMS पोर्टल पर माइग्रेशन (स्थानांतरण) से पहले, जिन कर्मचारियों ने पहले से ही मैन्युअल रूप से इंट्रा-डिवीजनल ट्रांसफर (मंडल के भीतर ट्रांसफर) के लिए तीन पसंदीदा स्टेशनों के विकल्प दिए थे, उनकी एक संयुक्त प्राथमिकता सूची (Combined Priority List) तैयार की जाएगी.

प्राथमिकता तय करने के नियम: इस कंबाइंड लिस्ट को बनाने के लिए दो मुख्य आधार तय किए गए हैं: डिवीजनल पैनल सिनियोरिटी (मंडल पैनल वरिष्ठता): कर्मचारी की पैनल में क्या सिनियोरिटी है.

आवेदन की तारीख: वर्तमान ग्रेड में आवेदन करने की तारीख क्या थी.

ड्राफ्ट लिस्ट का प्रकाशन: सभी लॉबी के रनिंग स्टाफ और सुपरवाइजरों से 3 पसंदीदा विकल्प लेकर एक पदवार (Designation-wise) ड्राफ्ट कंबाइंड प्रायोरिटी लिस्ट बनाई गई है और इसे प्रकाशित कर दिया गया है.

CKP DIVISION : नई ट्रांसफर पॉलिसी में प्रबंधन की ‘मनमानी’ से रनिंग स्टाफ में आक्रोश, बैकफुट पर SERMU, मुद्दा भुनाने मैदान में उतरी SERMC

2. Final Priority List and HRMS (अंतिम प्राथमिकता सूची और एचआरएमएस)

सुधार और फाइनल लिस्ट: ड्राफ्ट लिस्ट में यदि कोई सुधार (Corrections) होंगे, तो उन्हें ठीक करने के बाद फाइनल प्रायोरिटी लिस्ट प्रकाशित की जाएगी. इसके बाद इसे HRMS Station Transfer Module पर अपलोड कर दिया जाएगा.

सिर्फ HRMS से ट्रांसफर: भविष्य में होने वाले सभी स्टेशन ट्रांसफर अनिवार्य रूप से केवल HRMS के माध्यम से ही प्रोसेस किए जाएंगे. इसके लागू होने के बाद किसी भी तरह के मैन्युअल ट्रांसफर आवेदनों (कागजी आवेदनों) पर विचार नहीं किया जाएगा.

तारीख और समय के आधार पर प्राथमिकता: पुराने डेटा के HRMS सिस्टम में माइग्रेट हो जाने के बाद, भविष्य में आने वाले सभी नए ट्रांसफर आवेदनों की प्राथमिकता आवेदन करने की तारीख और समय (Date and Time of Application) के आधार पर (पदवार) तय की जाएगी.

3. RRB/GDCE/LDCE/DPQ Panel Candidates (नवनियुक्त/पदोन्नत उम्मीदवारों के लिए नियम)

अनिवार्य पोस्टिंग वाली लॉबियां: विभिन्न परीक्षाओं या कोटे (जैसे RRB, GDCE, LDCE या DPQ) के माध्यम से पैनल में आए नए कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से केवल JSG/MFSJ, BSPX, JRLI और DPS लॉबियों में ही तैनात (Post) किया जाएगा.

विशेष परिस्थिति में छूट: केवल विशेष परिस्थितियों में या प्रशासनिक हित में, DRM (डिवीजनल रेलवे मैनेजर) की पूर्व स्वीकृति (Prior Approval) के बाद ही इन उम्मीदवारों को Main Line (मुख्य लाइन) की लॉबियों में पोस्टिंग दी जा सकती है.

लॉक-इन पीरियड (Lock-in Period): ऐसे सभी उम्मीदवारों के लिए आवंटित की गई लॉबी में जॉइन करने की तारीख से न्यूनतम 2 वर्ष (Minimum of two years) का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड रहेगा. यानी, 2 साल से पहले उनका ट्रांसफर वहां से कहीं और नहीं हो सकेगा.

4. Posting on Promotion/Drafting (पदोन्नति या ड्राफ्टिंग के समय पोस्टिंग के नियम)

अनिवार्य पोस्टिंग वाली लॉबियां: जब किसी कर्मचारी का प्रमोशन LPG (Goods Train Driver / Loco Pilot Goods) के पद पर होगा, तो उन्हें अनिवार्य रूप से केवल इन 5 निर्दिष्ट लॉबियों में ही तैनात (Post) किया जाएगा:

  • JSG/MFSJ (झारसुगुड़ा/सरडेगा)
  • BSPX (बांसपानी)
  • JRLI (जुरुली)
  • DPS (डोंगापोषी)

लॉबी तय करने का आधार: कर्मचारी को इन 5 अनिवार्य लॉबियों में से कौन सी लॉबी मिलेगी, इसका फैसला दो चीजों को मिलाकर किया जाएगा:
पैनल सिनियोरिटी (Panel Seniority): पैनल में कर्मचारी की वरिष्ठता क्या है.

कर्मचारी की पसंद (Choices): कर्मचारी द्वारा दिए गए पसंदीदा विकल्प.

विकल्प जमा करने की समय-सीमा: प्रमोशन पैनल जारी होने के 7 दिनों के भीतर कर्मचारियों को इन 5 अनिवार्य लॉबियों में से अपनी पसंद के 3 विकल्प सीधे SrDEE/Op कार्यालय में जमा करने होंगे, जिसकी एक कॉपी SrDPO कार्यालय को भी देनी होगी.

विकल्प न देने पर परिणाम: यदि कोई कर्मचारी निर्धारित 7 दिनों के भीतर अपनी पसंद का विकल्प जमा नहीं करता है, तो यह मान लिया जाएगा कि उसकी कोई विशेष पसंद नहीं है (Nil option), और प्रशासन अपने स्तर पर उसे किसी भी लॉबी में पोस्ट कर देगा.

5. Intra-division transfer (मंडल के भीतर स्थानांतरण के नियम) इस बिंदु को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:

(i) लॉक-इन पीरियड और ट्रांसफर की शर्तें:

2 साल का लॉक-इन पीरियड: ऐसे सभी LPG (Loco Pilot Goods), Sr.ALP और ALP जिनकी पहली पोस्टिंग हुई है और वे अपना 2 वर्ष का न्यूनतम लॉक-इन पीरियड पूरा करने वाले हैं, उन्हें HRMS पोर्टल के माध्यम से अपनी पसंद की लॉबी के लिए आवेदन करना होगा.

प्रतिबंधित लॉबियां (शुरुआती ट्रांसफर के लिए): पहली पोस्टिंग के बाद (2 साल पूरे होने पर) जब वे ट्रांसफर के लिए आवेदन करेंगे, तो वे टाटा (TATA), आदित्यपुर (ADTP), राउरकेला (ROU) और बोंडामुंडा (BNDM) लॉबियों को छोड़कर अन्य लॉबियों के लिए विकल्प चुन सकते हैं. इन 4 मुख्य लॉबियों को छोड़कर अन्य जगह ट्रांसफर उनकी पसंद या प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर किया जाएगा.

3 साल का रेजिडेंसी पीरियड (Residency Period): ऊपर बताई गई अन्य लॉबियों में ट्रांसफर होने के बाद, कर्मचारियों को वहां न्यूनतम 3 वर्ष की सेवा (Residency Period) पूरी करनी होगी.

कुल 5 वर्ष की सेवा की शर्त: इसका मतलब यह है कि LPG पद पर प्रमोशन होने के बाद या ALP के रूप में पहली पोस्टिंग के बाद कुल 5 वर्ष की सेवा पूरी करने से पहले, कोई भी कर्मचारी टाटा (TATA), आदित्यपुर (ADTP), राउरकेला (ROU) और बोंडामुंडा (BNDM) लॉबियों में ट्रांसफर के लिए HRMS पर दोबारा आवेदन नहीं कर सकता. इन मुख्य लॉबियों में जाने के लिए कुल 5 साल (2 साल शुरुआती लॉक-इन + 3 साल अन्य लॉबी में) का समय बिताना अनिवार्य है.

(ii) प्रशासन का विशेष अधिकार (Right of Administration):

2 या 3 साल से पहले ट्रांसफर का अधिकार: प्रशासनिक अनिवार्यताओं या आपातकालीन आवश्यकताओं (Administrative Exigencies) को देखते हुए, रेल प्रशासन के पास यह अधिकार सुरक्षित रहेगा कि वह किसी भी LPG, Sr.ALP या ALP को उनका 2 साल का लॉक-इन पीरियड या 3 साल का रेजिडेंसी पीरियड पूरा होने से पहले भी JSG/MFSJ, BSPX, JRLI और DPS लॉबियों से हटाकर TATA / ADTP / ROU / BNDM लॉबियों में पोस्ट या ट्रांसफर कर सकता है.

6. Lock-in Period (शुरुआती लॉक-इन पीरियड)

न्यूनतम 2 वर्ष की सेवा: नई भर्ती (New Recruitment) के बाद पहली पोस्टिंग पाने वाले कर्मचारियों या LPG (Loco Pilot Goods) पद पर प्रमोट होने वाले कर्मचारियों के लिए लॉक-इन पीरियड लागू होगा.

शुरुआत: यह अवधि आवंटित की गई लॉबी में ड्यूटी जॉइन करने की तारीख (Date of Joining) से गिनी जाएगी. नियम: इस 2 वर्ष की अनिवार्य अवधि के दौरान कर्मचारी का तबादला उस लॉबी से कहीं और नहीं किया जा सकेगा.

7. Minimum Residency Period (न्यूनतम रेजिडेंसी पीरियड)

3 वर्ष की सेवा: बिंदु संख्या 5(i) के अनुसार, जब कोई कर्मचारी अपना 2 साल का शुरुआती लॉक-इन पीरियड पूरा करके किसी दूसरी लॉबी में ट्रांसफर लेता है, तो उसे उस नई लॉबी में कम से कम 3 वर्ष का समय बिताना होगा.

पात्रता की शर्त: यह 3 साल की अवधि टाटा (TATA), आदित्यपुर (ADTP), राउरकेला (ROU) और बोंडामुंडा (BNDM) लॉबियों को छोड़कर अन्य लॉबियों में बितानी होगी. इस 3 वर्ष की अवधि को पूरा करने के बाद ही कोई कर्मचारी इन चार मुख्य लॉबियों (TATA/ADTP/ROU/BNDM) में जाने के लिए पात्र (Eligible) माना जाएगा.

8. On request transfers of all other Loco Running Staff (अन्य लोको रनिंग स्टाफ के अनुरोध पर ट्रांसफर)

कुल 5 वर्ष की सेवा की अनिवार्यता: वे सभी लोको रनिंग स्टाफ जो सीधी भर्ती या LPG प्रमोशन पैनल के तहत तुरंत नहीं आए हैं (यानी पुराने/अन्य स्टाफ), यदि वे टाटा (TATA), आदित्यपुर (ADTP), राउरकेला (ROU) और बोंडामुंडा (BNDM) जैसी मुख्य लॉबियों में ट्रांसफर (On Request) चाहते हैं, तो उनके लिए एक विशेष शर्त है.

नियम: वर्तमान ग्रेड (Present Grade) में इन मुख्य लॉबियों को छोड़कर अन्य लॉबियों में उनकी कुल पोस्टिंग कम से कम 5 वर्ष (5 Years Total Posting) की होनी चाहिए.

सत्यापन: ट्रांसफर करने से पहले कार्मिक शाखा (Personnel Branch) द्वारा इस 5 साल की अवधि के रिकॉर्ड की पूरी जांच की जाएगी और इसे प्रमाणित (Certified) किया जाएगा.

9. DRM’s Special Powers (डीआरएम के विशेष अधिकार)

विशेष परिस्थितियों में छूट: यदि किसी कर्मचारी की कोई अत्यंत गंभीर या आपातकालीन व्यक्तिगत परिस्थिति (Pressing Personal Circumstances) है, तो DRM (Divisional Railway Manager) उस पर विचार कर सकते हैं.

आउट-ऑफ़-टर्न ट्रांसफर: DRM के पास यह विशेष अधिकार है कि वे केस-टू-केस (मामले की गंभीरता को देखते हुए) आधार पर नियमों को शिथिल (Dilute) कर सकते हैं. वे कर्मचारी को लॉक-इन पीरियड (2 साल) या न्यूनतम रेजिडेंसी पीरियड (3 साल) पूरा होने से पहले भी आउट-ऑफ़-टर्न (बारी से पहले) ट्रांसफर की मंजूरी दे सकते हैं.

महत्वपूर्ण सूचना : रेलहंट का हमेशा यह प्रयास रहता है कि सटीक और तथ्यात्मक जानकारी ही सामने आए. इस JPO नीति को डिकोड करने में पूरी सतर्कता बरती गई है, लेकिन यदि इसमें कोई त्रुटि रह गई हो, तो आप हमारे व्हाट्सएप नंबर 9905460502 पर प्रमाण के साथ अपना पक्ष भेज सकते हैं. उसे पूरे सम्मान के साथ अपडेट किया जाएगा.

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