- दबंगों ने टिकट लेकर चल रहे दारोगा दंपति को पीटा, मूकदर्शक बना रहा सिस्टम, इंजन के आगे खड़ी हुईं महिला सब-इंस्पेक्टर
Nawada. भारतीय रेलवे दावों के कागजों पर चाहे जितनी रफ्तार भर ले, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है. गया-हावड़ा एक्सप्रेस में आरक्षित (कन्फर्म) टिकट होने के बावजूद झारखंड पुलिस की महिला सब-इंस्पेक्टर, उनके पति और मासूम बच्चे को दबंगों ने सिर्फ इसलिए बेरहमी से पीट दिया क्योंकि उन्होंने अपनी सीट खाली करने को कहा था.
रेलवे ने हाल ही में नया जुर्माना कानून लागू कर अपनी पीठ थपथपाई थी, लेकिन इस खौफनाक वारदात ने साफ कर दिया है कि रसीद काटने में फुर्ती दिखाने वाला रेल प्रशासन, गुंडों के आगे आज भी पूरी तरह बौना और लाचार नजर आता है.
आलम यह कि रेलवे में आरक्षित (Reserved) टिकट होने के बावजूद आम यात्री तो दूर, खुद खाकी वर्दी धारक भी सुरक्षित नहीं हैं. गया-हावड़ा एक्सप्रेस में सीट पर अवैध कब्जे और दबंगई का एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी (GRP) और रेल प्रशासन की मुस्तैदी के दावों की पोल खोल दी है.
ट्रेन में कुछ हुड़दंगियों ने अपनी ड्यूटी पर लौट रहीं झारखंड पुलिस की महिला सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) पूजा कुमारी, उनके पति और उनके छोटे बच्चे के साथ न सिर्फ बदसलूकी की, बल्कि उनके साथ जमकर मारपीट भी की.
रेलवे प्रशासन की संवेदनहीनता का आलम यह रहा कि घटना के बाद भी कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आक्रोशित होकर पीड़ित महिला दारोगा को न्याय के लिए ट्रेन के इंजन के सामने खड़ा होना पड़ा.
पूरा मामला: आरक्षित सीट पर जबरन कब्जे का विरोध करने पर हमला
झारखंड के साहिबगंज जिले के बरहरवा थाना में पदस्थापित महिला दारोगा पूजा कुमारी को 6 जुलाई को अपनी ड्यूटी ज्वाइन करनी थी. वह अपने पति हरिओम कुमार (जो खुद झारखंड पुलिस की स्पेशल ब्रांच में सब-इंस्पेक्टर हैं) और अपने छोटे बच्चे के साथ गया-हावड़ा एक्सप्रेस से लौट रही थीं. इस दारोगा दंपति के पास सफर के लिए बकायदा कन्फर्म आरक्षित टिकट था.
जैसे ही ट्रेन नवादा स्टेशन के पास पहुंची, कुछ स्थानीय हुड़दंगई युवक उनकी आरक्षित सीट पर आकर जबरन बैठ गए. जब पूजा कुमारी और उनके पति ने शालीनता से उन्हें अपनी सीट खाली करने को कहा और अपना टिकट दिखाया, तो युवक गाली-गलौज और बहस करने लगे.
विवाद बढ़ता देख इन हुड़दंगियों ने अपने कुछ और साथियों को बुला लिया और पूरी तरह से गुंडागर्दी पर उतारू हो गए. उन्होंने दारोगा दंपति और उनके मासूम बच्चे पर हमला कर दिया और उनके साथ मारपीट की, जिससे पूरी बोगी में अफरा-तफरी मच गई.
रेलवे की बड़ी लापरवाही, TTE भी निशाने पर, परिचय देने के बाद जागी रेल पुलिस
इस पूरी घटना में रेलवे की सबसे बड़ी और शर्मनाक लापरवाही तब उजागर हुई, जब पीड़ित परिवार ने चलती ट्रेन में ही TTE को पूरी बात बतायी और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की. आरोप है कि TTE आरोपी युवक के साथ मुस्कुराते हुए आगे चले गये. बाद में युवकों ने अन्य लोगों को बुलाकर मारपीट की. इसकी सूचना आरपीएफ और जीआरपी को सूचना दी. महिला दारोगा का आरोप है कि शुरुआती तौर पर रेल पुलिसकर्मियों ने इस गंभीर मामले को पूरी तरह नजरअंदाज किया और टालमटोल करते रहे.
हद तो तब हो गई जब पुलिसकर्मियों ने तब तक कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया, जब तक कि पीड़ित दंपति ने खुद को झारखंड पुलिस का सब-इंस्पेक्टर नहीं बताया. खाकी का परिचय मिलने के बाद ही आरपीएफ और जीआरपी के अधिकारी हरकत में आए. यह रवैया साफ दर्शाता है कि भारतीय रेल में आम यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है.
सिस्टम के खिलाफ आक्रोश, इंजन के आगे खड़ी हुईं महिला दारोगा
रेल पुलिस के टालमटोल वाले रवैये और अपनी सुरक्षा के साथ हुए इस खिलवाड़ से नाराज होकर महिला दारोगा पूजा कुमारी काशीचक स्टेशन पर ट्रेन से उतर गईं और सीधे ट्रेन के इंजन के सामने खड़ी होकर विरोध जताने लगीं.

एक पीड़ित महिला और पुलिस अधिकारी का यह रौद्र रूप देखकर रेलवे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. महिला दारोगा के इस कड़े विरोध के कारण गया-हावड़ा एक्सप्रेस करीब एक घंटे तक काशीचक स्टेशन पर ही खड़ी रही.
आखिरकार, जब रेल पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों ने लिखित शिकायत पर त्वरित और सख्त कार्रवाई का ठोस भरोसा दिया, तब जाकर ट्रेन आगे रवाना हो सकी.
मुख्य आरोपी काशीचक निवासी विमलेश कुमार!
इस मामले में महिला दारोगा पूजा कुमारी ने जीआरपी थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है. स्थानीय लोगों की मदद से मुख्य आरोपी की पहचान काशीचक क्षेत्र के रहने वाले विमलेश कुमार के रूप में हुई है, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया था.
जीआरपी और आरपीएफ अब सीसीटीवी फुटेज और सह-यात्रियों के बयानों के आधार पर मामले की जांच और आरोपियों की धरपकड़ में जुटी है. लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ट्रेनों में अवैध रूप से सफर करने वाले तत्वों पर लगाम कसने में रेलवे पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है.
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