- झारसुगुड़ा निरीक्षण को पहुंचे जीएम अनिल कुमार मिश्रा के सामने फूटा ट्रेन मैनेजरों का गुस्सा
- रेलवे मेंस कांग्रेस के नेता रहे मुखर, जीएम ने मेडिकल सुविधा पेपरलेस करने का दिया आश्वासन
JHARSUGUDA. चक्रधरपुर डिवीजन के ट्रेन मैनेजर तरुण केरकेट्टा की ऑन ड्यूटी मौत को लेकर आक्रोशित सहयोगियों ने गुरुवार को रेलवे की स्वास्थ्य व्यवस्था को सवालों में खड़ा किया है. ट्रेन चालकों ने साफ कहा कि तरुण केरकेट्टा की मौत इलाज और मेडिकल व्यवस्था की लापरवाही का नतीजा है. उन्हें न तो समय पर ईलाज में न ही बेहतर इलाज के लिए जरूरी कदम उठाये गये. पेपर वर्क के नाम पर उनकी जान चली गयी. ऐसे में इस मौत के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.
झारसुगुड़ा के GM यार्ड में निरीक्षण को पहुंचे दक्षिण पूर्व रेलवे के जीएम अनिल कुमार मिश्रा के सामने ट्रेन मैरेजरों का आक्रोश फूटा. उन्होंने रेलवे की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को सवालों में खड़ा किया और कहा कि पेपर वर्क के नाम पर एक रेलकर्मी की जान चली गयी. ट्रेन मैरेजरों का कहना था कि तरुण केरकेट्टा ने तबीयत खराब होने की बात कंट्रोल की बतायी थी लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया. जिसका नतीजा उसकी जान चली गयी. एक परिवार मुखिया विहीन हो गया.
झारसुगुड़ा यार्ड का पैदल जीएम ने किया निरीक्षण, होना है एनआई वर्क
झारसुगुड़ा यार्ड में 20 लाइन बनकर तैयार है इसका एनआई वर्क कराया जाना है. इसी के इंस्पेक्शन के लिए जीएम यहां आये थे. चक्रधरपुर डीआरएम तरुण हुरिया व ब्रांच अधिकारियों के साथ जीएम ने यार्ड का निरीक्षण किया. जीएम मेन यार्ड से पैदल ही रिलीफ यार्ड तक गये. इस दौरान कार्यों की जांच की. दोनों यार्ड के बीच बन रहे ओवरब्रिज और चौकीपाड़ा में ओवरब्रिज की जीएम ने जांच की.

इसके बाद ऑफिशियल रेस्ट हाउस, रेलवे कॉलोनी, स्टेशन परिसर, रिलीफ यार्ड की लाइन की जांच की. महाप्रबंधक का यह inspection रेलवे के डेवलपमेंट के पॉइंट ऑफ व्यू से काफी अहम रहा. इस दौरान ब्रांच व जोनल अधिकारी मौजूद रहे.
अगर समय रहते इलाज मिलता तो बच जाती तरुण केरकेट्टा की जान
रेलवे मेंस कांग्रेस के पदाधिकारियों ने ट्रेन मैनेजर तरुण केरकेट्टा की मौत को पूरी तरह लापरवाही करार दिया है. मेंस कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यदि डॉक्टर समय रहते और ट्रीटमेंट के लिए अच्छे हॉस्पिटल में तरुण को भेज दिया जाता तो उनकी जान बचायी जा सकती थी. समय पर इलाज मिलने से आज एक रेल कर्मचारी हमारे बीच मौजूद होता. रेलवे मेंस कांग्रेस के नेताओं इस मामले को लापरवाही करार देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की और महाप्रबंधक के सामने पुरजोर तरीके से रखा.


















































































