- 2 साल की ट्रेनिंग की जगह 15 दिन का प्रशिक्षण देकर प्राइवेट कंपनी सौंप ट्रैक मशीन संचालन कार्य
- ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) पर वार्ता प्रगति पर है, पुरानी सुविधाएं धीरे-धीरे स्वीकार कर ली जाएंगी
Lucknow. एआईआरएफ के 101वें महाधिवेशन और नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के 77वें अधिवेशन में रेलवे में निजीकरण, खाली पद और कर्मचारियों की समस्याओं का मुद्दा छाया रहा. ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेडियम में सोमवार से शुरू हुए महाधिवेशन में कहा कि रेलवे की सुरक्षा और कर्मचारियों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा.
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शिवगोपाल मिश्रा ने निजीकरण को रेल सुरक्षा पर खतरा बताते हुए कहा कि सरकार बैकडोर से रेलवे में निजीकरण और आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दे रही है, जो रेलवे की सुरक्षा के लिए गंभीर है. उन्होंने कहा, प्राइवेट और आउटसोर्स कर्मचारियों से काम चलाने की नीति हमें मंजूर नहीं. किसी कीमत पर हम निजीकरण नहीं होने देंगे. खाली पदों को भरना ही होगा.

अधिवेशन में एकजुटता जताते यूनियन नेता
उदाहरण के साथ मिश्रा ने कहा कि ट्रैक मशीन संचालन में 2 साल की ट्रेनिंग से कोई कर्मचारी ट्रेंड होता जबकि 15 दिन की ट्रेनिंग देकर प्राइवेट कंपनी यह जिम्मेदारी सौंप दे रही है. उन्होंने कर्मचारियों पर बढ़ते कार्य दबाव की बात भी कही. बताया कि रेलवे में करीब 2 लाख वैकेंसी खाली है जबकि भर्ती के नाम पर सिर्फ 22,000 पदों की अधिसूचना निकाली गई है. सरकार लगातार कटौती कर रही है. एक लाख वैकेंसी होती है, तो 20 हजार ही भरे जाते हैं. 20,000 भर्ती होंगे और 40,000 रिटायर हो जाएंगे, तो रेल कैसे चलेगी?
ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) पर शिवगाेपाल मिश्रा ने कहा कि उनकी वार्ता प्रगति पर है और पुरानी सुविधाएं धीरे-धीरे स्वीकार कर ली जाएंगी.
अधिवेशन में इन मामलों पर हुआ गंभीरता से मंथन
- निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक.
- रनिंग स्टाफ को 25% माइलेज बहाल करना (फाइल फाइनेंस मिनिस्ट्री में लटकी).
- त्रिपाठी कमेटी रिपोर्ट लागू करना.
- कर्मचारियों के लिए आवास सुविधा और मकान तोड़े जाने पर रोक.
- आठवां वेतन आयोग समय पर रिपोर्ट सौंपे.
- कैडर रिस्ट्रक्चरिंग, प्रमोशन और ट्रैकमैन, पॉइंट्समैन, टेक्नीशियन को बेहतर ग्रेड पे.
अधिवेशन में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों का लाभ समय से रेल कर्मचारियों एवं पेंशनरों को देने और टर्म आफ रेफरेंस की क्लाज-3 को लेकर पेंशनरों में आशंका को दूर करने के लिए भी चर्चा हुई. रेलवे में लंबे समय से गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों का कैडर पुनर्गठन रुका हुआ है इससे संरक्षा, रनिंग, ट्रैक मेंटेनर्स , प्वाइंट्समैन, टेक्नीशियन व सुपरवाइजर्स समेत सभी कोटियों के कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं. अधिवेशन में इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग उठाए जाने की बात कही.

रेलकर्मियों के मुद्दों पर आपस में चर्चा करते शिवगोपाल मिश्रा
अधिवेशन में रेलवे में बड़ी संख्या में रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग की गई. यहीं नहीं रेलवे में बढ़ रहे निजीकरण और आउटसोर्सिंग को रोकने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. लोको पायलटों, रनिंग स्टाफ व अन्य संवर्ग के कर्मचारियों के तय मानकों से अधिक कार्य के घंटों को कम करने का मुद्दा भी उठाया गया. महिला कर्मचारियों की समस्याओं से जुड़े प्रस्तावों पर फेडरेशन की महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारियों ने चर्चा की. दो दिन के इस अधिवेशन में देश भर से रेलवे यूनियनों के नेता और रेलकर्मी शामिल हो रहे हैं.















































































