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Chakradharpur Division : ऑपरेटिंग कंट्रोल में डक्ट एसी इंस्टॉलेशन में बड़ा खेल, मानकों को दरकिनार कर ठेकेदार-इंजीनियरों ने काटा ‘मुनाफा’!

  • रेलवे मानकों को ताक पर रख लगाया गया डक्ट एसी, लोहे के सामान्य ढांचे पर टिका दी लाखों की ‘सुरक्षा’
  • गैल्वेनाइज्ड को छोड़ ‘कबाड़’ स्ट्रक्चर पर टांग दिए उपकरण, संरक्षा से बड़ी चूक और दुर्घटना को न्योता
  • करोड़ों डकराने के बाद भी नहीं सुधरा इलेक्ट्रिकल विभाग, अब एसी के नाम पर लाखों डुबाने की तैयारी

चक्रधरपुर. रेलवे में अभियंता और ठेकेदार के बीच का गठजोड़ कितना मजबूत है इसका उदाहरण चक्रधरपुर रेलमंडल मुख्यालय में डक्ट एसी इंस्टॉलेशन में देखा जा सकता है. डिवीजन का इलेक्ट्रिकल विभाग अपनी पुरानी गलतियों से भी सीख लेने को तैयार नहीं दिखता. क्योंकि विभाग पांच साल पहले रेलकर्मियों की सुविधा के नाम पर “डक्ट एयर कूलर” सिस्टम लगाकर करोड़ों रुपये बर्बाद कर चुका है, जिसका उपयोग रेलकमिर्यों  के लिए एक दिन भी नहीं हो सका था.

एक बार फिर चक्रधरपुर मंडल के सबसे संवेदनशील ‘ऑपरेटिंग कंट्रोल कार्यालय’ में लाखों रुपये पानी में बहाने की तैयारी चल रही है. मामला डक्ट एसी (Duct AC) इंस्टॉलेशन का है. यहां रेलवे मानकों और सुरक्षा गाइडलाइंस को दरकिनार कर ठेकेदार को फायदा पहुंचाने का खेल हो रहा. दिलचस्प बात यह है कि बेहद संवेदनशील उपकरणों को जिस स्ट्रक्चर पर लगाया जा रहा है, वह पूरी तरह नियमों के विपरीत है. क्योंकि टेंडर की शर्त में यह स्पष्ट है कि  (Duct AC) इंस्टॉलेशन में सभी तरह के MS आइटम गैल्वेनाइज्ड होंगे लेकिन यहां सामान्य लोहे के स्ट्रक्चर पर स्टॉल कर दिया गया है.

लगाये गये उपकरणों के गुणवत्ता की जांच की होने लगी मांग

दरअसल, डिवीजन स्टोर विभाग की ओर से इलेक्ट्रिकल जनरल की अनुशंसा पर चक्रधरपुर डिवीजनल ऑपरेटिंग कंट्रोल कार्यालय को वातानुकूलित करने के लिए 12-12 एसी के लिए दो अलग-अलग टेंडर निकाले गये था. TENDER NO. IF255970 और IF255971C  के तहत यहां (Duct AC) इंस्टॉल किया जाना था जिसके लिए कई मानक तय किये गये थे. सूत्रों की माने तो (Duct AC) इंस्टॉलेशन के दौरान कई सुरक्षा मानकों का पालन एजेंसी की ओर से किया ही नहीं गया. निम्न स्तरीय गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल करने से सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी सामने आ सकती है.

(Duct AC) इंस्टॉलेशन में 22 SWG और 24 SWG के मेटल सीट का उपयोग उपकरणों को स्थापित करने के लिए करना है. इसके अलावा थर्मल Insulation, Acoustic Insulation, Canvas Connection, Aluminium powder coated Air Diffusers, Volume Control Damper & Collar Damper, PVC drain piping with Nitrile Insulation की गुणवत्ता निर्धारण की शर्त भी अहम है.

लेकिन, ऑपरेटिंग कंट्रोल कार्यालय में एसी स्टॉलेशन में काफी निम्न स्तरीय सामानों का उपयोग किया गया है तो Acoustic Insulation  जैसे अहम कार्य कराये ही नहीं गये हैं. सूत्रों की माने तो ऑपरेटिंग कंट्रोल जैसे अति-संवेदनशील कार्यालय में डक्ट एसी के थर्मल और एकुस्टिक इंसुलेशन में लापरवाही बरती जा रही है. तय मानकों के विपरीत कम मोटाई और निम्न स्तर की इंसुलेशन सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे भविष्य में न सिर्फ कूलिंग प्रभावित होगी बल्कि कंडेनसेशन (पानी टपकने) के कारण रेलकर्मियों के लिए बड़ी परेशानी भी बन सकती है.

स्टॉलेशन की मनमानी प्रक्रिया को देखकर यह अनुमान लगाना सहज हो गया है कि एसी उपकरणों की जांच भी किस तरह की गयी होगी. हालांकि इसके लिए थर्ड पार्टी इंस्पेशन की अहम शर्त थी लेकिन उसका कहां तक अनुपालन सुनिश्चित किया गया है यह जांच का विषय बन गया है. बहरहाल, डीआरएम को इस मामले में संज्ञान लेकर इंस्टॉलेशन में सामानों की गुणवत्ता की जांच करायी जानी चाहिए , ताकि रेलकर्मियों की सुविधा के लिए लगाये जाने वाले “डक्ट एसी” का हाल “डक्ट एयर कूलर” वाला नहीं हो जाये.

टेंडर की शर्तें 

इस मामले में रेलवे सुरक्षा और कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डीआरएम (DRM) से पूरे इंस्टॉलेशन और सामानों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की गई है.

रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.

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