- रेलकर्मियों के पारिवारिक दस्तावेजों के दोबारा सत्यापन पर उठे सवाल, Sr DPO के आदेश से भारी आक्रोश
- कार्मिक के नियम को रेलकर्मियों ने बताया अव्यावहारिक, दशकों पुराने विवाह प्रमाण-पत्र मांगने पर विवाद
- बड़ा सवाल – क्या Sr DPO, APO और कार्मिक के कर्मचारियाें ने कराया अपने विवाह प्रमाण-पत्र का सत्यापन
PATNA. रेलवे के कर्मिक विभाग (Personnel Department) का काम तो कल्याण और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना है लेकिन पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के सोनपुर रेल मंडल में नजारा उलटा है. यहां ‘कल्याण’ के नाम पर कर्मचारियों का मानसिक और प्रशासनिक उत्पीड़न हो रहा. वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी (Sr DPO) के एक अव्यावहारिक फरमान से सालों से डिवीजन में काम कर रहे रेलकर्मी बेदम हैं. दस्तावेज सत्यापन के नाम पर दशकों पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड और मैरिज सर्टिफिकेट की मांग की जा रही है. जिसने कर्मचारियों के बीच भारी आक्रोश है. रेलकर्मी इसे ‘मानसिक दोहन’ मान रहे.
कई ऐसे कर्मचारी हैं जिनके पिता की मृत्यु उनकी नियुक्ति से पूर्व ही हो चुकी थी तथा जिनका विवाह नौकरी प्राप्त करने से पहले अथवा नौकरी मिलने के कुछ वर्षों बाद हुआ. नियुक्ति के समय उनके द्वारा प्रस्तुत घोषणापत्र, उपलब्ध प्रमाण-पत्रों तथा विभागीय सत्यापन के आधार पर उनके परिवार के सदस्यों एवं आश्रितों के नाम सेवा अभिलेखों में दर्ज किए गए थे. वर्षों तक इन्हीं अभिलेखों के आधार पर विभागीय कार्य संपादित होते रहे, फिर भी आज उन्हीं अभिलेखों को संदेह की दृष्टि से देखकर पुनः दस्तावेजों की मांग की जा रही है.
दुखद आश्चर्य की बात यह है कि आधार कार्ड की प्रति अपलोड होने के बावजूद केवल तकनीकी एवं तर्कहीन कारण बताकर आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं. कहा जा रहा है कि जो दस्तावेज अपलोड किया गया वह विस्तृत नहीं बल्कि छोटे फॉर्म में होना चाहिए था. रेलकर्मियों का सवाल है कि दस्तावेज की सत्यता महत्वपूर्ण है अथवा उसे एक पृष्ठ में है अथवा दो पृष्ठ में अपलोड करना?
अब रेलकर्मी बड़ा सवाल यह उठा रहे है कि उनसे जो मांगा की जा रही है क्या वही प्रमाणपत्र कार्मिक विभाग के अधिकारी और कर्मचारी प्रस्तुत कर सकते हैं? क्या वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी, सहायक कार्मिक अधिकारी एवं संबंधित कार्मिक कर्मचारियों ने स्वयं के विवाह प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किये है? रेलकर्मियों का कहना है कि पूर्व के वर्षों में विवाह पंजीकरण की व्यवस्था आज की तरह व्यापक रूप से प्रचलित नहीं थी. अधिकांश विवाह सामाजिक एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न होते थे तथा विवाह प्रमाण-पत्र बनवाने की परंपरा सामान्य नहीं थी. ऐसी स्थिति में दशकों पुराने मामलों में विवाह प्रमाण-पत्र की मांग करना न तो व्यवहारिक है और न ही न्यायसंगत.
सीनियर डीपीओ के नये फरमान पर रेलकर्मियाें का कहना है कि डिजिटल इंडिया और आधार कार्ड के इस दौर में भी दशकों पुरानी नौकरी के बाद क्या कर्मचारी को यह साबित करना पड़ेगा कि उसकी शादी वैध है या उसके पारिवारिक दस्तावेज? कार्मिक विभाग दस्तावेज सत्यापन के नाम पर रेलकर्मियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है. बड़ा सवाल यह उठने लगा है कि क्या यह जांच है या कर्मचारियों का प्रशासनिक दोहन ?
कहा जा रहा कि नियुक्ति के समय पुलिस सत्यापन, दस्तावेज सत्यापन तथा अन्य आवश्यक जांच प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद कर्मचारी की सेवा पुष्टि की जाती है, तब वर्षों बाद उन्हीं अभिलेखों एवं विवरणों पर प्रश्नचिह्न लगाना कहां तक उचित है. यदि विभाग को किसी प्रमाण-पत्र की सत्यता पर संदेह है तो उसे संबंधित सरकारी पोर्टल अथवा सक्षम प्राधिकारियों के माध्यम से सत्यापित करना चाहिए था. अगर डिजिटलीकरण के लिए कुछ प्रमाणपत्रों की जरूरत है भी तो कर्मचारियों को सहयोग करना चाहिए न कि प्रताड़ित. बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु बाध्य करना अनावश्यक मानसिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक बोझ उत्पन्न कर रहा है.
रेलकर्मियों ने सोनपुर मंडल रेल प्रबंधक से गुहार लगायी है कि वर्षों से स्वीकृत एवं अभिलेखित पारिवारिक विवरणों पर बिना किसी ठोस कारण के आपत्ति लगाने की प्रक्रिया को रोका जाये. सीनियर डीपीओ के अनावश्यक रूप से विवाह प्रमाण-पत्र एवं अन्य दस्तावेजों की पुनः मांग की प्रक्रिया की समीक्षा कर डीआरएम रेलकर्मियों को राहत दिलाने की पहल करें.
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