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    Home » ROURKELA : दशकों बाद भ्रष्टाचार के गढ़ में पहुृंची सीबीआई, रेलवे सिस्टम की खुली पोल, अधिकारी बेनकाब!
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    ROURKELA : दशकों बाद भ्रष्टाचार के गढ़ में पहुृंची सीबीआई, रेलवे सिस्टम की खुली पोल, अधिकारी बेनकाब!

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskAugust 23, 2025
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    • चक्रधरपुर रेलमंडल के वाणिज्य विभाग में ढाई साल बाद दूसरी बार सीबीआई कार्रवाई, शिकायत या साजिश!
    • संवेदनशील पदों पर तबादलाें में भेदभाव से उपजे आक्रोश और आपसी टकराव का नतीजा मान रहे रेलकर्मी
    • रेलवे विजिलेंस का सिस्टम पंगू, कर्मचारियों पर निगरानी रखने में विफल रहे रेलमंडल कॉमर्शियल के अफसर
    • रेलहंट ने लगातार पार्सल की अनियमिताओं को लेकर अधिकारियों को किया था आगाह, नहीं लिया संज्ञान     

    ROURKELA. सीबीआई ने 21 अगस्त 2025 की दोपहर राउरकेला स्टेशन पर पार्सल क्लर्क राजीव नंदन को 7,200 रुपये घूस लेते पकड़ा. उनके खिलाफ राजगांगपुर वार्ड नंबर 17 के निवासी (Aliyan Singh) अलायन सिंह ने 20 अगस्त को ही शिकायत दर्ज करायी थी. अलायन सिंह ने सीबीआई को दी गयी शिकायत में खुद को ग्रोशरी और इलेक्ट्राॅनिक सामानों का कारोबारी बताया है. यह मामला जेनरेटर बुकिंग से जुड़ा है. आरोप है कि पार्सल कर्मचारी बुकिंग और लोडिंग के नाम पर अनुचित रूप से 8000 रुपये लेने का दबाव बना रहा था.

    शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना सीधे सीबीआई को दी. दूसरे ही दिन सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपी क्लर्क को 7,200 रुपये लेते धर दबोचा. सीबीआई का यह एक्शन काफी त्वरित हुआ. राउरकेला में ही सीबीआई का स्थानीय कार्यालय भी है. चक्रधरपुर रेलमंडल के वाणिज्य विभाग में पिछले ढ़ाई साल में सीबीआई की यह दूसरी कार्रवाई है जबकि राउरकेला पार्सल में दशकों में कोई पहली कार्रवाई. इससे पहले सीबीआई ने मार्च 2023 में झारसुगुड़ा में छापामारी कर पार्सल क्लर्क गुंजन को 3500 रुपये घूस लेते पकड़ा था.

    राउरकेला में सीबीआई की दस्तक को रेलकर्मी पार्सल में फैले भ्रष्टाचार की छोटी कड़ी मानते हैं. रेलकर्मियों का कहना है कि अगर जांच का दायरा आगे बढ़े और कॉमर्शियल विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली, तबादलों में भेदभाव, सालों से एक ही शहर में जमे रेलकर्मियों की चल-अचल संपत्ति की पड़ताल हो तो रेलवे कॉमर्शियल विभाग में नीचे से ऊपर तक फैले भ्रष्टाचार की बड़ी कहानी उजागर हाे सकती है.

    राउरकेला स्टेशन पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई ने पूरे चक्रधरपुर रेलमंडल वाणिज्य विभाग के कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है. पार्सल में अवैध वसूली और मनमाने तरीके से सिस्टम चलाने का धंधा नया नहीं है. रेलवे विजिलेंस विभाग की सुस्ती और डिवीजन अधिकारियों के मौन के बीच भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआई की दस्तक ने जिम्मेदार लोगों की भूमिका को भी बेनकाब कर दिया है. सीबीआई ने रेलमंडल में झारसुगुड़ा के बाद राउरकेला में यानी दोनों बार कार्रवाई मिली शिकायत के बाद ही की है.

    यह भी पढ़ें : सीबीआई ने झारसुगुड़ा के रेलवे पार्सल क्लर्क गुंजन को 3500 रुपये घूस लेते पकड़ा

    रेलवे के सिस्टम से परेशान लोग यहां तक कहने लगे हैं कि अगर शिकायत लेकर सीबीआई के पास कोई नहीं जाता तो भ्रष्टाचार में संलिप्त रेलकर्मियों पर कार्रवाई तक नहीं होती ? रेलवे पार्सल में सीबीआई की कार्रवाई को रेलकर्मी अपने-अपने तरीके से परिभाषित कर रहे है और उसका निहीतार्थ भी निकाल रहे. यहां इस बात की भी चर्चा हो रही है कि रेलवे पार्सल से जुड़े किसी व्यक्ति ने साजिश के तहत जाल बिछाकर मामले को सीबीआई तक पहुंचाया? इसके बाद सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई को अंजाम दिया. इस प्रकरण के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे के जोनल विजिलेंस की कार्य प्रणाली तो रेलमंडल वाणिज्य विभाग के अधिकारियों की निगरानी प्रणाली सवालों के घेरे आ गयी है.

    सात साल से राउरकेला में जमे सीपीएस का तबादला विवाद की जड़ तो नहीं !

    रेलवे पार्सल में पिछले 30 सालों के रिकार्ड से यह प्रतीत होता है कि सभी बड़े स्टेशन पर पार्सल में कुछ लोगों की मठाधीशी चली है. दिखावे के लिए उनका तबादला कुछ समय के लिए जरूर हुआ लेकिन अधिकारियों से तालमेल बनाकर छह-आठ महीने में ही वापस वह पुराने स्थान पर ही काम करने लगे. इसमें एक नाम राउरकेला के पूर्व सीपीएस जयदेव मुखर्जी का सामने आ रहा है. सात साल बाद उनका तबादला फरवरी 2025 में किया गया लेकिन वह रिलीज नहीं हुए और आदेश का अनुपालन कराने के लिए अप्रैल 2025 में कंट्रोल आदेश जारी करना पड़ा.

    राउरकेला पार्सल में बड़ी घटनाओं के बाद भी सीपीएस मुखर्जी पर कार्रवाई नहीं की गयी

     

    रेल सूत्रों के अनुसार जयदेव मुखर्जी ज्वाइनिंग के बाद से ही ओडिशा में पदस्थापित रहे. संवेदनशील पदों पर तबादलों को लेकर रेलवे बोर्ड के सख्त दिशा-निर्देश के बावजूद पिछले 12 साल से वह बंडामुंडा के बाद अधिकांश समय राउरकेला में सीपीएस के पद पर बने रहे. भ्रष्टाचार के गढ़ कहे जाने वाले पार्सल में उनकी सात साल की लंबी पारी अफसरों से मिलीभगत का बड़ा उदाहरण मानी जाती रही है. झारसुगुड़ा के बाद राउरकेला पार्सल की घटना को भी रेलकर्मी पार्सल की इसी मठाधीशी का नतीजा मान रहे हैं.

    यह भी पढ़ें : TATANAGAR : 24 लाख की चावल चोरी में पानी पर लाठी पीट रहा आरपीएफ…

    सीबीआई की गिरफ्त में आये दोनों पार्सल क्लर्क का सहयोगियों से चल रहा था विवाद

    रेलवे महकमे में एक चर्चा जोरों पर है कि रेलमंडल में भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआई की कार्रवाई का शिकार बने दोनों पार्सल क्लर्क का विभागीय कार्य को लेकर सहयोगियों से विवाद चल रहा था. झारसुगुड़ा पार्सल में गुंजन की गिरफ्तारी भी शिकायत के आधार पर हुई थी जबकि राउरकेला पार्सल में राजीव नंदन की गिरफ्तारी भी शिकायत के आधार पर कार्रवाई में हुई. टाटानगर से तबादले के बाद राउरकेला पार्सल गये राजीव नंदन का टकराव शुरू से ही कार्य दायित्व में भेदभाव को लेकर तत्कालीन सीपीएस जयदेव मुखर्जी से था.

    राउरकेला पार्सल में बड़ी घटनाओं के बाद भी सीपीएस मुखर्जी पर कार्रवाई नहीं की गयी

    राजीव नंदन का ड्यूटी रोस्टर इसकी बड़ी गवाही देता है. सीपीएस उन्हें लगातार एक ही ड्यूटी लगाते रहे थे. इसकी शिकायत भी डिवीजन स्तर पर माैखिक रूप से की गयी लेकिन सीपीएस की शिकायत को आगे रखकर राजीव नंदन को दो ऐसे मामले में चार्जशीट दे दी गयी जो सामान्य घटनाएं थी. इन मामलों में उन्हें पनिशमेंट का सामना भी करना पड़ा था. सीपीएस जयदेव मुखर्जी से राजीव नंदन का यह टकराव पूरे पार्सल कार्यालय ही नहीं डिवीजन तक चर्चा के केंद्र में रहा था.

    यह भी पढ़ें : ROURKELA : रेलवे की गलत जानकारी ने ली यात्री की जान

    पार्सल क्लर्क की गिरफ्तारी के 24 घंटे बाद ही जेनरेटरों की बुकिंग रद्द करायी     

    सीबीआई की कार्रवाई में 21 अगस्त 2025 की दोपहर राउरकेला स्टेशन पर पार्सल क्लर्क राजीव नंदन की गिरफ्तारी के मामले में धीरे-धीरे तस्वीर साफ होने लगी है. सीबीआई छापेमारी के 24 घंटे बाद ही जिस जेनरेटर की बुकिंग के नाम पर भ्रष्टाचार की पटकथा लिखी गयी उसमें नया मोड़ आ गया. रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जेनरेटर की बुकिंग शनिवार को रद्द करा दी गयी है.

    सीबीआई एक्शन के 24 घंटे बाद ही जेनरेटर की बुकिंग रद्द

    यह बुकिंग एतवारी के लिए करायी गयी है. इस मामले में यह बात सामने आयी है कि बुकिंग अमाउंट वापस  लेने की जगह कंसेलेसशन शुल्क भी दिया गया है. इससे इस बात की चर्चा शुरू हो गयी है कि क्या यह पूरी प्रकरण सिर्फ क्लर्क को जाल में फंसाने के लिए रचा गया था? अब रेलकर्मी दबी जुबानसे पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं. रेलवे विजिलेंस को एक पत्र भी भेजे जाने की चर्चा है जिसमें कोविड काल में राउरकेला पार्सल बुकिंग में बड़े गोलमाल की जांच का अनुरोध किया गया है.

    यह भी पढ़ें : ROURKELA : सुपरफास्ट गाड़ियों को ”बर्निंग ट्रेन” बना सकता है ”केंदू पत्ता” 

    गिरफ्तार कर्मचारी राजीव नंदन को सीनियर डीसीएम ने किया निलंबित 

    चक्रधरपुर रेलमंडल के पार्सल विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में भले ही रेल प्रशासन गंभीरता नहीं दिखाये लेकिन कानूनी पेंच में गर्दन फंसते ही अधिकारियों की बेचैनी शुरू हो जाती है. सीबीआई की कार्रवाई में पार्सल क्लर्क राजीव नंदन की गिरफ्तारी के तत्काल बाद सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने उन्हें निलंबित कर दिया है. इस पूरे प्रकरण की जांच करायी जा रही है.

    आदित्य चौधरी, सीनियर डीसीएम, चक्रधरपुर

    चक्रधरपुर रेलमंडल में दो दिनों में तीन रेलकर्मियों की भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तारी ने यह तो साफ कर दिया कि सीनियर डीसीएम के नेतृत्व में एसीएम स्तर पर की जाने वाली कर्मचारियों पर मॉनिटरिंग पूरी तरह फेल रही है. जमीनी स्तर पर सूचना के अभाव और सीसीआई के भरोसे चलने वाली रेल मंडल वाणिज्य विभाग की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जो कॉमर्शियल की गिरती छवि को ही रेखांकित करता है….. जारी …

    रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उसे पूरा स्थान दिया जायेगा. 

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