- 2030 तक दिल्ली, मुंबई समेत 48 बड़े शहरों में रेलवे स्टेशनों की क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य
- रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रभार लेने के बाद ही वीआईपी कल्चर खत्म करने की वकालत की थी
- अब तक किसी भी स्तर पर घोषणा के अनुसार नहीं हुआ बड़ा बदलाव, भ्रष्टाचार के मामले ही बढ़े
NEW DELHI. रेलवे 2030 तक वर्क कल्चर में बड़ा बदलाव करने जा रहा है. इसके तहत पहले से घोषित वीआईपी कल्चर को खत्म करने पर अब जोर दिया जायेगा. जीएम, डीआरएम और अधिकारियों को मिलने वाले विशेष ट्रेन और सेलून सेवा बंद की जायेगी. विशेष कोच को यात्री कोचों में बदलने की तैयारी है. यही नहीं बड़े अधिकारियों की सेवा में डेपुटेशन पर लगे कर्मचारियों को हटाकर मूल विभाग को वापस भेजा जायेगा.
मीडिया में आयी रिपोर्ट के अनुसार रेलवे यात्रियों के लिए भी बड़े बदलाव करने जा रहा है. इसमें टिकटों पर कोटा सिस्टम खत्म करने की बात कही जा रही है. मेडिकल इमरजेंसी और अन्य तरह की विशेष परिस्थितियों को छोड़ते हुए सामान्य तौर पर कोटे से कन्फर्म होने वाले रेलवे टिकट सिस्टम को बंद करने की तैयारी है. दिलचस्प बात यह है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रभार लेने के बाद से ही रेलवे में वीआईपी कल्चर खत्म करने की वकालत की है लेकिन अब तक इस पर अम्लीजामा नहीं पहनाया जा सका है.
दूसरी ओर दिल्ली, मुंबई समेत 48 शहरों में रेलवे स्टेशनों की क्षमता को दोगुना करने का टारगेट रखा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में रेलवे बोर्ड में आयोजित उच्च स्तरीय मीटिंग में कई निर्णय लिये गये. इसमें शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म तीन कैटेगरी में रेलवे स्टेशनों की क्षमता डबल करने की बात कही गई है. इसके लिए सभी जीएम और डीआरएम से रिपोर्ट मांगी गयी है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को बताया कि बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने और भीड़भाड़ कम करने के लिए विभिन्न शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार किया जा रहा. रेलवे परिचालन क्षमता बढ़ा रही है. रेलवे नेटवर्क को अपग्रेड कर यह काम करेगा. देशभर में कनेक्टिविटी में सुधार लाएगा. इसके लिए 2030 तक का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि यह भी साफ किया गया है कि यह अंतिम लक्ष्य नहीं होगा. चरणबद्ध तरीके से इसे पूरा करने के लिए तीन श्रेणी बनायी गयी है. पहले चरण में शीघ्र होने वाले कार्य को पूरा किया जायेगा. इसमें रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म और टर्मिनल बढ़ाने के साथ ही पिट और स्टेबलिंग लाइनें भी बढ़ाना शामिल है.
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बड़े शहरों के साथ लगे छोटे स्टेशनों की भी बढ़ायी जायेगी क्षमता
रेलवे बोर्ड की मीटिंग के बाद यह बात भी सामने आयीा कि बड़े शहरों के स्टेशनों के साथ ही आसपास के छोटे स्टेशनों की क्षमता को भी बढ़ाया जायेगा. यह भी माना जा रहा है कि बड़े स्टेशनों पर ही सारा ट्रैफिक इकट्ठा न हो जाए. उपनगरीय और गैर-उपनगरीय, दोनों प्रकार के ट्रैफिक के लिए उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते स्टेशन पर विकास की योजना बनायी गयी है. रेलवे की ओर से बताया गया कि इस साल त्योहारों और मांग के अनुसार 43 हजार से अधिक स्पेशल ट्रिप लगाए जो पिछले साल 22 हजार थे.



















































































