NEW DELHI. एक तरफ जहां आम यात्री ट्रेनों की लेट-लतीफी और बोगियों में ठसाठस भीड़ से हलकान हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय रेलवे अपनी आर्थिक कमाई के नए रिकॉर्ड दर्ज कर रहा है. अगस्त 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, रेलवे ने माल ढुलाई (Freight Transport) में 5.4 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हासिल करते हुए 13.79 करोड़ टन माल ढोया है. यात्रियों की परेशानी के बीच रेलवे की इस ‘मालदार’ उपलब्धि ने तंत्र के प्राथमिकताओं पर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है.
मालगाड़ियों की बल्ले-बल्ले, खजाने में 6.27% का इजाफा
रेल मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में ढोए गए 13.09 करोड़ टन की तुलना में इस साल माल ढुलाई में जबरदस्त उछाल आया है. इस वृद्धि से रेलवे के राजस्व (कमाई) में 6.27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में कोयला, लौह अयस्क, क्लिंकर, उर्वरक और कंटेनर परिवहन की मांग में भारी तेजी देखी गई.
- लौह अयस्क ढुलाई: 12.1% वृद्धि
- क्लिंकर (सीमेंट कच्चा माल): 10.4% वृद्धि
- कंटेनर परिवहन (घरेलू): 9.2% वृद्धि
- कोयला: 6.0% वृद्धि
औद्योगिक सप्लाई चेन को गति देने के लिए अगस्त महीने में 5 नए गतिशक्ति माल टर्मिनल (GCT) भी शुरू किए गए, जिससे देश में कुल चालू गतिशक्ति टर्मिनलों की संख्या बढ़कर 149 हो गई है.
मुसाफिरों का क्या? भीड़ और लेटी-लतीफी के बीच सफर
एक ओर जहां माल ढुलाई वाली ट्रेनें फटाफट अपनी मंजिल तय कर रेलवे की जेब भर रही हैं, वहीं आम मुसाफिरों के लिए ‘सुगम सफर’ अभी भी चुनौती बना हुआ है.
अगस्त 2026 में 67.27 करोड़ यात्रियों ने ट्रेन से यात्रा की (जो पिछले साल के 64.43 करोड़ से अधिक है). विशेष रूप से लोकल और उपनगरीय (सबअर्बन) ट्रेनों में 9.02 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और 38.01 करोड़ यात्रियों ने धक्का-मुक्की के बीच सफर पूरा किया.
हालांकि रेलवे ने सुविधाओं के नाम पर 14 नई ‘अमृत भारत’ ट्रेनों को बेड़े में शामिल किया है (कुल संख्या 86 हुई), लेकिन नियमित ट्रेनों की लेटी-लतीफी और कंफर्म टिकट की किल्लत मुसाफिरों के पसीने छुड़ा रही है.
कमाई सुपरफास्ट, सुविधा पैसेंजर!
व्यापारियों और उद्योगों के लिए भारतीय रेलवे का यह ‘5.4% वाला कमाल’ निसंदेह देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला है. लेकिन आम यात्रियों का यही सवाल है, क्या माल की तरह मुसाफिरों की ट्रेनें भी कभी ‘राइट टाइम’ पर चलेंगी?




