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    Home » रेलवे में ‘अपना कानून’, पास के दुरुपयोग में ACM पर विजिलेंस का शिकंजा, टीटीई की लाचारी और ‘अवैध वीआईपी कल्चर’ पर उठे गंभीर सवाल
    बोर्ड/जोन

    रेलवे में ‘अपना कानून’, पास के दुरुपयोग में ACM पर विजिलेंस का शिकंजा, टीटीई की लाचारी और ‘अवैध वीआईपी कल्चर’ पर उठे गंभीर सवाल

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskJuly 24, 2026
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    सांकेतिक तस्वीर AI जेनरेटेड
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    Guntakal. रेलवे में नियमों का कड़ाई से पालन कराने और बिना टिकट या अनियमित यात्रा करने वालों पर नकेल कसने की जिम्मेदारी कमर्शियल विभाग की होती है. लेकिन जब इसी विभाग के वरिष्ठ राजपत्रित (Gazetted) अधिकारी ही नियमों की धज्जियां उड़ाने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है. हाल ही में दक्षिण मध्य/दक्षिण तटीय रेलवे के गुंतकल मंडल में कार्यरत असिस्टेंट कमर्शियल मैनेजर (ACM) धनंजय सिंह पर हुई विजिलेंस की कार्रवाई ने रेलवे प्रशासन के भीतर गहराई तक जड़ जमा चुके ‘अवैध वीआईपी कल्चर’ की पोल खोलकर रख दी है.

    क्या है पूरा मामला

    दक्षिण मध्य/दक्षिण तटीय रेलवे के गुंतकल रेलवे मंडल में कार्यरत असिस्टेंट कमर्शियल मैनेजर (ACM) धनंजय सिंह को विजिलेंस टीम ने ट्रेन में अनियमित यात्रा और रेलवे नियमों के उल्लंघन के मामले में पकड़ा है। यह कार्रवाई ट्रेन संख्या 12793 ‘रायलसीमा एक्सप्रेस’ में की गई।

    मिली जानकारी के अनुसार, एसीएम धनंजय सिंह तिरुपति से गुंतकल की यात्रा कर रहे थे1 यात्रा के दौरान विजिलेंस अधिकारियों को अनियमितता की सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने ट्रेन के एसी-1 (A1) कोच में छापेमारी की1 जांच के दौरान पाया गया कि बर्थ संख्या 13 और 15 पर एसीएम की पत्नी मोना कुमारी के नाम से पास जारी था, लेकिन उनकी जगह उनकी बहन उर्मिला देवी (साली ) यात्रा कर रही थीं.

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    रेलवे नियमों के तहत रेलवे पास गैर-हस्तांतरणीय (Non-transferable) होता है और इसका इस्तेमाल केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसके नाम से यह जारी हुआ है. किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस पास पर यात्रा करना नियमों का गंभीर उल्लंघन और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है. विजिलेंस टीम ने मौके पर ही मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

    क्यों लाचार रहते हैं टीटीई

    यह घटना कोई अकेली या अपवाद स्वरूप मामला नहीं है. जानकार बताते हैं कि लगभग हर रेलवे मंडल (Division) में इस तरह का ‘पास का खेल’ और अनियमित यात्रा आम बात है. इसका मुख्य कारण रेलवे की प्रशासनिक संरचना है:

    • अधीनस्थता का दबाव: एसीएम (ACM) कमर्शियल विभाग के गज़टेड अधिकारी होते हैं, जबकि ट्रेनों में टिकट जांच करने वाले टीटीई (TTE) और सीटीआई (CTI) सीधे तौर पर इन्हीं कमर्शियल अधिकारियों के अधीन कार्य करते हैं.
    • कार्रवाई का डर: यदि किसी ट्रेन में टीटीई को किसी अधिकारी या उनके रिश्तेदारों द्वारा पास के दुरुपयोग या बिना अथॉरिटी यात्रा की जानकारी मिल भी जाती है, तो भी वे कार्रवाई करने से कतराते हैं. टीटीई को हमेशा अपनी सर्विस बुक खराब होने, प्रतिकूल टिप्पणी (APAR), अवांछित तबादले या विभागीय उत्पीड़न का डर सताता रहता है.
    • ‘साहब’ का रुतबा: कई बार अधिकारी अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर अधीनस्थ कर्मचारियों पर अनैतिक दबाव बनाते हैं, जिससे टीटीई आंखें मूंदने पर मजबूर हो जाते हैं.

    विजिलेंस कार्रवाई से हड़कंप

    जब तक विजिलेंस (सतर्कता विभाग) जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसियां अचानक छापेमारी नहीं करतीं, तब तक इस तरह के मामले उजागर ही नहीं हो पाते. इस कार्रवाई के बाद से रेल गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है.

    यह मामला केवल एक पास के गलत इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रेलवे के अनुशासन और ईमानदारी पर गहरा धब्बा है. जब जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी ही नियमों को तोड़ेंगे, तो आम यात्रियों से अनुशासन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

    अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन इस मामले में आरोपी अधिकारी पर क्या कड़ा रुख अपनाता है, ताकि अधीनस्थ कर्मचारियों का मनोबल बढ़े और इस ‘वीआईपी संस्कृति’ पर अंकुश लग सके.

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