NEW DELHI. भारतीय रेलवे के स्टेशनों पर मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में देश के सैकड़ों रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की बदहाली और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिमों का उजागर हुआ है. इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद रेल मंत्रालय सख्त रुख अपनाते हुए एक्शन में आ गया है और सभी क्षेत्रीय (जोनल) रेलवे कार्यालयों से तत्काल रिपोर्ट तलब की है.
458 रेलवे स्टेशनों पर न्यूनतम सुविधाओं का अभाव
कैग द्वारा देश भर के 512 रेलवे स्टेशनों का विस्तृत ऑडिट किया गया था. जांच के दौरान इनमें से 458 स्टेशनों पर यात्रियों के लिए निर्धारित ‘न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं’ (Minimum Essential Amenities) में भारी कमियां पाई गईं. इस ऑडिट रिपोर्ट को हाल ही में संसद के पटल पर पेश किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, जिन स्टेशनों पर खामियां पाई गई हैं, उनमें से कई ऐसे स्टेशन भी शामिल हैं जो रेलवे के लिए भारी राजस्व (इनकम) उत्पन्न करते हैं और जहां रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है.
पीने के पानी में मिला खतरनाक ‘ई. कोलाई’ बैक्टीरिया
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू स्टेशनों पर सप्लाई होने वाले पेयजल और वॉटर कूलरों की गुणवत्ता से जुड़ा है. जांच के दौरान पानी के नमूनों में मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ‘टोटल कोलीफॉर्म’ और ‘ई. कोलाई’ (E. Coli) बैक्टीरिया पाए गए.
- 2022-23 की स्थिति: 8 जोनों के 49 स्टेशनों के प्लेटफॉर्म नलों के सैंपल में बैक्टीरिया की पुष्टि हुई.
- 2023-24 की स्थिति: 9 जोनों के 56 स्टेशनों से लिए गए पानी के सैंपल में ई. कोलाई की मौजूदगी पाई गई.
विशेषज्ञों के अनुसार, ई. कोलाई मुख्य रूप से दूषित पानी के माध्यम से फैलता है और इसके सेवन से पेट में संक्रमण, उल्टी, दस्त जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. ऑडिट में यह भी सामने आया कि पानी में क्लोरीन की मात्रा या तो बहुत कम थी या जरूरत से ज्यादा, जिससे स्पष्ट होता है कि स्टेशनों पर जल शोधन (Water Purification) और नियमित जांच मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है.
इन प्रमुख सुविधाओं में पाई गई बदहाली
कैग की रिपोर्ट में केवल पेयजल ही नहीं, बल्कि यात्रियों से जुड़ी अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं की बदहाली को भी रेखांकित किया गया है:
- शौचालय व मूत्रालय: सफाई का पूरी तरह अभाव, गंदगी और नल-फिटिंग्स का खराब होना.
- वेटिंग एरिया व प्लेटफॉर्म: बैठने के लिए पर्याप्त बेंचों की कमी, पंखों का न चलना और प्लेटफॉर्म शेल्टर (छाया) का अधूरा होना.
- साइनबोर्ड व सूचना प्रणाली: यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए लगे साइनबोर्ड्स का क्षतिग्रस्त होना या गायब होना.
रेल मंत्रालय का कड़ा रुख और एक्शन प्लान
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेल मंत्रालय ने सभी जोनल रेलवे महाप्रबंधकों को पत्र जारी कर कैग की आपत्तियों पर अनुच्छेद-वार (Paragraph-wise) अद्यतन रिपोर्ट और की गई कार्रवाई (Action Taken Report) की स्थिति मांगी है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस कार्य को अत्यंत प्राथमिकता दी जाए और सभी जोनल कार्यालय अपनी विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित ईमेल पर अविलंब भेजें.
रेलवे द्वारा इस कदम के बाद अब यह देखना अहम होगा कि जोनल कार्यालय इन खामियों को दूर करने और यात्रियों को स्वच्छ पानी व बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं.
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