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दागी रेलकर्मियों के लिए ‘सुरक्षित रास्ता’ बंद, जांच पूरी होने तक नहीं ले सकेंगे VRS

सांकेतिक तस्वीर
  • रेलवे बोर्ड ने VRS के नियमों में किया बड़ा बदलाव, निलंबित या गंभीर जांच का सामना कर रहे रेलकर्मियों को नहीं मिलेगी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति

NDLS. रेलवे बोर्ड ने रेल कर्मचारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Retirement Scheme – VRS) को लेकर एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया है. बोर्ड ने गंभीर आरोपों या जांच का सामना कर रहे रेलकर्मियों के वीआरएस लेने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.

इसके लिए सक्षम प्राधिकारी को यह अधिकार दिया गया है कि वे विशेष परिस्थितियों में किसी भी रेलकर्मी के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन को खारिज या होल्ड कर सकते हैं.

रेलवे बोर्ड ने भारतीय रेल स्थापना कोड के नियमों में संशोधन के बाद यह आदेश जारी किया है. रेलवे बोर्ड के इस निर्णय के पीछे केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के एक पुराना फैसला अहम बिंदू बना है.

इन 3 परिस्थितियों में नहीं मिलेगा VRS

रेलवे बोर्ड के नए नियमों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति चाहता है, लेकिन वह निम्नलिखित तीन श्रेणियों में से किसी भी एक का हिस्सा है, तो उसकी अनुमति रोकी जा सकती है:

कर्मचारी का निलंबन : यदि कोई रेल सेवक वर्तमान में अपने पद से निलंबित चल रहा है, तो उसके वीआरएस आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

लंबित विभागीय कार्रवाई : यदि कर्मचारी के खिलाफ प्रशासन द्वारा कोई आधिकारिक आरोप पत्र (Charge-sheet) जारी किया जा चुका है और अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रक्रिया में है.

लंबित न्यायिक मामले : यदि रेलकर्मी के खिलाफ अदालत या कानून के समक्ष कोई ऐसी न्यायिक कार्यवाही लंबित है, जिसमें गंभीर कदाचार के आरोप शामिल हैं. इसके दायरे में पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी (FIR)/रिपोर्ट या मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान में ली गई कोई भी आपराधिक कार्यवाही भी आएगी.

वर्ष 2014 से ही प्रभावी माने जाएंगे नए नियम

रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि वीआरएस से जुड़े नियमों में किया गया यह संशोधन 17 जनवरी 2014 से ही प्रभावी माना जाएगा. रेलवे ने कर्मचारियों को राहत देते हुए यह भी साफ किया है कि इस कट-ऑफ तारीख (17 जनवरी 2014) से पहले जो मामले पहले ही बंद या तय हो चुके हैं, उन्हें दोबारा नहीं खोला जाएगा.

क्यों पड़ा इस कड़े कदम की जरूरत?

रेलवे के इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना और दागी या आरोपी कर्मचारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए वीआरएस का सहारा लेने से रोकना है.

अक्सर देखा जाता था कि जांच के डर से कर्मचारी वीआरएस का विकल्प चुन लेते थे, लेकिन अब नए नियम लागू होने से रेलवे ऐसे मामलों पर कड़ाई से शिकंजा कस सकेगा.

यह आदेश देश के सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों (Production Units) और संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से कड़ाई से लागू करने के लिए भेज दिया गया है.

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